अहं और अहमियत में उलझी है तीसरे चरण की जंग, मैनपुरी से लेकर फिरोजाबाद तक यही हाल
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यूपी के सियासी समीकरणों के लिहाज से लोकसभा चुनाव का तीसरा चरण काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इस चरण की 10 सीटों पर मुख्य लड़ाई अहं और अहमियत के बीच दिख रही है। इसमें सिर्फ चुनावी जीत या हार तय होने नहीं जा रही है बल्कि कई बड़े चेहरों की पहुंच व पकड़ के साथ प्रतिष्ठा का फैसला भी होने वाला है।
रामपुर यह तय करेगा कि आजम खां उसके लिए अब कितनी अहमियत रखते हैं तो फिरोजाबाद यादव परिवार में चल रही अहं की जंग का फैसला करने जा रहा है। पर्दा इस पर से भी उठेगा कि मुलायम परिवार की जंग को जनता किस रूप में ले रही है और वह किसके साथ खड़ी है।
वैसे तो इस चरण में संतोष गंगवार के रूप में एक ही केंद्रीय मंत्री के भाग्य का फैसला होने वाला है, लेकिन प्रमुख चेहरों के लिहाज से यह चरण बहुत महत्वपूर्ण है। प्रदेश सरकार का कोई मंत्री इस चरण की जंग में सीधे शामिल नहीं है लेकिन पुत्री संघमित्रा मौर्य के मैदान में होने के नाते योगी सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा जरूर दांव पर है।
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह की सीट भी इसी चरण में शामिल है। यहां का नतीजा राजभवन की सीमाओं में बंधे होने के बावजूद क्षेत्र के बीच कल्याण की अहमियत बताने वाली होगी। कारण, कल्याण यहां से खुद सांसद रहे हैं।
यादव परिवार में नाक की लड़ाई
सपा के लिए अहम
मुलायम सिंह यादव से लेकर आजम तक का इस जंग में शामिल होना जहां समाजवादी खेमे की सियासत की दिशा व दशा के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रहा है तो यह भी तय करने वाला है कि भाजपा अपनी जीत को स्थायी रखने की क्षमता कहां तक हासिल कर पाई है। कारण, इस चरण की 10 सीटों में से बसपा सिर्फ आंवला से लड़ रही है। शेष नौ पर सपा के ही उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें मैनपुरी, बदायूं और फिरोजाबाद कई चुनाव से मुलायम परिवार के गढ़ साबित होते रहे हैं।
फिरोजाबाद सीट यादव परिवार के सदस्यों के परस्पर अहं के टकराव और नाक की लड़ाई का प्रतीक बन गई है। लोकसभा चुनाव में पहली बार शिवपाल सिंह यादव और अक्षय यादव एक-दूसरे को हराने के लिए लड़ रहे हैं।
पुत्र अक्षय के कारण पिता प्रो. रामगोपाल के लिए तो शिवपाल से सीधे मोर्चा लेने के कारण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए भी यह सीट निजी प्रतिष्ठा से जुड़ गई है। यहां की जीत-हार से साफ होने वाला है कि जनता की नजर में शिवपाल या प्रो. रामगोपाल में कौन मुलायम की विरासत का असली उत्तराधिकारी है।
जनता के बीच कौन ज्यादा अहमियत रखता है। भाजपा ने यहां डॉ. चंद्रसेन जादौन को मैदान में उतारा है। वैसे तो भाजपा यहां से तीन बार जीत चुकी है लेकिन तब यह सीट सुरक्षित होती थी। पिछली बार यहां से सपा के अक्षय यादव जीते थे। रामपुर सीट पर भाजपा ने अभिनेत्री और यहां से दो बार सांसद रह चुकीं जयाप्रदा को मैदान में उतारा है जबकि सपा से वरिष्ठ नेता आजम खां मैदान में हैं।
इस सीट पर मुस्लिम मतदाता 50 प्रतिशत से ज्यादा माने जाते हैं। जयाप्रदा को कभी आजम ही रामपुर चुनाव लड़ाने लाए थे, पर आज इन दोनों के आमने-सामने होने से यहां भी अहं का टकराव खुलकर दिख रहा है। रामपुर से अभी भाजपा के डॉ. नैपाल सिंह सांसद हैं, जो इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे। नैपाल सिंह से पहले भी भाजपा यहां से दो बार जीत चुकी है।
मैनपुरी से पीलीभीत तक गढ़ों को बचाए रखने की लड़ाई
मैनपुरी प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट है जहां भाजपा कभी नहीं जीती है। सपा के तेजप्रताप यादव यहां से मौजूदा सांसद हैं। इस बार मुलायम सिंह यादव यहां से चुनाव लड़ रहे हैं जो यहां से चार बार सांसद रह चुके हैं। पिछली बार जीतने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
यहां तीन चुनाव छोड़कर हमेशा सोशलिस्टों की जीत होती रही है। मुरादाबाद से अभी भाजपा के सर्वेश सिंह सांसद हैं। उनसे पहले इस सीट पर तीन दशक में भाजपा को कभी जीत नहीं मिल पाई। यहां से भी ज्यादातर सोशलिस्ट जीते हैं। संभल से भी भले ही अभी भाजपा के सत्यपाल सैनी सांसद हों लेकिन यहां इससे पहले भाजपा कभी नहीं जीती।
जाहिर है कि भाजपा को जहां इन सीटों को बचाए रखने की चुनौती है तो समाजवादियों के सामने अपना झंडा फहराने की। बरेली सीट सिर्फ 2009 को छोड़कर 1989 से भाजपा के पास रही है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार यहां से सात बार सांसद रह चुके हैं।
इसी तरह पीलीभीत से मेनका गांधी छह बार जीत चुकी हैं। 2009 में यहां से वरुण गांधी जीते थे, जो इस बार फिर यहां से मैदान में हैं। मेनका गांधी इस बार वरुण की सीट सुल्तानपुर से लड़ रही हैं। भाजपा के सामने भी इन गढ़ों में अपनी अहमियत बनाए रखकर दिखाने की चुनौती है।
यहां देखें, कहां से कौन सांसद
कहां से कौन सांसद
बरेली : संतोष गंगवार (भाजपा)
पीलीभीत : मेनका गांधी (भाजपा)
आंवला : धर्मेंद्र कुमार (भाजपा)
मुरादाबाद : सर्वेश सिंह (भाजपा)
रामपुर : नैपाल सिंह (भाजपा)
संभल : सत्यपाल सैनी (भाजपा)
एटा : राजवीर सिंह (भाजपा)
मैनपुरी : तेजप्रताप यादव (सपा)
फिरोजाबाद : अक्षय यादव (सपा)
बदायूं : धर्मेंद्र यादव (सपा)