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हर विवि बनाए एक रैंकिंग व रिसर्च सेल, उपक्रम की बैठक में दिए गए कई सुझाव
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लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालयों की रैंकिंग सुधारने के लिए गठित उपक्रम की रविवार को हुई बैठक में संबंधित विश्वविद्यालयों को सुझाव दिया गया कि वे अपने यहां एक रैंकिंग और एक रिसर्च सेल का गठन करें।
उपक्रम की महानिदेशक लखनऊ विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में हुई बैठक में रैंकिंग के लिए 11 विश्वविद्यालयों को तैयार करने के लिए सदस्यों ने रणनीति पर चर्चा की। रैंकिंग सेल, रैंकिंग एजेंसियों की ओर से आवश्यक मानदंडों पर डाटा संग्रह और संकलन में शामिल होगा। विशेष रूप से मानविकी और सामाजिक विज्ञान विषय के लिए अनुसंधान अनुदान और गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन (स्कोपस/वेब ऑफ साइंस की सुविधा) के लिए अनुसंधान सेल की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालयों को अनुसंधान सहयोगियों में वृद्धि करने पर भी सहमति बनी।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि विश्वविद्यालयों को स्टडी इन इंडिया पोर्टल पर पंजीकरण की पहल करनी चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उनकी पसंद के विश्वविद्यालयों का चयन करने की सुविधा प्रदान करेगा। साथ ही संकाय सदस्यों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। हाल ही में चंडीगढ़ से लौटने के बाद यह पहली बैठक थी। बैठक में लखनऊ विवि, केजीएमयू, एमएमटीयू आदि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
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उपक्रम की महानिदेशक लखनऊ विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में हुई बैठक में रैंकिंग के लिए 11 विश्वविद्यालयों को तैयार करने के लिए सदस्यों ने रणनीति पर चर्चा की। रैंकिंग सेल, रैंकिंग एजेंसियों की ओर से आवश्यक मानदंडों पर डाटा संग्रह और संकलन में शामिल होगा। विशेष रूप से मानविकी और सामाजिक विज्ञान विषय के लिए अनुसंधान अनुदान और गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन (स्कोपस/वेब ऑफ साइंस की सुविधा) के लिए अनुसंधान सेल की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालयों को अनुसंधान सहयोगियों में वृद्धि करने पर भी सहमति बनी।
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बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि विश्वविद्यालयों को स्टडी इन इंडिया पोर्टल पर पंजीकरण की पहल करनी चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उनकी पसंद के विश्वविद्यालयों का चयन करने की सुविधा प्रदान करेगा। साथ ही संकाय सदस्यों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। हाल ही में चंडीगढ़ से लौटने के बाद यह पहली बैठक थी। बैठक में लखनऊ विवि, केजीएमयू, एमएमटीयू आदि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
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