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UP: कैडर वोट तक सिमटी बसपा, बाकी छिटके; BSP के लिए पिछला प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं; देखें आंकड़े
Tue, 12 Mar 2024 12:22 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 12 Mar 2024 12:22 PM IST
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Loksabha Elections
- फोटो : अमर उजाला
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बीते दो दशक के दौरान अर्श से फर्श तक पहुंचने वाली बसपा अब केवल अपने कोर वोट बैंक तक सिमट चुकी है। राजनीति के शुरुआती दौर में पार्टी का आमजन से जुड़ाव काफी बेहतर रहा है, लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी का आम लोगों से जुडा़व खत्म हो गया। यही नहीं कार्यकर्ताओं से भी बसपा पदाधिकारियों का संवाद लगभग ठप हो गया।
इससे कार्यकर्ता निराश अैर वोटर अलग होता जा रहा है। प्रदेश में करीब 22 फीसदी दलित और मुस्लिम 20 प्रतिशत वोटर हैं। दलित वोट बैंक का 55 फीसदी जाटव माने जाते हैं, जिसे बसपा अपना कोर वोट बैंक मानती है।
बसपा की सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक की बड़ी हिस्सेदारी सफलता दिला चुकी है। बीते कुछ चुनावों से लगातार पार्टी का ग्राफ गिरता रहा है। 2004 के चुनाव में पार्टी को 24.67 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 19 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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वर्ष 2009 के लोस चुनाव में पार्टी को करीब 27.42 फीसदी वोट मिले थे और उसके 20 सांसद बने थे। यह बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। 2014 के चुनाव में बसपा को 19.77 फीसदी वोट ही मिले और उसका कोई भी प्रत्याशी संसद तक नहीं पहुंच सका।
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इससे कार्यकर्ता निराश अैर वोटर अलग होता जा रहा है। प्रदेश में करीब 22 फीसदी दलित और मुस्लिम 20 प्रतिशत वोटर हैं। दलित वोट बैंक का 55 फीसदी जाटव माने जाते हैं, जिसे बसपा अपना कोर वोट बैंक मानती है।
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बसपा की सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक की बड़ी हिस्सेदारी सफलता दिला चुकी है। बीते कुछ चुनावों से लगातार पार्टी का ग्राफ गिरता रहा है। 2004 के चुनाव में पार्टी को 24.67 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 19 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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वर्ष 2009 के लोस चुनाव में पार्टी को करीब 27.42 फीसदी वोट मिले थे और उसके 20 सांसद बने थे। यह बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। 2014 के चुनाव में बसपा को 19.77 फीसदी वोट ही मिले और उसका कोई भी प्रत्याशी संसद तक नहीं पहुंच सका।
हालांकि इस झटके से उबरने के लिए वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव सपा के साथ लड़ने का उसका फैसला मुफीद साबित हुआ। पार्टी के सांसदों की संख्या शून्य से 10 हो गयी। अब हालिया चुनाव बसपा अकेले लड़ने जा रही है।
बसपा का प्रदर्शन
| 2004 | 19 सीटें | 34.67% वोट |
| 2009 | 20 सीटें | 27.42% वोट |
| 2014 | 00 सीटें | 19.77% वोट |
| 2019 | 10 सीटें | 22.43% वोट |