{"_id":"65996b2abaa6ba0c200bde63","slug":"lok-sabha-elections-sp-is-secretly-declaring-candidates-these-names-are-finalised-2024-01-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा चुनाव: गुपचुप तरीके से प्रत्याशी घोषित कर रही है सपा, ये नाम हुए तय, कांग्रेस को मिलेंगी इतनी सीटें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकसभा चुनाव: गुपचुप तरीके से प्रत्याशी घोषित कर रही है सपा, ये नाम हुए तय, कांग्रेस को मिलेंगी इतनी सीटें
Sun, 07 Jan 2024 11:59 AM IST
रोहित मिश्र
अजीत बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 07 Jan 2024 11:59 AM IST
सार
इंडिया गठबंधन में सीटों का बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है लेकिन सपा गुपचुप तरीके से प्रत्याशियों का चयन करना शुरू कर चुकी है। कांग्रेस को कितनी सीटें दी जाएंगी इस पर भी सपा मन बना चुकी है।
विज्ञापन
अखिलेश यादव और शिवपाल की सीट करीब-करीब तय है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे की तमाम अटकलों के बीच सपा खामोशी से अपने प्रत्याशियों को हरी झंडी दे रही है। फतेहपुर से प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और कटेहरी से विधायक लालजी वर्मा का अंबेडकरनगर से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है।वर्मा बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। वहीं, गाजीपुर से सपा-बसपा गठबंधन से पिछला लोकसभा चुनाव जीते अफजाल अंसारी पर सपा इस बार दांव लगा सकती है।
सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय का घोसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ना तय है। इसी तरह से फर्रुखाबाद से डॉ. नवल किशोर शाक्य, फैजाबाद से पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद, कौशांबी से इंद्रजीत सरोज और बस्ती से राम प्रताप चौधरी के नाम करीब-करीब तय हैं। ये नेता अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच संपर्क भी कर रहे हैं।
गोरखपुर से काजल निषाद और सलेमपुर से रमाशंकर विद्यार्थी का टिकट पक्का माना जा रहा है। उन्नाव से पूर्व सांसद अनु टंडन को लड़ाया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव खुद कन्नौज से, शिवपाल यादव आजमगढ़, डिंपल यादव मैनपुरी, धर्मेंद्र यादव बदायूं, अक्षय यादव फिरोजाबाद और एसटी हसन मुरादाबाद से मैदान में उतरेंगे।
विज्ञापन
बसपा कार्यकर्ता इंडिया में शामिल होने के पक्षधर : अफजाल
अफजाल अंसारी कहते हैं कि बसपा कार्यकर्ता चाहता है कि अगला लोकसभा चुनाव इंडिया गठबंधन में शामिल होकर लड़ा जाए। हालांकि, इस मामले में कोई भी अंतिम निर्णय बसपा सुप्रीमो मायावती को ही लेना है। अगला चुनाव सपा के टिकट पर लड़ने के सवाल पर कहा कि इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे। हालांकि, राजनीति में किसी भी संभावना से कभी इन्कार नहीं किया जा सकता। यहां बता दें कि अफजाल अंसारी ने 2004 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़कर ही जीता था।
कांग्रेस को 7 सीटें देना चाहती है सपा
यूपी में कांग्रेस को सपा सात लोकसभा सीटें देना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि अगर कांग्रेस इससे ज्यादा सीटें मांगती है तो इसका मतलब होगा भाजपा को लाभ पहुंचाना। इसलिए कांग्रेस को अपनी मांग इस तरह रखनी चाहिए जो व्यावहारिक कसौटी पर खरी उतरे।
विज्ञापन
सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय का घोसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ना तय है। इसी तरह से फर्रुखाबाद से डॉ. नवल किशोर शाक्य, फैजाबाद से पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद, कौशांबी से इंद्रजीत सरोज और बस्ती से राम प्रताप चौधरी के नाम करीब-करीब तय हैं। ये नेता अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच संपर्क भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
गोरखपुर से काजल निषाद और सलेमपुर से रमाशंकर विद्यार्थी का टिकट पक्का माना जा रहा है। उन्नाव से पूर्व सांसद अनु टंडन को लड़ाया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव खुद कन्नौज से, शिवपाल यादव आजमगढ़, डिंपल यादव मैनपुरी, धर्मेंद्र यादव बदायूं, अक्षय यादव फिरोजाबाद और एसटी हसन मुरादाबाद से मैदान में उतरेंगे।
विज्ञापन
बसपा कार्यकर्ता इंडिया में शामिल होने के पक्षधर : अफजाल
अफजाल अंसारी कहते हैं कि बसपा कार्यकर्ता चाहता है कि अगला लोकसभा चुनाव इंडिया गठबंधन में शामिल होकर लड़ा जाए। हालांकि, इस मामले में कोई भी अंतिम निर्णय बसपा सुप्रीमो मायावती को ही लेना है। अगला चुनाव सपा के टिकट पर लड़ने के सवाल पर कहा कि इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे। हालांकि, राजनीति में किसी भी संभावना से कभी इन्कार नहीं किया जा सकता। यहां बता दें कि अफजाल अंसारी ने 2004 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़कर ही जीता था।
कांग्रेस को 7 सीटें देना चाहती है सपा
यूपी में कांग्रेस को सपा सात लोकसभा सीटें देना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि अगर कांग्रेस इससे ज्यादा सीटें मांगती है तो इसका मतलब होगा भाजपा को लाभ पहुंचाना। इसलिए कांग्रेस को अपनी मांग इस तरह रखनी चाहिए जो व्यावहारिक कसौटी पर खरी उतरे।