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Lucknow building Collapse: पूर्व मंत्री के बेटे व भतीजे की जमीन, याजदान बिल्डर्स ने बनाया अपार्टमेंट

माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 25 Jan 2023 06:05 AM IST
सार

पुलिस के उच्चाधिकारियों को जानकारी मिली कि अपार्टमेंट में सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे व भतीजे की हिस्सेदारी है तो मेरठ पुलिस ने तत्काल संपर्क किया गया। पुलिस मुखिया के आदेश पर पूर्व मंत्री के बेटे को मेरठ पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उससे पूछताछ की जा रही है।

अलाया अपार्टमेंट...
अलाया अपार्टमेंट... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अलाया अपार्टमेंट सपा सरकार के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे व भतीजे की जमीन पर खड़ा किया गया था। अपार्टमेंट बनाने का काम बदनाम बिल्डर याजदान को दिया गया था। इसका एग्रीमेंट पूर्व मंत्री के बेटे व भतीजे ने बिल्डर फहद यजदानी से किया था। इसके बाद दोनों में फ्लैट बांटे गए थे। 



हजरतगंज इलाके में बटलर पैलेस व पराग डेयरी के बीच स्थित अलाया अपार्टमेंट की जमीन सपा सरकार के कद्दावर मंत्री रहे शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश व भतीजे तारिक  ने 2003 में खरीदी थी। इसके बाद इस जमीन पर अपार्टमेंट बनाने के लिए बिल्डर एग्रीमेंट याजदान बिल्डर्स से किया। याजदान बिल्डर्स ने इस जमीन पर पांच मंजिला भवन तैयार किया। इसकेअलावा एक पेंट हाउस का निर्माण कराया था। इस पेंट हाउस को पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के परिवार को दिया गया था। जिसे बाद में शाहिद ने सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्बास हैदर को बेच दिया था। अपार्टमेंट में शाहिद मंजूर के हिस्से में दो फ्लैट बचे थे। एक में शाहिद ने अपनी बेटी व दामाद को दे दिया था। वहीं फ्लैट नंबर 401 अभी उनके पास ही था। इसके अलावा शाहिद के बेटे नवाजिश ने भूतल पार्किंग में अपना कार्यालय भी बना रखा था, जिसमें एक हिस्सा याजदान बिल्डर्स भी प्रयोग कर रहा था। बेचे गए फ्लैटों की रजिस्ट्री पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश व भतीजे तारिक के नाम से की गई है। इससे भी उनकी पार्टनरशिप इसमें सामने आ रही है।


पुलिस ने पूर्व मंत्री के बेटे को हिरासत में लिया
हादसे के सूचना के बाद प्रदेश सरकार ने बिल्डर व जमीन के मालिक पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस के उच्चाधिकारियों को जानकारी मिली कि अपार्टमेंट में सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे व भतीजे की हिस्सेदारी है तो मेरठ पुलिस ने तत्काल संपर्क किया गया। पुलिस मुखिया के आदेश पर पूर्व मंत्री के बेटे को मेरठ पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उससे पूछताछ की जा रही है।

3885 वर्गफीट जमीन पर  बना दिया अपार्टमेंट
सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर ने इस संबंध में बताया कि हजरतगंज में 3885 वर्गफीट जमीन उनके बेटे व भतीजे ने वर्ष 2003 में खरीदी थी। इसके बाद याजदान बिल्डर्स से एग्रीमेंट किया था। बिल्डर ने अपना हिस्सा बेच दिया था। मेरे बेटे व भतीजे का हिस्सा मिल गया था। 

बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुका है बिल्डर
बदनाम बिल्डर याजदान का मालिक फहद याजदानी 2017 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर केबढ़ापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उसे बसपा ने टिकट दिया था। 50,684 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहा।  स्थानीय बसपा नेताओं का कहना है कि फहद यजदानी बिल्डर है और लखनऊ के रहने वाले हैं। चुनाव लड़ने से तीन चार महीने पहले यजदानी बिजनौर आए थे। उन्होंने अफ जलगढ़ में अपना कार्यालय बनाया था। चुनाव हारने के बाद उनका क्षेत्र से कोई वास्ता नहीं रहा। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। यजदानी ने नामांकन के समय दिए गए शपथ पत्र में अपनी शैक्षिक योग्यता आठवीं पास बताई थी। अपना व्यवसाय कंस्ट्रक्शन और बिल्डर बताया था।

बदनाम बिल्डर ने फिर दिया दर्द, याजदान बिल्डर के मायने अवैध निर्माण
बदनाम बिल्डर याजदान ने एक बार फिर लोगों को दर्द दिया। अब तो याजदान बिल्डर के मायने ही अवैध निर्माण हो चला है। ऐसा कहना अतिशयोक्ति भी नहीं होगा। असुरक्षित तरीकेसे बिल्डिंग बना फ्लैट बेच देने के अलावा सरकारी जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माण कर अपार्टमेंट खड़ा कर देने के लिए याजदान बिल्डर शहर में बदनाम रहा है। हाल ही जहां प्राग नरायन रोड पर एलडीए ने बिल्डर की एक अपार्टमेंट इसीलिए तोड़ी। वहीं, महानगर विस्तार में भी स्वीकृत नक्शे से अलग सात मंजिला इमारत बिल्डर ने खड़ी कर दी।
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याजदान ने अगर ईमानदारी से काम किया होता तो अलाया अपार्टमेंट में लोग मलबे में नहीं दबते। अलाया में लोग खोदाई और ड्रिलिंग की वजह लोग पूछते रहे, सबको अलग-अलग कारण बताया जाता रहा। झगड़ा भी हुआ पर बिल्डर नहीं माना। साफ है कि उसकी मंशा वहां कुछ और करने की थी और बीच में हादसा हो गया। 

कुसूर सिर्फ याजदान का ही नहीं, सिस्टम का भी है
कुसूर सिर्फ याजदान का ही नहीं, सिस्टम का भी है। बिल्डर के अवैध निर्माण के लिए एलडीए के इंजीनियरों और अधिकारियों के अलावा पुलिस, अग्निशमन विभाग की भी सांठगांठ रही। यही वजह रही कि एक दशक में बिल्डर न केवल एक के बाद एक आवासीय इमारतें बनाता गया, अपनी सियासी पैठ भी मजबूत कर ली। यही वजह रही कि अवैध निर्माण कर की कमाई से 2017 में विधानसभा चुनाव भी बसपा की टिकट से लड़ लिया। बिल्डर फहद याजदानी को हालांकि इस चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। सपा के बड़े नेता शाहिद मंजूर से भी उसके नजदीकी संबंध बताए जा रहे हैं। यह भी चर्चा है कि सबसे ऊ परी मंजिल पर बने पेंट हाउस को शाहिद मंजूर ने ही खरीदा था। इसे बाद में उन्होंने बेच दिया।

महानगर विस्तार में तो एलडीए के सांठगांठ से खड़ा कर दिया सात मंजिला अपार्टमेंट
एलडीए का रिकॉर्ड खुद बताता है कि उसका बिल्डर से सांठगांठ था। महानगर विस्तार में इसी सांठगांठ से बिल्डर ने सात मंजिला अपार्टमेंट का निर्माण किया है। यहां पांच मंजिल के बाद ही बिल्डिंग को सील कर दिया गया। इसके बाद भी दो मंजिल और बनाई गईं। लेकिन, इसके बाद एलडीए कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। यह उस समय हुआ जबकि बिल्डिंग को तोड़ने का आदेश तक हुआ। हालांकि, प्राग नरायन रोड पर सरकारी नजूल की जमीन कब्जा करने के चक्कर में उसके छह मंजिला अपार्टमेंट को जरूर एलडीए ने तोड़ दिया।

पूरा ढांचा कमजोर...हादसे की बड़ी वजह
वजीर हसन रोड पर निर्माण करते समयढांचे की मजबूती का कोई ख्याल नहीं रखा गया। कमजोर ढांचे पर ही पूरी बिल्डिंग खड़ी की गई। खुद फ्लैट मालिकों ने बताया कि इसको लेकर कई बार सवाल उठाया, लेकिन बिल्डर ने एक न सुनी। फ्लैट खरीदने के बाद एक तरह से यहां फंस गए। पेंट हाउस का निर्माण तो डिजाइन में ही नहीं था। इसके बाद भी जबरन बनाया गया। कमजोर ढांचा खोदाई और ड्रिलिंग झेल नहीं पाया।

ऐसी मनमानी...न सैटबैक, न पहुंचने का रास्ता, खड़ा कर दिया पांच मंजिला अपार्टमेंट
वजीर हसन रोड पर छह मीटर से भी कम के रास्ते पर अंदर की तरफ बने अलाया अपार्टमेंट का निर्माण करीब 3600 वर्गफीट जमीन पर किया गया है। पांच मंजिला इस इमारत को बनाने के समय न सैटबैक छोड़ा गया और न जरूरी संपर्क रास्ता। आलम बिल्डर ने इसकी भी फिक्र नहीं की कि आग लगने जैसा हादसा होने पर वहां तक अग्निशमन की गाड़ियां कैसे पहुंचेंगी।

एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि अभी तक बिल्डिंग का कोई नक्शा सामने नहीं आया है। हालांकि, इसकी जांच कराई जा रही है कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ क्या पहले कोई कार्रवाई की गई, इसकी भी जांच कराई जा रही है। इसके बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।

कार्रवाई पर जांच शुरू
जोनल अधिकारी रामशंकर का कहना है कि इमारत कई साल पहले ही बन चुकी है। इसमें लोग रह भी रहे थे। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हादसे के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है।

जिम्मेदार सोते रहे...इसलिए बन गया अवैध इमारतों का गढ़
वजीर हसन रोड, प्राग नरायन रोड आदि इलाकों को अवैध निर्माणों ने हादसों का गढ़ बना दिया। कुछ दिन पहले ही इसी याजदान बिल्डर की अवैध इमारत को तोड़ते समय हादसा हुआ। इससे पहले लेवाना सुइट्स होटल की आग में चार की मौत हो गई थी। याजदान बिल्डर्स की बिल्डिंग के कमजोर होने की वजह इसको तोड़ते समय एक हिस्सा खुद से ढह गया। इससे आसपास के घरों को बड़ा नुकसान हुआ था। करीब आधा दर्जन भर लोग बिल्डिंग के मलबे में दब गए थे। वहीं पांच सितंबर 2021 को अलाया अपार्टमेंट से कुछ  दूरी पर ही लेवाना सुइट्स होटल में आग लगी थी। इसमें चार लोग आग में फंसने के बाद दम घुटने की वजह से जान गंवा बैठे। इस हादसे की चर्चा पूरे देश में हुई। हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेकर ऐसे अवैध होटलों पर कार्रवाई के लिए कहा। लेकिन, कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई। अफसर खुद मानते हैं कि 250 से अधिक अपार्टमेंट व व्यावसायिक इमारतें इस पूरे इलाके में अवैध रूप से बन गई हैं। अधिकांश जगह तक पहुंचने के लिए सड़कों की चौड़ाई 12 मीटर या इससे कम है। ऐसे में एकल आवासीय मकान के अलावा यहां कोई अपार्टमेंट या व्यावसायिक निर्माण नहीं हो सकता है। इसके बाद भी अभी भी इमारतों का निर्माण यहां चालू है। इन पर नोटिस करने की खानापूर्ति करके छोड़ दिया जाता है।

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