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लखनऊ लोकसभा सीट : जातीय समीकरण साध रहे दल, आबादी के हिसाब से वोटरों को रिझाने में लगी भाजपा-सपा
Thu, 28 Mar 2024 01:45 PM IST
ishwar ashish
ज्ञान बिहारी मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
ज्ञान बिहारी मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 28 Mar 2024 01:45 PM IST
सार
लखनऊ लोकसभा सीट के इलाकों का गणित अलग-अलग है। बसपा ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं, सपा-भाजपा अपने-अपने तरह से वोटरों को रिझाने में लगे हैं।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
बसपा की ओर से लखनऊ सीट पर अब तक उम्मीदवार घोषित नहीं किए जाने से भाजपा और सपा जातीय समीकरण का गणित सुलझा रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने दो सीटों पर कब्जा किया था। इसमें लखनऊ मध्य सीट से विजेता रहे रविदास मेहरोत्रा खुद इस बार मैदान में हैं। वहीं, लखनऊ पश्चिम से सपा के अरमान खान ने बाजी मारी थी। यही वजह है कि दोनों पार्टियां इस बार के चुनाव में जातीय समीकरण को अहम मान रही हैं।
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लखनऊ लोकसभा में करीब 18 प्रतिशत मतदाता राजपूत और ब्राह्मण हैं। वहीं, तकरीबन 18 फीसदी मुस्लिम वोटरों की भागीदारी है। यही नहीं, 28 फीसदी ओबीसी, 0.2 फीसदी अनुसूचित जनजाति और करीब 18 फीसदी अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर लखनऊ लोकसभा में 26.36 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। सभी जातियों की आबादी को देख राजनीतिक दल मतदाताओं को साधने के लिए हर जुगत लगा रहे हैं।
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विधानसभावार स्थिति
लखनऊ पश्चिमी : मुस्लिम मतदाता निर्णायक
पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम आबादी वाला है, जहां कुल 4,61,554 मतदाता हैं। इनमें तकरीबन 1,15,000 मुस्लिम हैं। वहीं, 52000 के करीब ब्राह्मण और 40 हजार कायस्थ हैं।
- पूर्व में इस सीट पर लालजी टंडन का कब्जा रहा। हालांकि 2012 के चुनाव में सपा से मोहम्मद रेहान ने जीत हासिल की। 2017 में सुरेश श्रीवास्तव विधायक चुने गए, लेकिन 2022 में सपा के अरमान खान ने जीत हासिल की।
लखनऊ मध्य : मुस्लिम के साथ वैश्य भी मजबूत
लखनऊ मध्य में भी मुस्लिम आबादी ज्यादा है। यह पुराने लखनऊ से सटा इलाका है। यहां कुल 3,71,070 मतदाता हैं, जिसमें 90 हजार के करीब मुस्लिम हैं।
- इस सीट पर 80,000 वैश्य व अन्य वोटर हैं, जबकि 45 के करीब ब्राह्मण व इतने ही कायस्थ मतदाताओं की संख्या है। वहीं, 35 प्रतिशत के करीब सोनकर और धानुक वोटर हैं। यहां से वर्ष 2022 के चुनाव में सपा के रविदास मेहरोत्रा ने जीत दर्ज की थी।
लखनऊ उत्तरी : ब्राह्मण तय करते हैं समीकरण
यहां से भाजपा ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। हालांकि मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक हैं।
- उत्तरी सीट पर कुल 4,80,609 मतदाता हैं। इनमें करीब 80,000 ब्राह्मण, 71000 मुस्लिम, 40,500 यादव और 40,000 कायस्थों की संख्या है।
लखनऊ कैंट : ब्राह्मण और सिंधी की पकड़
कैंट विधानसभा सीट से ब्रजेश पाठक ने पिछली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस सीट पर सबसे ज्यादा ब्राह्मण मतदाता हैं। यहां पहाड़ के रहने वाले लोगों की संख्या भी अच्छी है।
- यहां कुल 3,66,388 मतदाता हैं। इनमें 1.40 लाख तो अकेले ब्राह्मण हैं। वहीं, 40 हजार मुस्लिम, 50 हजार सिंधी, 25 हजार वैश्य और 35 हजार के लगभग दलित मतदाताओं की संख्या है।