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Lok Sabha Election: खर्च सीमा 4 गुना बढ़ी, प्रत्याशी लुटा रहे छह गुना; अब इतने लाख तक खर्च कर सकेंगे उम्मीदवार
Fri, 15 Mar 2024 03:38 PM IST
शाहरुख खान
सचिन मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 15 Mar 2024 03:38 PM IST
सार
लोकसभा चुनाव में खर्च सीमा चार गुना बढ़ गई है, लेकिन प्रत्याशी छह गुना लुटा रहे हैं। अब लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी 95 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।
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lok sabha election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा चुनाव में बीते चुनाव खर्च की सीमा बीते दो दशक में करीब करीब चार गुना तक बढ़ गई है। वहीं, चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी पांच से छह गुना तक खर्च कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में प्रत्याशी 95 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से राज्य की आबादी और मतदाताओं की संख्या के हिसाब से राज्यवार चुनाव खर्च की सीमा तय की जाती है। प्रत्याशी चुनाव के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक राशि खर्च नहीं कर सकते हैं। इसमें प्रत्याशी की सार्वजनिक बैठकों, रैलियों, विज्ञापनों, पोस्टर, बैनर, वाहनों और विज्ञापन का खर्च शामिल होता है।
लोकसभा चुनाव 2004 में चुनाव खर्च की सीमा 30 लाख रुपये थी। जो आगामी चुनाव के लिए बढ़ाकर 95 लाख रुपये की गई है। 1951 में पहले आम चुनाव में देश में 10.5 करोड़ रुपये चुनाव पर खर्च किए गए थे। जो 2019 में बढ़कर 6600 करोड़ तक पहुंच गए।
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मुद्रास्फीति सूचकांक से तय होती है दरें
चुनाव खर्च की सीमा बढ़ाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने 2020 में एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट पर चुनाव खर्च की सीमा 70 से बढ़ाकर 95 लाख रुपये की गई है। चुनाव खर्च की सीमा मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर तय होती है। बीते वर्षों में सेवाओं और वस्तुओं की कीमतों में हुई वृद्धि के आधार पर खर्च की सीमा तय की जाती है।
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से राज्य की आबादी और मतदाताओं की संख्या के हिसाब से राज्यवार चुनाव खर्च की सीमा तय की जाती है। प्रत्याशी चुनाव के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक राशि खर्च नहीं कर सकते हैं। इसमें प्रत्याशी की सार्वजनिक बैठकों, रैलियों, विज्ञापनों, पोस्टर, बैनर, वाहनों और विज्ञापन का खर्च शामिल होता है।
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लोकसभा चुनाव 2004 में चुनाव खर्च की सीमा 30 लाख रुपये थी। जो आगामी चुनाव के लिए बढ़ाकर 95 लाख रुपये की गई है। 1951 में पहले आम चुनाव में देश में 10.5 करोड़ रुपये चुनाव पर खर्च किए गए थे। जो 2019 में बढ़कर 6600 करोड़ तक पहुंच गए।
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मुद्रास्फीति सूचकांक से तय होती है दरें
चुनाव खर्च की सीमा बढ़ाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने 2020 में एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट पर चुनाव खर्च की सीमा 70 से बढ़ाकर 95 लाख रुपये की गई है। चुनाव खर्च की सीमा मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर तय होती है। बीते वर्षों में सेवाओं और वस्तुओं की कीमतों में हुई वृद्धि के आधार पर खर्च की सीमा तय की जाती है।
50 हजार रुपये से अधिक की नकदी का बताना होगा स्रोत
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुज झा ने बताया कि चुनाव के दौरान किसी के पास 50 हजार से ज्यादा नकदी मिलने पर उसका स्रोत और मकसद बताया होगा। स्रोत या उद्देश्य नहीं बताने पर राशि जब्त की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति के पास दस लाख रुपये या इससे अधिक राशि मिलती है तो तुरंत आयकर विभाग को सूचित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी के अधिकृत चुनाव एजेंट को भी यदि नकद राशि ले जाते हुए पकड़ा जाता है तो उन्हें भी उसका हिसाब देना होगा।
दस हजार रुपये से अधिक कीमत के पोस्टर, निर्वाचन सामग्री, ड्रग्स, मदिरा, हथियार या उपहार मिलते हैं जिनका उपयोग प्रलोभन के लिए किया जा सकता है उन्हें भी जब्त किया जा सकता है।
अब तक दो लाख रुपये तक की रकम लेकर चलने पर उसका प्रमाण पत्र, बैंक रिकार्ड या रुपये के लेनदेन का ब्योरा लेकर चलना होता था। मगर, अब इस राशि का दायरा बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया है।
अगर कहीं चेकिंग में रकम पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा पकड़ी जाती है और यह टीम तत्काल आयकर टीम को बुलाएगी। आयकर टीम जांच करेगी। मौके पर आयकर टीम को संबंधित व्यक्ति प्रमाण पत्र दिखा पाएगा तो रकम छूटेगी। अन्यथा उस रकम को फ्रीज कर जांच में रखा जाएगा।
पिछले 10 चुनावों में खर्च
| वर्ष | मतदाता करोड़ में | खर्च करोड़ रुपये में |
| 1984 | 40.03 | 81.5 |
| 1989 | 49.89 | 154.2 |
| 1991 | 51.15 | 359.1 |
| 1996 | 59.26 | 597.3 |
| 1998 | 60.59 | 666.2 |
| 1999 | 61.95 | 947.7 |
| 2004 | 67.15 | 1016.1 |
| 2009 | 71.7 | 1114.4 |
| 2014 | 83.43 | 3870.3 |
| 2019 | 90 | 6500 |