बिना ड्राइवर भी ट्रैक पर दौड़ेगी लखनऊ मेट्रो, कुछ ही देशों में है ये तकनीकि
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छह सितंबर से आम जनता के लिए शुरू हो रहीं लखनऊ मेट्रो की ट्रेनें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक तकनीक से लैस होंगी। कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल तकनीक (सीबीटीसी) से लखनऊ मेट्रो को बिना ड्राइवर के भी चलाया जा सकेगा।
यह संचालन सीधे ट्रांसपोर्ट नगर डिपो में बने ऑपरेशन कंट्रोल रूम से होगा। जरूरत पड़ने पर यात्रियों से सीधे कंट्रोल रूम से टॉकबैक सुविधा से बात हो सकेगी। वहीं, सिक्योरिटी कंट्रोल रूम भी ड्राइवर के बिना चल रही मेट्रो ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी कर चेतावनी दे सकेगा। जरूरत पर सुरक्षा स्टाफ को कार्रवाई को सूचना दी जा सकेगी।
लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि दुनिया में कुछ ही देशों में सीबीटीसी तकनीक का उपयोग हुआ है। इनमें चीन और यूरोप के कुछ देश शामिल हैं। भारत में दिल्ली में अभी इसका प्रयोग शुरू किया गया है। कोच्चि मेट्रो में इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
ट्रेनों का कंट्रोल रेडियो तकनीक से होने की वजह से दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करते हुए तेज गति और अधिक फ्रीक्वेंसी से संचालन संभव हो पाता है। इससे अगली ट्रेन के समय को भी न्यूनतम किया जा सकता है। यह रेडियो टेक्नोलॉजी 2.4 से 5.8 गीगाहर्ट्ज के बैंड पर मेट्रो ट्रेनों में काम करेगी।
कम होगा एलएमआरसी का खर्च
ट्रेनों की तकनीक के विश्वस्तरीय होने से जहां लखनऊ के लोगों को बेहतर सुविधा का एहसास कराया जा सकेगा, वहीं एलएमआरसी के खर्च को भी ये ट्रेनें कम करेंगीं।
ट्रेनों में री-जनरेटिव ब्रेक होने से 30 प्रतिशत तक ऊर्जा को दुबारा पैदा कर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे संचालन में बिजली की खपत कम होगी। इसके अलावा ट्रेनों के टॉप पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये ट्रेक्शन की निगरानी करेंगे।
ट्रेनों में लगा सेंट्रलाइज मेंटेनेंस सपोर्ट सिस्टम आसानी से ट्रेनों में होने वाले नुकसान की पहचान कर न्यूनतम समय में मरम्मत करने में मदद करेगा। ट्रांसपोर्ट नगर डिपो के इंस्पेक्शन बे में इस तकनीक को विकसित किया गया है।
मेट्रो के संचालन को एक पूरा सिस्टम विकसित किया गया है। यह ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेटिंग सिस्टम पूरे संचालन पर कंट्रोल रखेगा। इससे ट्रेन तयशुदा स्पीड से नहीं बढ़ पाएगी। वहीं, ऑपरेशन कंट्रोल रूम में लगी स्क्रीन पर यह सिस्टम हर ट्रेन की लोकेशन बताता रहेगा। इससे ट्रेनों के आने-जाने पर निगाह रखकर यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा कराई जा सकेगी।
सुबह छह से रात 10 तक होगा ट्रेनों का संचालन
इसके बाद मांग के आधार पर इसे घटाकर पांच मिनट किया जाना तय हुआ है। वहीं, अभी स्टेशनों पर ट्रेन 30 सेकंड रुकेगी। लोगों के अभ्यस्त होने के बाद इसे दिल्ली की तरह 20 सेकंड किया जाना है। इस समय में ही लोगों को मेट्रो में चढ़ना और उतरना होगा।
अपनी तकनीक और काम करने की गुणवत्ता के चलते लखनऊ मेट्रो को कई विश्वस्तरीय अवार्ड भी मिल चुके हैं। इनमें पोस्टल विभाग की ओर से विशेष डाक टिकट जारी कर दिया सम्मान, मैड्रिड स्पेन में इंटरनेशन क्वालिटी समिट अवार्ड 2016, ग्रीन ट्रांसपोर्ट विकसित करने को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल अवार्ड, नई दिल्ली में एक्सीलेंस इन इनोवेटिव डिजाइंस, गवर्नेंस में इनोवेशन के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल अवार्ड, जर्मनी में यूरोपियन सोसाइटी फॉर च्वॉइस प्राइज अवार्ड 2016, आईएसओ 14001:2004 व ओहसास 18001:2007 सर्टिफिकेट भी शामिल हैं।
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वेबसाइट पर फेयर कैलकुलेटर गलत
एलएमआरसी की नई वेबसाइट में फेयर कैलकुलेटर गलत अपलोड हो गया है। इसकी प्रोग्रामिंग गड़बड़ होने से पोर्टल ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच किराया 20 रुपये दिखा रहा है। असल में यह 30 रुपये है। एमडी ने कैलकुलेटर की गलती पता चलने के बाद इसे बदलने के आदेश दिए हैं।
लखनऊ मेट्रो के लिए हमने सबसे आधुनिक तकनीक सीबीटीसी से लेस ट्रेनें बनाई हैं। हमारे श्रीसिटी प्लांट में बनी ट्रेनें यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव देने के लिए तैयार हैं। बिना ड्राइवर भी ट्रेनें पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक सफर कराएंगी।
- भरत सल्होत्रा, एमडी, अलस्टॉम इंडिया