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Lucknow :यूपी बोर्ड में लखनऊ टॉपर्स बच्चों, अभिभावकों व प्रधानाचार्यों से सीएम योगी ने की भेंट, बोले- जिज्ञासु बनें, खुद पर रखें भरोसा
Thu, 23 Jun 2022 08:18 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 23 Jun 2022 08:18 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने कहा कि तय स्कूली पाठ्यक्रम के अलावा आपको देश-दुनिया के समसामयिक स्थिति से अपडेट रहना चहिए। इसके लिए अखबार एक अच्छा माध्यम है। दिनचर्या में एक समय अखबार पढ़ने के जरूर रखें। अखबारों के सम्पादकीय पृष्ठ विचारों से परिपूर्ण होते हैं। अलग-अलग विचारों को पढ़कर आप किसी विषय में अपना नजरिया तय कर सकते हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावियों से कहा है कि वह जिज्ञासु बनें, सवाल पूछने से कभी न हिचकें। पहले अपने मन में सवाल पर विमर्श करें, फिर भी समाधान न मिले तो शिक्षक से पूछें, लेकिन संकोच न करें। यही नहीं उन्होंने खेलकूद के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हर बच्चे को खेल के किसी न किसी कार्यक्रम के साथ जुड़ना चाहिए। इससे शारीरिक व मानसिक विकास के साथ-साथ बौद्धिक विकास भी होगा। निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है।
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मुख्यमंत्री गुरुवार को अपने आवास पर यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में लखनऊ में शीर्ष स्थान पाने वाले बच्चों, उनके अभिभावकों व प्रधानाचार्यों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के अभिभावकों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए बेटियों की सफलता पर विशेष खुशी जताई। साथ ही बच्चों, उनके पढ़ने के तौर-तरीकों की जानकारी लेते हुए कहा कि दूसरों के नोट्स के भरोसे कभी तैयारी न करें। अपने नोट्स तैयार करें। कॉन्सेप्ट क्लियर करना जरूरी है। उन्होंने सभी को अपने पास एक छोटी डायरी रखने का सुझाव दिया। कहा कि इस डायरी में आपको नई बातों/जरूरी बातों को नोट करना चाहिए।
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यही नहीं मुख्यमंत्री ने कार्य के साथ-साथ आराम को जरूरी बताया। कहा कि अगर आप नियमित पढ़ेंगे, खेलेंगे, सभी कार्यों को टाइमटेबल बनाकर करेंगे तो परीक्षा के समय तनाव नहीं होगा। संयमित दिनचर्या से आप परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। दिनचर्या का पालन करने से न केवल आपका पाठ्यक्रम समय से पूरा होगा, बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को समय पर सोना व जागना चाहिए। अगर सभी बच्चे रात्रि 10 बजे तक सो जाएं और सुबह 4 बजे उठ जाएं तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल होगा। रात भर जागने से दिनभर थकान रहती है। स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री ने सम सामयिक घटनाओं से अपडेट रहने के लिए हर दिन अखबार जरूर पढ़ने व पुस्तकालय जाने की भी सलाह दी। कहा कि माह में पाठ्यक्रम से इतर कम से कम कोई एक पुस्तक जरूर पढ़ें। साथ ही बच्चों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ पर से जुड़ने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इससे बहुत सारी रचनात्मक चीजें जानने को मिलेंगी। सीएम ने बच्चों व अभिभावकों से प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एक्जाम वॉरियर’ और बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए खास कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ के बारे में भी चर्चा भी की।
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कॅरियर के बारे में पूछा, सफलता के टिप्स दिए
मेधावियों से उनके कॅरियर की योजना पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अभ्युदय कोचिंग संचालित करती है। यहां नीट, जेईई, यूपीएससी, यूपीपीएससी, एनडीए, सीडीएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी कराई जाती है। इसका संचालन उनके द्वारा किया जाता है जिन्होंने संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण की है। जैसे युवा आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस अधिकारी, युवा डॉक्टर, नव चयनित इंजीनियर्स आदि। यह अभिनव कोचिंग वर्चुअल और फिजिकल दोनों मोड में चलती है। स्कूलों में बच्चों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने मेधावियों की जिज्ञासा पर बताया कि राज्य सरकार समय-समय पर पाठ्यक्रम को अपडेट करती है। यह क्रम सतत जारी रहेगा। हमें अपने सही इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। अपने नायकों/महापुरुषों के व्यक्तित्व/कृतित्व की जानकारी होनी चाहिए।
स्कूलों को दी बधाई, कहा पुरातन छात्र परिषद बनाएं
सीएम ने मेधावी छात्र-छात्राएं तैयार करने वाले विद्यालय के प्रधानाचार्यों को बधाई दी और उनके अध्यापन व मूल्यांकन प्रणाली की जानकारी ली। प्रधानाचार्यों से कहा कि शिक्षक, अभिभावकों से संवाद जरूर करें। माह में एक बार शिक्षक बच्चे के घर जरूर जाए और अभिभावकों से मिले। कमजोर व प्रतिभावान बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं चलाने की उन्होंने सराहना भी की। साथ ही रोचक ढंग से पढ़ाए जाने पर जोर दिया। यही नहीं छात्रों, युवाओं के हित में चल रहीं सरकार की योजनाओं की जानकारी सुबह प्रार्थना सभा में देने के लिए कहा। छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए समय से आवेदन कराने। पुरातन छात्रों के अनुभवों को जानने के लिए विद्यालय में पुरातन छात्र परिषद का गठन करने का परामर्श दिया। अभिभावकों ने अपने पाल्यों की मेहनत की कहानी भी बताई। एक मेधावी की माता ने बेटे के हिंदी में 100 अंक प्राप्त करने की खुशी साझा की तो कई अन्य अभिभावकों ने बच्चों के पठन-पाठन की अवधि की जानकारी दी।