लखनऊ: भरी दोपहर धुएं से भर गया हजरतगंज, फटे कई एसी के कंप्रेसर; खाली कराई गईं आसपास की इमारतें
Lucknow fire incident:जवाहर भवन के चौथे तल पर सोमवार सुबह अचानक आग लग गई। आग चौथे तल पर स्थित कोषागार विभाग के कैंटिन में शाॅर्ट सर्किट से लगी थी।
विस्तार
सीएफओ अंकुश मित्तल के मुताबिक जवाहर भवन के पास फायर एनओसी नहीं थी। दमकल विभाग की ओर से 19 बार नोटिस जारी किया गया था। अंतिम नोटिस 30 जुलाई 2025 को भेजा गया था। भवन में आग से बचाव के मानक भी पूरे नहीं थे। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम पर सुबह नौ बजकर 53 मिनट पर आग लगने की सूचना मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी फायर स्टेशन को अलर्ट किया गया। सीएफओ का दावा है कि सूचना मिलने के छह मिनट के भीतर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंच गई थी। हालांकि, कर्मचारियों ने बताया कि दमकल को पहुंचने में 15 मिनट का समय लगा। आग की लपटों को देखकर दमकलकर्मियों ने भवन को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद अलग-अलग टीम में बंटकर बचाव कार्य शुरू किया गया।
फटे एसी कंप्रेसर, गिरी छत की चहारदीवारी
आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें दूर से नजर आ रही थीं। यही नहीं करीब एक किलोमीटर दूर से धुआं दिखाई दे रहा था। लपटों के बीच एसी के कंप्रेसर तेज धमाकों के साथ फट रहे थे। बचाव के दौरान चौथे तल की चहारदीवारी भरभराकर नीचे गिर गई। गनीमत रही कि नीचे कोई मौजूद नहीं था, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय पुलिस ने लोगों को भवन के पास से हटाकर जगह खाली कराया।
तोड़ने पडे शीशे, गैस सिलिंडर हटाकर रोका हादसा
दमकल कर्मी भवन के भीतर दाखिल हुए, लेकिन हर तरफ धुआं भरा था, जिससे उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। इस बीच एसडीआरएफ की टीम भी वहां पहुंच गई। संयुक्त टीम ने भवन की खिड़कियां और शीशे तोड़कर धुआं बाहर निकाला। इसके बाद बचाव कार्य तेज किया गया। टीम एक लाइन बिछाकर जवाहर भवन के पीछे की तरफ निर्मित स्टेयरकेस से ऊपर पहुंचकर भीतर से आग को बुझाना शुरू किया। कैंटिन में बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर रखे थे, जिन्हें वहां से बाहर निकालकर बड़ी घटना टाली गई। अगर सिलिंडर फट जाते तो आग पर काबू पाना आसान नहीं होता।अग्निशमन वाहनों में पानी की आपूर्ति जवाहर भवन परिसर में स्थित हाईड्रेंट सिस्टम से की गई, जिससे काफी राहत मिली। समय से आग पर काबू पा लिया गया, जिससे आसपास के दूसरे भवन प्रभावित नहीं हुए।
सुरक्षा पर सवाल, जर्जर हो चुका है भवन
इस अग्निकांड ने जवाहर भवन के साथ-साथ इंदिरा भवन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि आग सुबह 10 बजे के पहले लगी थी और भवन में कुछ कर्मचारी ही मौजूद थे। कैंटिन में धुआं उठते ही भीतर मौजूद कर्मचारी भाग निकले थे। भीतर आग से बचाव के उपकरण नहीं थे। अगर शुरू में ही आग पर काबू पाने की कोशिश की गई होती तो वह विकराल नहीं होती। भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। बावजूद इसके उसमें कई दफ्तर संचालित किए जा रहे हैं।
नहीं हो सका काम, वापस लौटे पेंशनर्स
जिस भवन में आग लगी थ उसके चौथे तल पर खाद्य एवं रसद और पेंशन विभाग का ऑफिस है। गनीमत रही कि आग दफ्तर में नहीं पहुंची नहीं तो सारी फाइलें खाक हो जातीं। यही नहीं, तीसरे तल पर सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो, दूसरे तल पर एसबीआई का लोक सेक्शन और पहले तल पर ट्रेजरी का रिकॉर्ड रूम है। आग के कारण सोमवार को भवन में कोई काम नहीं हो सका। कर्मचारियों के अलावा पेंशन के लंबित काम के लिए आए लोगों को भी वापस लौटना पड़ा। पूरे दिन वहां छुट्टी जैसा माहौल रहा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लिया जायजा
अग्निकांड की सूचना पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना स्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। आग के कारणों की जांच की जा रही है। मौके पर डीएम विशाख जी, जेसीपी बबलू कुमार, मेयर सुषमा खर्कवाल और बड़ी संख्या में पुलिस प्रशासन के अफसर मौजूद रहे।
दमकल विभाग ने आसपास की खाली कराई बिल्डिंग, 50 को सुरक्षित निकाला
जवाहर भवन में लगी भीषण आग से उठतीं ऊंची-ऊंची लपटों को देख कर वहां और उससे सटी हुई अन्य बिल्डिंग में मौजूद लोग चीख पुकार मचाने लगे। मदद के लिए गुहार लगाने लगे। इस बीच आग बुझा रहे दमकल कर्मियों की नजर जब उन पर पड़ी तो तुरंत एक और टीम बनाई गई। टीम ने रेस्क्यू शुरू किया और 50 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश कुमार मित्तल ने बताया कि आग के कारण आसपास की इमारतों में भी धुआं तेजी से भर गया था। ऐसे में लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा था। लोग कुछ देख भी नहीं पा रहे थे। वहीं, आग की लपटें भी तेज हो रही थीं। वहीं कैंटीन में आठ से नौ गैस सिलिंडर भी रखे हुए थे। ऐसे में आग बुझा रहे दमकल कर्मियों को दो और टीम बांटा गया। एक टीम ने आनन-फानन गैस सिलिंडर को बाहर निकाल कर रखा। जबकि दूसरी टीम एक अन्य बिल्डिंग में पहुंची।
कांच के टुकड़े धंसने से दमकल कर्मी हुए जख्मी
धुएं के कारण टीम का सांस लेना दूभर हो गया। ऐसे में उन्होंने ब्रीथिंग ऑपरेटिंग सेट पहना और बिल्डिंग में मौजूद 50 लोगों को किसी तरह से शांत कराया। इस बीच अचानक आग की तपिश के कारण एक के बाद एक बिलिंड में लगीं खिड़कियों की शीशे फटने लगे। कांच टुकड़े दमकल के हाथ पैरों में धंस गए। जबकि कुछ की तो धुंए के कारण तबीयत बिगड़ गई। इसके बावजूद कर्मियों ने साहस का परिचय देते हुए सभी को सकुशल सुरक्षित निकाल लिया। पूरी तरह से रेस्क्यू कार्य होने के बाद टीम को अस्पताल पहुंचाया गया।
फट सकते थे सिलिंडर, हो सकता था बड़ा हादसा
सीएफओ ने बताया कि टीम ने समय रहते राहत कार्य कर लिया। नहीं तो अगर, कैंटीन में अधिक तादाद में रखे सिलिंडर आग के कारण फट जाते तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं, आग बुझाने के बाद जांच में बिल्डिंग में कई बड़ी खामियां में पाई गईं। पूरी इमारत में कहीं भी एग्जिट साइन बोर्ड नहीं थे। स्प्रिंकलर सिस्टम और फायर पंप की व्यवस्था नहीं थी।