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Lucknow News: दिल के रोगियों की जांच के लिए लंबा इंतजार
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लखनऊ। दिल की जांच के लिए राजधानी में वक्त से लड़ाई चल रही है। ऊपर के ये दो केस इसके उदाहरण हैं। सरकारी संस्थानों में मरीजों को लंबी वेटिंग मिल रही है। टूडी इको जांच के लिए डेढ़ से दो माह का इंतजार करना पड़ रहा है। अफसरों का कहना है कि गंभीर मरीजों की जांच तत्काल कराई जाती है, लेकिन ज्यादातर मरीजों की ‘गंभीरता’ जांच कक्ष में तिथि देखकर ही खत्म हो जाती है। ऐसे में वेटिंग से परेशान मरीजों के पास एक ही रास्ता बचता है- निजी जांच केंद्र, जहां एक जांच की कीमत 1500 से 2500 रुपये तक जाती है, मगर यह हर मरीज की पहुंच में नहीं है, खासकर गरीब और ग्रामीण तबके के लिए। ऐसे में सवाल उठता है कि लखनऊ जैसे शहर में अगर हृदय रोग की जांच के लिए दो महीने इंतजार करना पड़े, तो यह सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, सिस्टम की संवेदनहीनता का भी आईना है।
केस 1: शनिवार की सुबह 38 वर्षीय नाबिया सीने में दर्द की शिकायत लेकर लारी कार्डियोलॉजी की ओपीडी पहुंचीं। डॉक्टर ने चेकअप के बाद टूडी इको जांच लिख दी। उम्मीद थी कि जांच उसी दिन या अगले दिन हो जाएगी, लेकिन जब वह परचा लेकर काउंटर पर पहुंचीं तो उन्हें दो महीने बाद 26 अगस्त की तारीख दे दी गई। इस पर नाबिया के परिजनों ने मायूस होकर कहा, अगर तब तक कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? अब तो हमें निजी सेंटर जाना ही पड़ेगा, भले ही जेब खाली हो जाए।
केस 2:
65 वर्षीय मुलायम सिंह भी हृदय रोग से पीड़ित हैं। लारी में दिखाने पहुंचे तो डॉक्टर ने ईसीजी और टूडी इको दोनों जांचें लिखीं, लेकिन उन्हें भी अगस्त की तारीख दे दी गई। परिजन बोले, हर बार लंबी वेटिंग मिलती है, मजबूरी में महंगे निजी केंद्र का सहारा लेना पड़ता है।
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लारी : मरीजों की भीड़, जांच में देरी
केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग लारी में रोजाना 500 से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से करीब 100 मरीजों को टूडी इको जांच की जरूरत होती है, लेकिन जांच कक्ष में दो महीने आगे की डेट दी जा रही है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। लखनऊ ही नहीं, दूरदराज के कई जिलों से भी दिल के मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, मगर जब उन्हें जांच के लिए दो महीने बाद की तारीख मिलती है तो राहत की जगह उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
लोहिया संस्थान: एक महीने की वेटिंग
लोहिया संस्थान में भी स्थिति कुछ अलग नहीं। मरीज ओपीडी से परचा लेकर जब जांच के लिए काउंटर पर जाते हैं तो उन्हें एक महीने बाद की तारीख मिलती है। प्रशासन कहता है कि गंभीर मरीजों को तत्काल जांच कराई जाती है, मगर यह सुविधा सभी को नहीं मिलती—यह ‘तत्काल’ सिर्फ सिस्टम की मर्जी पर टिका है।
सिविल अस्पताल : राहत की छोटी किरण
राजधानी के सिविल अस्पताल में टूडी इको की सुविधा उपलब्ध है और फिलहाल यहां वेटिंग नहीं है। रोजाना 10 से 15 मरीजों की जांच हो रही है। सीएमएस डॉ. राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि जरूरतमंदों की जांच प्राथमिकता से कराई जा रही है। अब तक कोई लंबी वेटिंग नहीं है।
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केस 1: शनिवार की सुबह 38 वर्षीय नाबिया सीने में दर्द की शिकायत लेकर लारी कार्डियोलॉजी की ओपीडी पहुंचीं। डॉक्टर ने चेकअप के बाद टूडी इको जांच लिख दी। उम्मीद थी कि जांच उसी दिन या अगले दिन हो जाएगी, लेकिन जब वह परचा लेकर काउंटर पर पहुंचीं तो उन्हें दो महीने बाद 26 अगस्त की तारीख दे दी गई। इस पर नाबिया के परिजनों ने मायूस होकर कहा, अगर तब तक कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? अब तो हमें निजी सेंटर जाना ही पड़ेगा, भले ही जेब खाली हो जाए।
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केस 2:
65 वर्षीय मुलायम सिंह भी हृदय रोग से पीड़ित हैं। लारी में दिखाने पहुंचे तो डॉक्टर ने ईसीजी और टूडी इको दोनों जांचें लिखीं, लेकिन उन्हें भी अगस्त की तारीख दे दी गई। परिजन बोले, हर बार लंबी वेटिंग मिलती है, मजबूरी में महंगे निजी केंद्र का सहारा लेना पड़ता है।
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लारी : मरीजों की भीड़, जांच में देरी
केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग लारी में रोजाना 500 से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से करीब 100 मरीजों को टूडी इको जांच की जरूरत होती है, लेकिन जांच कक्ष में दो महीने आगे की डेट दी जा रही है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। लखनऊ ही नहीं, दूरदराज के कई जिलों से भी दिल के मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, मगर जब उन्हें जांच के लिए दो महीने बाद की तारीख मिलती है तो राहत की जगह उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
लोहिया संस्थान: एक महीने की वेटिंग
लोहिया संस्थान में भी स्थिति कुछ अलग नहीं। मरीज ओपीडी से परचा लेकर जब जांच के लिए काउंटर पर जाते हैं तो उन्हें एक महीने बाद की तारीख मिलती है। प्रशासन कहता है कि गंभीर मरीजों को तत्काल जांच कराई जाती है, मगर यह सुविधा सभी को नहीं मिलती—यह ‘तत्काल’ सिर्फ सिस्टम की मर्जी पर टिका है।
सिविल अस्पताल : राहत की छोटी किरण
राजधानी के सिविल अस्पताल में टूडी इको की सुविधा उपलब्ध है और फिलहाल यहां वेटिंग नहीं है। रोजाना 10 से 15 मरीजों की जांच हो रही है। सीएमएस डॉ. राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि जरूरतमंदों की जांच प्राथमिकता से कराई जा रही है। अब तक कोई लंबी वेटिंग नहीं है।