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UP: अवध की 14 में से 11 पर भाजपा ने दर्ज की थी जीत... अभी सेनाएं सजीं, योद्धाओं का इंतजार, पढ़ें - एक रिपोर्ट

Fri, 22 Mar 2024 05:45 PM IST
ishwar ashish श्रीनारायण मिश्र, अमर उजाला, सुल्तानपुर
श्रीनारायण मिश्र, अमर उजाला, सुल्तानपुर Published by: ishwar ashish Updated Fri, 22 Mar 2024 05:45 PM IST
सार

आमचुनाव की रणभेरी बज चुकी है। अवध की 14 लोकसभा सीटों पर भाजपा, सपा-कांग्रेस और बसपा मुकाबिल होंगे। सभी के कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी की बाट जोह रहे हैं, लेकिन पार्टियां फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रही हैं। जिताऊ प्रत्याशी कसौटी पर कसे जा रहे हैं। दाग-धब्बे धोए जा रहे हैं। अमेठी, रायबरेली, कैसरगंज और सुल्तानपुर सीटें हॉटकेक बनी हैं। सेनाएं भले तैयार खड़ी दिख रही हैं, किंतु योद्धाओं के बिना चुनावी मैदान सूना है। श्रीनारायण मिश्र की रिपोर्ट...।

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Loksabha Election 2024: Read a report of Awadh seats.
- फोटो : amar ujala

विस्तार

राजनीति की रंगत अवध में ही दिखती है। सेनाएं सजती हैं। रण की नीति बनती है। सधी चाल तो ठीक, लेकिन ढैय्या से यहां बादशाह झट से धराशायी भी होते हैं। यही सब तो यहां की चौदह सीटों को खास बनाते हैं। कुछ अलग ही मिजाज गढ़ते हैं। यहां हार-जीत के मायने केवल एक सीट तक नहीं सिमटते, पार्टी की नीतियों और पार्टी के नेताओं की जनस्वीकार्यता पर भी मुहर लगाते हैं। फैजाबाद में जीत जहां राममंदिर के साथ पार्टी के हिंदूवादी चेहरे पर मुहर लगाती है, वहीं कांग्रेस के सिरमौर गांधी परिवार का कद रायबरेली और अमेठी से तय होता है।

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ऐसे में रामनगरी की फैजाबाद सीट सबसे महत्वपूर्ण है, जहां तीनों प्रमुख दलों ने उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर मोर्चा संभाल लिया है। भाजपा ने सिटिंग सांसद लल्लू सिंह पर फिर भरोसा जताया है, वहीं सपा ने अपने पुराने धुरंधर अवधेश प्रसाद पर दांव लगाया है। बसपा ने भी यहां पत्ते खोल दिए हैं और सच्चिदानंद पांडेय को पार्टी प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा 14 सीटों में से 13 पर अभी तक राजनीतिक तस्वीर साफ नहीं हुई है। अमेठी से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को फिर मैदान में उतारा है, लेकिन उनके मुकाबले कांग्रेस नेता राहुल गांधी उतरेंगे या नहीं? इसका जवाब रहस्य बना हुआ है। बसपा ने भी यहां कोई प्रत्याशी नहीं घोषित किया है।
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इसी तरह रायबरेली सीट पर सोनिया गांधी के चुनाव लड़ने से इन्कार के बाद धुंध छाई है। यहां कांग्रेस ही नहीं, भाजपा और बसपा भी अभी प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। कुछ यही स्थिति सुल्तानपुर सीट को लेकर बनी हुई है, जहां कद्दावर मेनका गांधी का टिकट भाजपा ने होल्ड कर दिया है। माना जा रहा है कि पीलीभीत की स्थिति साफ होते ही सुल्तानपुर की तस्वीर भी कमोबेश साफ हो जाएगी। यदि भाजपा पीलीभीत में वरुण गांधी का टिकट काटती है तो मेनका और भाजपा की राहें जुदा हो सकती हैं। यहां अभी बसपा भी खामोशी अख्तियार किए हुए है।

इसी तरह कैसरगंज सीट भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां मौजूदा भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का टिकट होल्ड है। महिला पहलवानों के आरोपों से घिरने के बाद पार्टी उन्हें लेकर पशोपेश में है। फिलहाल माना जा रहा है कि खुद या परिवार के किसी सदस्य को टिकट न मिलने की सूरत में बृजभूषण मैदान में उतरेंगे जरूर। यहां अभी सभी दलों के प्रत्याशी फिलहाल परदे की ओट में ही हैं।


तो इसलिए भी हो रही देरी....अवध क्षेत्र की 14 सीटों के चुनाव चौथे से लेकर छठे चरण तक होने हैं। इसलिए भी माना जा रहा है कि टिकट को लेकर राजनीतिक दल जल्दबाजी में नहीं हैं और वे एक दूसरे की रणनीति को भांप रहे हैं। कई सीटों पर प्रत्याशी एलान के बाद दलबदल या बगावत की भी आशंका है। इसलिए भी पार्टियां यहां वेट एंड वाच की मुद्रा में हैं।

सिटिंग सीटों पर : बसपा-कांग्रेस खामोश
अवध की 14 सीटों में 11 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि श्रावस्ती में बसपा के राम शिरोमणि वर्मा और अंबेडकरनगर में रितेश पांडेय जीते थे। कांग्रेस को केवल रायबरेली से कामयाबी मिली। गठबंधन में इस बार कांग्रेस को चार सीटें मिली हैं, लेकिन उसने अभी कहीं से उम्मीदवार घोषित नहीं किया। इसी तरह अंबेडकरनगर में बसपा के सांसद रितेश पांडेय अब भाजपा से मैदान में हैं। ऐसे में बसपा ने यहां और श्रावस्ती पर कोई घोषणा नहीं की है।

श्रावस्ती की सीट भी हुई अहम
श्रावस्ती संसदीय सीट पर बसपा के राम शिरोमणि वर्मा सांसद हैं। उन्हें बीते चुनाव में करीब छह हजार मतों से ही जीत हासिल हुई थी। भाजपा ने यहां से साकेत मिश्र को उतारा है, जो देश के ताकतवर नौकरशाहों में शुमार और राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र के बेटे हैं। इसीलिए सपा-बसपा भी यहां प्रत्याशी घोषित करने के लिए खासा सोच विचार कर रही है। 

संसदीय सीट -- चुनावी चरण -- मौजूदा सांसद -- दलों के घोषित प्रत्याशी    
बहराइच (सु.) -- चौथा -- अक्षयबर लाल गौड़ -- रमेश गौतम (सपा)
मिश्रिख (सु.) -- चौथा  -- अशोक रावत -- अशोक रावत (भाजपा), सुनीता राजवंशी (सपा)
सीतापुर -- चौथा -- राजेश वर्मा -- राजेश वर्मा (भाजपा)
रायबरेली -- पांचवां  -- सोनिया गांधी -- कोई नहीं            
अमेठी -- पांचवां -- स्मृति इरानी  -- स्मृति इरानी (भाजपा)
फैजाबाद -- पांचवां -- लल्लू सिंह -- लल्लू सिंह (भाजपा) अवधेश प्रसाद (सपा) सच्चिदानंद पांडेय (बसपा)
बाराबंकी (सु.) -- पांचवां -- उपेंद्र रावत -- कोई नहीं
लखनऊ -- पांचवां -- राजनाथ सिंह -- राजनाथ सिंह(भाजपा), रविदास मेहरोत्रा (सपा)
मोहनलालगंज (सु.) -- पांचवां -- कौशल किशोर -- कौशल किशोर (भाजपा) आरके चौधरी (सपा)
कैसरगंज -- पांचवां  -- बृजभूषण शरण सिंह  -- कोई नहीं
गोंडा -- पांचवां  -- कीर्तिवर्द्धन सिंह --  कीर्तिवर्द्धन सिंह (भाजपा), श्रेया वर्मा (सपा)
अंबेडकरनगर -- छठा   -- रितेश पांडेय  -- रितेश पांडेय(भाजपा), लालजी वर्मा(सपा)
सुल्तानपुर -- छठा -- मेनका गांधी -- भीम निषाद (सपा)
श्रावस्ती -- छठा -- राम शिरोमणि वर्मा -- साकेत मिश्र (भाजपा)

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