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शादी के लिए धर्मांतरण अवैध, ये एक खास धर्म के खिलाफ षड्यंत्र, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
Tue, 02 Feb 2021 02:10 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 02 Feb 2021 02:10 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने धर्मांतरण कर निकाह करने के मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लड़का प्रथम दृष्टया इस बात के संतोषजनक साक्ष्य नहीं दे सका कि लड़की अपने माता पिता की नाजायज हिरासत में है।
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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश कथित पत्नी की ओर से दाखिल पति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए पारित किया। याचिका में कहा गया कि याची बालिग है और उसकी हिंदू पत्नी ने धर्म परिवर्तन करके उसके साथ निकाह किया है।
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याची का आरोप था कि लड़की के घरवालों ने लखनऊ के विभूति खंड थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी और उसकी पत्नी को अपनी नाजायज हिरासत में बंद कर रखा है। याची ने अदालत से बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट जारी कर लड़की के घरवालों को लड़की को कोर्ट में पेश कराए जाने का आग्रह किया था।
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अपर शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध कर तर्क दिया कि लड़की का धर्म केवल इसलिए परिवर्तित कराया गया कि उससे निकाह किया जा सके जो कि अवैध है। यह एक खास धर्म के साथ षड्यंत्र है।
लड़की का परिवार वालों की अवैध कस्टडी में होने का आरोप गलत है। सारे तथ्यों पर गौर करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि लड़की अपने परिवार की अवैध निरुद्धि में नहीं है और याचिका को खारिज कर दिया।