Lucnow Nikay Chunav Result : लखनऊ में भाजपा की मेयर प्रत्याशी सुषमा खर्कवाल ने सपा को 2.04 लाख मतों से हराया
लखनऊ के 110 वार्डों में से भाजपा ने 80, सपा ने 21, कांग्रेस व निर्दलीय ने चार-चार और बसपा ने एक में दर्ज की जीत। 10 नगर पंचायतों में भाजपा, सपा और बसपा को तीन-तीन और एक निर्दलीय को अध्यक्ष पद
मिला।
विस्तार
नगर निगम चुनाव में शहर एक बार फिर भगवामय हो गया। 110 वार्डों में से भाजपा ने 80 पर परचम लहराया। पार्टी की मेयर प्रत्याशी सुषमा खर्कवाल ने रिकॉर्ड 2.04 लाख वोटों से प्रचंड जीत दर्ज की। सपा को 21, कांग्रेस को चार और बसपा को एक वार्ड में जीत मिली। चार वार्डों में निर्दलीय जीते। पिछले चुनाव में भाजपा ने 58 वार्डों में जीत दर्ज की थी। दस नगर पंचायतों की बात करें तो भाजपा, सपा और बसपा को तीन-तीन और एक निर्दलीय को अध्यक्ष पद मिला है।
सुषमा खर्कवाल को सिर्फ सपा प्रत्याशी वंदना मिश्रा ही कुछ टक्कर दे पाईं। इन दोनों के अलावा बाकी 11 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इनमें बसपा की शाहीन बानो, कांग्रेस की संगीता जायसवाल और आम आदमी पार्टी की अंजू भट्ट शामिल हैं। जीत के बाद सुषमा खर्कवाल के आवास और भाजपा कार्यालय पर भी जश्न मनाया गया।
रमाबाई अंबेडकर मैदान में शनिवार को मतगणना के पहले ही चरण से भाजपा प्रत्याशी ने बढ़त बना ली। आखिरी 20वें राउंड तक आते-आते सुषमा खर्कवाल और बाकी प्रत्याशियों के बीच वोट का अंतर 1.84 लाख हो चुका था। ऐसे में दोपहर करीब 12:30 बजे के बाद परिसर में मेयर पद का दूसरा प्रत्याशी दिखाई ही नहीं दिया। अंत में सुषमा खर्कवाल ने 2,04,141 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें 5,02,660 वोट मिले। दूसरे स्थान पर रहीं सपा की वंदना मिश्रा को 2,98,519 वोट मिले। कांग्रेस की संगीता जायसवाल को 1,02,633 और बसपा की शाहीन बानो को 75,997 वोट मिले। आप की अंजू भट्ट को 25,206 वोट मिले।
11 साल बाद टूटा जीत का रिकॉर्ड
लखनऊ में मेयर के चुनाव में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड 11 साल बाद टूट गया। इससे पहले 2012 में डॉ. दिनेश शर्मा 1.73 लाख वोटों के अंतर से जीते थे। 2017 के चुनाव में संयुक्ता भाटिया ने 1.31 लाख वोटों के अंतर से विरोधी को हराया था। इस बार सुषमा खर्कवाल और सपा की प्रत्याशी में 2.04 लाख वोटों का अंतर है। भाजपा ने लगातार छठवीं बार लखनऊ में मेयर बनाने का रिकॉर्ड भी बना लिया है।
पोस्टल बैलेट में भी आगे रहीं सुषमा
सुषमा खर्कवाल पर सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों ने भी भरोसा जताया है। पोस्टल बैलेट की गिनती में उन्हें 1863 में से 854 वोट मिले हैं। सपा की वंदना मिश्रा को 537, बसपा की शाहीन बानो को 233, आप की अंजू भट्ट को 73 और कांग्रेस की संगीता जायसवाल को 60 वोट मिले। 15 लोगों को कोई प्रत्याशी अच्छा नहीं लगा और उन्होंने नोटा का उपयोग किया।
13 में से 11 की जमानत हुई जब्त
निर्वाचन आयोग का नियम है कि प्रत्याशियों को कुल पड़े वोट का छठवां भाग कम से कम मिलना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उसकी जमानत की रकम जब्त हो जाएगी। भाजपा के अलावा केवल सपा प्रत्याशी को ही न्यूनतम 1.72 लाख से अधिक वोट मिले। ऐसे में बाकी 11 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
आठ प्रत्याशियों से अधिक नोटा को वोट
मेयर के चुनाव में नोटा (नन ऑफ द अबव) का बटन भी खूब दबा। 6850 वोटरों ने इसका इस्तेमाल किया। यह आंकड़ा 13 में से आठ प्रत्याशियों को मिले वोटों से अधिक था। मेयर पद के लिए कुल वोट 10,36,079 गिने गए। इनमें से 10,34,216 ईवीएम के जरिए पड़े।
किसे, कितने वोट मिले
प्रत्याशी वोट
सुषमा खर्कवाल, भाजपा 5,02,660
वंदना मिश्रा, सपा 2,98,519
संगीता जायसवाल, कांग्रेस 1,02,633
शाहीन बानो, बसपा 75,997
अंजू भट्ट, आप 25,206
लक्ष्मी कुशवाला, जनअधिकार पार्टी 4,701
अल्का पांडेय, सुभासपा 3,813
ऊषा त्रिपाठी, गांधीयन पीपुल्स पार्टी 3,227
आशा मिश्रा, निर्दलीय 3645
डॉ. नलिनी खन्ना 1836
मधु सेन, निर्दलीय 2571
मिथिलेश सिंह, निर्दलीय 2383
मंजू दोहरे, निर्दलीय 2038
नोटा 6850
नगर पंचायतों में भाजपा का दायरा बड़ा, पर बीकेटी गंवाया
नगर पंचायतों के नतीजे चौंकाने वाले हैं। दस नगर पंचायतों में तीन में भाजपा, तीन सपा, तीन बसपा और एक निर्दल को अध्यक्ष पद मिला है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी बीते चुनाव की तुलना में एक की जगह तीन सीटें जीत गई, लेकिन सबसे बड़ी नगर पंचायत बीकेटी उससे सपा ने छीन ली है। वहीं कांग्रेस का खाता इस बार भी नहीं खुला। भाजपा के लिए यह सोचने वाली बात है कि केन्द्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर के गढ़ और भाजपा विधायक की विधानसभा में कमल नहीं खिल सका। मलिहाबाद केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर का गढ़ है, जहां से उनकी पत्नी जयदेवी कौशल विधायक हैं। वहीं मोहनलालगंज से खुद केन्द्रीय राज्यमंत्री सांसद हैं और उनके एक रिश्तेदार भी इसी सीट से विधायक हैं। ये दोनों गढ़ बसपा और निर्दल के खाते में चले गए।
2017 मे सबसे बड़ी नगर पंचायत बीकेटी में चेयरमैन की कुर्सी भाजपा के पास थी, इस बार सपा ने कब्जा जमाया और सीट हथिया ली। सपा के गनेश रावत को 14403, जबकि भाजपा प्रत्याशी रवीन्द्र कुमार को 12040 मत मिले। कांग्रेस का तो नगर पंचायतों से सूपड़ा ही साफ हो गया। 2017 में भी उसका खाता नहीं खुला था। काकोरी नगर पंचायत पर सपा के अश्मि खां का कब्जा था, जिसे खत्म करते हुए इस क्षेत्र में रोहित साहू ने कमल खिलाया। इतना ही नहीं यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि मतों के बड़े अंतर से भाजपा जीती। रोहित साहू को 5239 और सपा के इब्राहिम मंसूरी को 3377 मत प्राप्त हुए।
नगराम में 2017 के चुनाव में सपा के राम किशोर ने सीट जीती थी। इस बार भी सपा का कब्जा रहा, सीट ओबीसी महिला होने के कारण पूर्व चेयरमैन जीनत नजीर को मौका मिला। उन्होंने 3122 मत प्राप्त किए। अमेठी नगर पंचायत सीट महिला सामान्य हो जाने के कारण शहनाज बानो को प्रत्याशी बनाया गया, जिन्होंने 3838 मत पाकर सीट को घर में ही सुरक्षित रखा। ये निवर्तमान चेयरमैन मो. वहीद की चाची हैं। यहां पर भाजपा मात्र 563 वोट पाकर चौथे स्थान पर खिसक गई।
2017 में महोना सीट सपा के एन इशरत बेग के नाम रही थी। इस बार बसपा ने कब्जा जमाया और जियाउर्ररहमान चेयरमैन बने। दूसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी रमेश चंद्र रहे। सपा यहां पर तीसरे स्थान पर चली गई। मलिहाबाद में 2017 में सपा की अस्मत आरा खां ने जीत हासिल की थी। यहां 2023 के चुनाव में सपा को नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि प्रत्याशी अस्मत आरा खां ही थीं, लेकिन वे बसपा के टिकट पर चुनाव जीतीं। भाजपा यहां पर दूसरे स्थान पर रही। इटौंजा नगर पंचायत में भाजपा ने बेहतर किया और अवधेश कुमार अवस्थी 2080 मत से विजयी रहे। पिछले चुनाव में यहां पर निर्दलीय प्रत्याशी सपा-भाजपा पर भारी पड़े थे। गोसाईंगंज में निखिल मिश्रा का सिक्का चला, वे भाजपा के टिकट पर जीते। पिछला चुनाव में उन्होंने निर्दलीय जीता था। इटौंजा में कमल खिला और अवधेश कुमार अवस्थी जीते।
बंथरा और मोहनलालगंज को मिला चेयरमैन
बंथरा और मोहनलालगंज पहली बार नगर पंचायत बनी हैं। बंथरा में बसपा ने अपना प्रभुत्व जमाया। यहां पर रामावती ने 4195 मतों से जीत हासिल की और भाजपा प्रत्याशी शांति देवी को हराया। जबकि मोहनलालगंज में निर्दलीय प्रत्याशी राजेश कुमार सपा-भाजपा पर भारी पड़े। यहां उन्होंने 9352 मत हासिल किए। खास बात है कि उन्होंने पूर्व विधायक अंबरीश पुष्कर की प्रत्याशी पत्नी सपा से विजय लक्ष्मी को मात दी। इतना ही नहीं विजय लक्ष्मी खुद जिला पंचायत सदस्य थीं, जिन्होंने इस्तीफा देकर ये चुनाव लड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के रामलाल तीसरे स्थान पर खिसक गए।
गोसाईंगंज नगर पंचायत के बाजार मध्य वार्ड से भाजपा के प्रत्याशी दिलीप गुप्ता निर्दलीय प्रत्याशी अखिलेश गुप्ता से 15 मतों से चुनाव हार गए। इस पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए वोटों की सही गिनती नहीं करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। हालांकि मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वो नहीं मानें। आखिर में करीब 20 मिनट बाद उन्हें मतदान स्थल से पुलिसकर्मियों ने बाहर कर दिया।
इटौंजा में पलटी बाजी, दोबारा मतगणना को लेकर हंगामा
भाजपा प्रत्याशी अवधेश कुमार अवस्थी और इटौंजा नगर पंचायत में कर्मचारी चमन पांडेय की पत्नी व निर्दलीय प्रत्याशी जयमाला पांडेय के बीच काटे की टक्कर रही। दोनों में मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया। पहले राउंड की मतगणना में अवधेश जयमाला पर भारी पड़े। दूसरे राउंड में यह अंतर बेहद कम हो गया। तीसरे राउंड में केवल चार वोट का अंतर रह गया था और चौथे में आठ वोट का हो गया। पांचवें राउंड में जयमाला ने बाजी पलट दी। अंत में अवधेश अवस्थी को विजयी घोषित कर दिया गया। जबकि जयमाला पांडेय के समर्थकों ने दोबारा मतगणना की मांग करते हुए हंगामा भी किया।
कायम रही नवाब घराने की बादशाहत,पहली बार बसपा का चेयरमैन
मलिहाबाद। ब्रिटिश काल से नगर पंचायत की कुर्सी पर काबिज नवाब घराने की बादशाहत इस चुनाव में भी बरकरार रही। यहां बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी निवर्तमान चेयरमैन तथा नवाब मोहम्मद अली खां की परपोती असमत आरा खान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी मालती यादव को 255 मतों से पराजित कर पहली बार बसपा की झोली में यह सीट डाली है। शुरुआती तीन राउंड तक भाजपा प्रत्याशी अच्छी बढ़त बनाए रही जो चौथे राउंड में कम हो गई। इस जीत के साथ ही समाजवादी किला भी ढह गया। 1988 से अबतक चेयरमैन की कुर्सी पर सपा प्रत्याशी ही काबिज रहा।
बंथराः कड़ी टक्कर की बीच बसपा ने मारी बाजी, रचा इतिहास
बंथरा नगर पंचायत में बसपा प्रत्याशी रामावती ने कड़ी टक्कर के बीच भाजपा प्रत्याशी को 751 मतों से हरा कर पहला चेयरमैन होने का इतिहास रचा। पहले राउंड में सबसे आगे रहने वाली सपा प्रत्याशी विमला बहादुर एक बार पिछड़ने के बाद फिर लड़ाई में नहीं आ सकीं। तीसरे चक्र तक बसपा व भाजपा प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर रही और चौथे राउंड में बसपा ने बढ़त हासिल कर भाजपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ दिया। गिनती के दौरान बसपा व भाजपा समर्थको के बीच मत पत्रों क बंडलों को लेकर तीकी नोंकझोंक भी हुई। बंथरा नगर पंचायत के चेयरमैन पद के लिए भाजपा ने रिटायर्ड इंजीनियर विक्रम प्रसाद की पत्नी व सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज की समधन शांतिदेवी को प्रत्याशी बनाया था। जबकि बसपा ने अपने कैडर कार्यकर्ता रंजीत रावत की मां रामावती को मैदान में उतारा था। उधर टिकट न मिलने से नाराज बसपा की विमला बहादुर ने सपा का दामन थामकर चुनाव मैदान में कूदी थी और कांग्रेस ने यहां से विधानसभा चुनाव लड़ चुके रूद्रदमन के करीबी गनेशी रावत की पत्नी पुष्पा को टिकट दिया था।