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Lucknow : फर्जी आईएएस बन 150 लोगों से 80 करोड़ ठगे, वकील ने कराया मुकदमा; इस तरह पकड़ा गया
Thu, 16 Oct 2025 09:25 PM IST
आकाश द्विवेदी
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Thu, 16 Oct 2025 09:25 PM IST
सार
गुजराज कैडर का आईएएस अधिकारी बन 150 लोगों से 80 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला पकड़ा गया। वकील ने चिनहट थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। केस की विवेचना सीबीसीआईडी कर रही है।
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अरेस्टिंग का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
खुद को गुजराज कैडर का आईएएस अधिकारी बन 150 लोगों से 80 करोड़ रुपये की ठगी का अंजाम देने वाले जालसाज झारखंड बोकारो निवासी डा. विवेक मिश्र को चिनहट पुलिस ने बृहस्पतिवार गिरफ्तार किया। आरोपी व उसकी दो बहनों के खिलाफ चिनहट थाने में वर्ष 2019 में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। केस की विवेचना सीबीसीआईडी कर रही है।
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इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्र ने बताया कि गोमतीनगर विकल्पखंड निवासी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डा. आशुतोष मिश्र आरोपी विवेक और उसकी दो बहनों निधि व विधि मिश्र के खिलाफ 24 जुलाई 2019 को चिनहट थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकाने का केस दर्ज कराया था। पहले केस की विवेचना आर्थिक अपराध संगठन को दी गई थी।
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इसके बाद शासन ने विवेचना को सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दी थी। सीबीसीआईडी में तैनात इंस्पेक्टर रमेश चंद्र तिवारी इस केस की जांच कर रहे थे। इंस्पेक्टर चिनहट ने बताया कि बृहस्पतिवार को पुलिस ने कमता इलाके से आरोपी विवेक मिश्र को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि केस में नामजद विवेक की बहनों की भूमिका की जांच सीबीसीआईडी कर रही है।
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खुद को 2014 बैच का आईएएस अधिकारी बताता था विवेक
इंस्पेक्टर चिनहट ने बताया कि आरोपी विवेक खुद को 2014 बैच का आईएएस अधिकारी बताता था। वह खुद को गुजरात सरकार में सचिव के पद पर तैनात होने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। इतना ही नहीं आरोपी अपनी बहनों को गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी बताता था।
आरोपी ने सोशल मीडिया पर कई फर्जी अकाउंट बना रखे थे। सोशल मीडिया के माध्यम से वह खासकर सीधी-साधी युवतियों को अपने जाल में फंसाता था। युवतियों से शादी का प्रस्ताव देकर उनके परिवार के लोगों से नजदीकियां बनाकर आरोपी उन लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता था।
शिकायतकर्ता से नौकरी के नाम पर लिए थे 4.5 लाख रुपये
शिकायकर्ता आशुतोष मिश्र ने आरोपी का राजफाश करने के लिए अपने जूनियरों के साथ मिलकर छानबीन की तो पता चला कि आरोपी ने 150 लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर 80 करोड़ रुपये की ठगी का अंजाम दिया। पीड़ित ने आरोपी की सच्चाई का पता लगाने से अपने चार जूनियरों को नौकरी दिलाने के लिए संपर्क किया था। आरोपी ने किसी को गुजरात सरकार में जनसंपर्क अधिकारी और कुछ को स्पोर्ट्स कोटे से डिप्टी एसीपी की नौकरी दिलाने की बात कहते हुए 4.5 लाख रुपये ऐंठे थे और उन लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया था।