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अपार्टमेंट हादसा: दो माह की बेटी को सीने से लगाकर सोया था, फिर दोनों उठे नहीं; बीवी ने बयां किया दर्दनाक मंजर

Sat, 30 Sep 2023 11:02 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 30 Sep 2023 11:02 AM IST
सार

लखनऊ के पीजीआई इलाके में निर्माणाधीन अपार्टमेंट हादसे में मुकादम और उसकी बेटी सायमा की मौत से परिवार बेहाल है। पत्नी ने दर्दनाक हादसे का मंजर बयां किया। 

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Lucknow News Under construction apartments accident Wife describe scene of painful accident
मुकादम की मौत के बाद बिलखती पत्नी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दो माह की मासूम बेटी सायमा को हर रात मुकादम सीने से लगाकर सुलाता था। बृहस्पतिवार रात को भी वह अपने पिता के साथ ही थी। अचानक हादसा हुआ। कुछ समझ नहीं आया। मलबे से जब बाहर निकले तो दोनों को खोज रहे थे...। कुछ देर बाद दोनों बेजान से बाहर निकाले गए। अस्पताल पहुंचने तक आस थी, लेकिन डॉक्टरों ने जैसे ही कहा कि बहुत देर हो चुकी है तो पैरों तले जमीन खिसक गई।
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गम में डूबी रुखसाना ने शनिवार को रुंधे गले से दर्दनाक मंजर बयां किया। वह अस्पताल में थीं। मुकादम के बुजुर्ग पिता शब्बीर व अन्य परिजन बेहाल थे। बता दें कि पीजीआई इलाके में बृहस्पतिवार रात निर्माणाधीन अपार्टमेंट का एक हिस्सा तेज धमाके के साथ गिर गया था। मलबे में दबकर मुकादम और उसकी बेटी सायमा की मौत हो गई।
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रुखसाना ने बताया कि दो वक्त की रोटी के लिए पूरा परिवार मजदूरी करता है। किराये पर रहते तो ज्यादा पैसा लगता, इसलिए जहां पर काम चलता था वहीं रुक जाते थे। परिवार झोपड़ी में रहता था। दिनभर काम के बाद खाना बनाया। सोते वक्त ही हादसा हुआ। मुकादम व सायमा दोनों एक साथ सोते थे। बृहस्पतिवार को वह आखिरी बार सोए और उठे ही नहीं।
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50 हजार रुपये दिए और मदद का आश्वासन दिया
हादसे के बाद कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये अंतिम संस्कार के लिए दिए। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि करीब साढ़े चार लाख रुपये की आर्थिक मदद कंपनी देगी। रोते बिखलते परिजन लौट गए।
 

घायलों ने बयां की दास्तां, बोले- क्या हुआ कुछ समझ ही नहीं आया
हादसे के बाद मजदूर सहमे हुए थे। जो लोग डिस्चार्ज हुए वह काम छोड़कर घर चले गए। इससे पहले उन्होंने बताया कि हादसे के वक्त वह सो रहे थे। अचानक मिट्टी धंस गई और वह सभी उसके भीतर दब गए। मिट्टी इतनी ज्यादा थी कि हिल भी नहीं पा रहे थे। हादसा देख पुलिस से पहले भी कुछ लोग मौके पर पहुंच गए थे।

उन्होंने अपने स्तर से प्रयास करके दो चार लोगों को बाहर निकाल लिया था। हालांकि कुछ ही देर बाद पुलिस पहुंच गई तो वह भी सुरक्षित निकल लिए गए। चूंकि पिता-पुत्री देर तक और काफी नीचे दबे थे, इसलिए उनकी जान नहीं बच सकी।
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