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Lucknow News : एजेंट कासिफ की गिरफ्तारी के बाद शेरपुरिया ने कई नेताओं से साधा था संपर्क, ईडी ने जुटाया ब्योरा
Mon, 08 May 2023 11:09 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 08 May 2023 11:09 PM IST
सार
दूसरी ओर ईडी शेरपुरिया की गुजरात, दिल्ली और यूपी में 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का पता लगा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक इन संपत्तियों की बाजार कीमत इससे कई गुना अधिक है।
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संजय शेरपुरिया।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
जालसाज संजय राय शेरपुरिया ने एजेंट कासिफ की नोएडा से गिरफ्तारी के बाद अपने करीबी कुछ नेताओं और अफसरों से संपर्क करके मदद मांगी थी। उसे खुद के गिरफ्तार होने का डर सता रहा था, जिसकी वजह से वह चार दिन तक भूमिगत रहा। इससे पहले कि वह अपने खिलाफ सारे सुबूतों को नष्ट कर पाता, एसटीएफ ने उसे दबोच लिया। अब उसके मोबाइल से नष्ट डाटा को रिकवर करके यह पता लगाया जाएगा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह किन लोगों के संपर्क में था।
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वहीं दूसरी ओर ईडी शेरपुरिया की गुजरात, दिल्ली और यूपी में 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का पता लगा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक इन संपत्तियों की बाजार कीमत इससे कई गुना अधिक है। ये संपत्तियां शेरपुरिया ने जालसाजी के कारोबार के जरिए जुटाई हैं। उसने अधिकतर निवेश अपने गृह जनपद गाजीपुर में किया। वहीं, गुजरात में उसकी अधिकतर संपत्तियां पत्नी के नाम से है।
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अब ईडी के अधिकारी यूपी एसटीएफ से शेरपुरिया से हुई पूछताछ की रिपोर्ट लेने जा रही है ताकि रिमांड पर लेने के दौरान उसके आधार पर आगे की पूछताछ की जा सके। वहीं, शेरपुरिया के ठिकानों से बरामद इलेक्ट्रानिक गैजेट्स के जरिए ईडी के अधिकारी उसके संपर्क में रहने वाले जांच एजेंसियों के अफसरों के बारे में गहनता से छानबीन कर रहे है। दरअसल, एजेंट कासिफ के गिरफ्तार होने के बाद शेरपुरिया ने अपने मोबाइल का डाटा तो नष्ट कर दिया, लेकिन अपने ऑफिस में मौजूद लैपटॉप, टैब, पेन ड्राइव और दो मोबाइल को हड़बड़ी में नहीं हटा सका।
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दस्तावेज देखने के बाद ईडी ने छोड़ा
शेरपुरिया के एनजीओ में छह करोड़ रुपये ट्रांसफर होने के बाद ईडी के अधिकारियों ने उससे पूछताछ की थी, हालांकि उसके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलने पर उसे जाने दिया था। जब ईडी के अधिकारियों ने उससे छह करोड़ रुपये के बारे में पूछा तो उसने ये रकम कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलटी (सीएसआर) के तहत लेने संबंधी दस्तावेज पेश कर दिए। वहीं उद्योगपति गौरव डालमिया ने भी इसकी पुष्टि की थी। हालांकि ईडी ने एहतियातन उसके एनजीओ के खाते को सीज कर दिया था।