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आईईटी में रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान पर सेमिनार
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अंतरिक्ष विज्ञान में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं
आईईटी में रक्षा व अंतरिक्ष तकनीकी पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
इसरो अहमदाबाद व लखनऊ केंद्र के वैज्ञानिकों ने किया संबोधित
अंतरिक्ष तकनीकी के क्षेत्र में अब भारत काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है। इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए भी इसमें अपार संभावनाएं हैं। यह कहना है अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिकों का। वे रविवार को इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
एसजी स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इसरो, अहमदाबाद की वरिष्ठ वैज्ञानिक पूनम त्यागी ने इसरो की शुरूआत से अब तक की विकास गाथा से युवाओं को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस तरह धीरे-धीरे भारत ने इस क्षेत्र में नए-नए प्रयोग और कार्य किए, जो आज चंद्रयान-2 तक पहुंच गई है। इसी केंद्र की लीना कोहली कपूर ने इसरो व इसके अभियानों की जानकारी देते हुए बताया कि यह देश के लिए कितने जरूरी व लाभकारी होंगे। उन्होंने युवाओं से कहा कि इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं और काम करने के काफी मौके भी हैं। लखनऊ स्थित केंद्र के आसिफ सिद्दीकी ने भी विभिन्न अभियानों से जुड़े अनुभव साझा किए।
रविवार शाम को सेमिनार का समापन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें आईईटी निदेशक प्रो. एचके पालीवाल ने अतिथियों व विशेषज्ञों का स्वागत किया। सम्मेलन संयोजक डॉ. आरसीएस चौहान ने तीन दिन रक्षा व अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए विशेषज्ञों के लेक्चर व पेपर प्रजेंटेशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान पर 25 रिसर्च पेपर प्रस्तुत हुए। आईआईएससी बंगलुरु, आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, डीआरडीओ व एचएएल के 17 रक्षा व अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने संबोधित किया।
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तीन दिवसीय सेमिनार में अग्नि, पृथ्वी, चंद्रयान 1 व चंद्रयान 2, मंगलयान आदि से जुड़ी चीजों पर विस्तार से चर्चा की। समापन अवसर पर प्रतिभागियों व पेपर प्रेजेंटेशन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र व अतिथियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय व घटक संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों को रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नए-नए प्रयोग व तकनीकी के बारे में जागरूक करना व उन्हें नई खोज के लिए प्रोत्साहित करना था। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन 23 अगस्त को एकेटीयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया था। कुलपति ने कहा कि यह अपने तरह का अलग आयोजन है जो विद्यार्थियों के लिए काफी लाभकारी होगा।
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आईईटी में रक्षा व अंतरिक्ष तकनीकी पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
इसरो अहमदाबाद व लखनऊ केंद्र के वैज्ञानिकों ने किया संबोधित
अंतरिक्ष तकनीकी के क्षेत्र में अब भारत काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है। इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए भी इसमें अपार संभावनाएं हैं। यह कहना है अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिकों का। वे रविवार को इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
एसजी स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इसरो, अहमदाबाद की वरिष्ठ वैज्ञानिक पूनम त्यागी ने इसरो की शुरूआत से अब तक की विकास गाथा से युवाओं को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस तरह धीरे-धीरे भारत ने इस क्षेत्र में नए-नए प्रयोग और कार्य किए, जो आज चंद्रयान-2 तक पहुंच गई है। इसी केंद्र की लीना कोहली कपूर ने इसरो व इसके अभियानों की जानकारी देते हुए बताया कि यह देश के लिए कितने जरूरी व लाभकारी होंगे। उन्होंने युवाओं से कहा कि इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं और काम करने के काफी मौके भी हैं। लखनऊ स्थित केंद्र के आसिफ सिद्दीकी ने भी विभिन्न अभियानों से जुड़े अनुभव साझा किए।
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रविवार शाम को सेमिनार का समापन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें आईईटी निदेशक प्रो. एचके पालीवाल ने अतिथियों व विशेषज्ञों का स्वागत किया। सम्मेलन संयोजक डॉ. आरसीएस चौहान ने तीन दिन रक्षा व अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए विशेषज्ञों के लेक्चर व पेपर प्रजेंटेशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान पर 25 रिसर्च पेपर प्रस्तुत हुए। आईआईएससी बंगलुरु, आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, डीआरडीओ व एचएएल के 17 रक्षा व अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने संबोधित किया।
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तीन दिवसीय सेमिनार में अग्नि, पृथ्वी, चंद्रयान 1 व चंद्रयान 2, मंगलयान आदि से जुड़ी चीजों पर विस्तार से चर्चा की। समापन अवसर पर प्रतिभागियों व पेपर प्रेजेंटेशन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र व अतिथियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय व घटक संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों को रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नए-नए प्रयोग व तकनीकी के बारे में जागरूक करना व उन्हें नई खोज के लिए प्रोत्साहित करना था। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन 23 अगस्त को एकेटीयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया था। कुलपति ने कहा कि यह अपने तरह का अलग आयोजन है जो विद्यार्थियों के लिए काफी लाभकारी होगा।