लोकसभा चुनाव 2019: शहीद की नगरी में जाति-धर्म का गणित इस बार उलट-पुलट
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प्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य नरेंद्र देव, राजस्व व्यवस्था के जनक राजा टोडरमल और कारगिल शहीद परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडेय की जन्मस्थली सीतापुर में लोकसभा चुनाव की तस्वीर लगभग साफ नजर आ रही है। यहां तमाम मतदाता जातीय बंधन और दलीय गोलबंदी को तोड़कर वोट करने की बात करते नजर आते हैं। भाजपा प्रत्याशी राजेश वर्मा और गठबंधन प्रत्याशी बसपा के नकुल दुबे की लड़ाई किस करवट बैठेगी, यह कांग्रेस प्रत्याशी कैसरजहां की लड़ाई से तय होगी। फिलहाल कांग्रेस यहां त्रिकोण बनाने की भरपूर कोशिश करती नजर आ रही है।
सीतापुर के मतदाताओं ने सभी प्रमुख दलों को मौका दिया, मगर समस्याएं अब भी मुंह बाए खड़ी हैं। कमलापुर की चीनी मिल लंबे समय से बंद है। लहरपुर, बिसवां और महमूदाबाद तहसील का बड़ा हिस्सा हर साल बाढ़ से डूब जाता है। रेउसा से लहरपुर की चौड़ी सड़क से हजारों लोग रोज जाते-आते हैं। सांसद राजेश वर्मा का घर भी इसी रास्ते पर पड़ता है। वर्मा तीन बार के सांसद हैं, लेकिन यह सड़क जगह-जगह टूटी और उखड़ी है। गाड़ी हिचकोले खाते चलती है, लेकिन ये मुद्दे यहां चर्चा में नहीं हैं। गेहूं क्रय केंद्र मुड़िला पर मिले किसान भगवती प्रसाद कहते हैं कि सांसद राजेश ने कुछ खास काम नहीं किया, लेकिन उन्होंने किसी का विरोध भी नहीं किया। जो लोग उनसे खुश नहीं हैं, वे मोदी के नाम पर उन्हें वोट कर रहे हैं। यहां लड़ाई भाजपा और गठबंधन में है।
महोली में राधे पाल बोले-यहां धानुक, धोबी, रैदास हैं। यहां नंबर एक पर भाजपा, नंबर दो पर हाथी है। कांग्रेस कम है। इटिया सईद चौराहे पर फर्नीचर के दुकानदार उस्मान कहते हैं कि यहां कैसरजहां और नकुल दुबे, दोनों वोट पा रहे हैं। बिसवां में मो. शानू ने कहा कि लड़ाई त्रिकोणीय है। गांव में भाजपा का ज्यादा जोर सुनाई पड़ रहा है। मुस्लिम वोटों में आधा कैसरजहां ले जाएंगी। अंसारी वोट उनकी तरफ जाता दिख रहा है। बिसवां में ही खुशीराम यादव बताते हैं कि उन्हें व उनके भाई को 2000-2000 रुपये की दो किस्तें मिल चुकी हैं। मां को गैस सिलिंडर मिला। ऐसे ही दूसरे लोगों को भी फायदा मिला है। यहां मुकाबला गठबंधन और भाजपा के बीच है।
रेउसा विधानसभा क्षेत्र के अकसोहा में मिले ओमप्रकाश ने बताया कि शिक्षित लड़के अब जाति के आधार पर नहीं, काम देखकर वोट देने जा रहे हैं। सांसद ढीले हैं, लेकिन इलाकाई विधायक एक्टिव हैं। वे बताते हैं कि कांग्रेस की 72,000 रुपये वाली योजना ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाई। लहरपुर में पड़रिया में सुधीर सिंह ने कहा कि बसपा का क्षेत्रीय प्रत्याशी होता तो राजेश वर्मा का निकलना इस बार मुश्किल हो जाता। कैसरजहां मुस्लिम वोट काटकर गठबंधन को नुकसान पहुंचा रही हैं, लेकिन भाजपा के साथ माने जाने वाले कुछ पंडित भी नकुल के साथ जा रहे हैं। ऐसे में नकुल के बाहरी होने के बावजूद भाजपा और गठबंधन में लड़ाई कांटे की हो रही है।
प्रमुख प्रत्याशियों के बारे में
राजेश वर्मा (भाजपा) मौजूदा सांसद हैं। इसके पहले दो बार बसपा से सांसद रह चुके हैं। पिछड़ा वर्ग में अच्छी पकड़ है।
नकुल दुबे (बसपा) गठबंधन से प्रत्याशी हैं। मायावती सरकार में नगर विकास मंत्री रहे हैं। बाहरी होने के बाद भी परंपरागत मतदाता साथ नजर आ रहा है।
कैसरजहां (कांग्रेस) बसपा से 2009 में सांसद रहीं। उनके पति जासमीर अंसारी दो बार विधायक रहे हैं। मुस्लिम वोटों में सेंध की कोशिश में।
चार सांसद चुनते हैं सीतापुर के मतदाता
सीतापुर यूपी का ऐसा जिला है, जहां के लोग चार सांसद चुनते हैं। सीतापुर में 9 विधानसभा क्षेत्र हैं। सिधौली के लोग मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र का सांसद चुनते हैं। सीतापुर, लहरपुर, महमूदाबाद, सेवता और बिसवां विधानसभा क्षेत्र के लोग सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का सांसद चुनते हैं। मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र के मतदाता मिश्रिख लोकसभा सीट और महोली व हरगांव विधानसभा क्षेत्र के लोग लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा लोकसभा क्षेत्र के लिए वोट देते हैं।
राजा टोडरमल के नाम पर डाक टिकट जारी न करने से नाराजगी
सीतापुर की बड़ी पहचान राजस्व व्यवस्था के जनक राजा टोडरमल से है। केंद्र सरकार ने राजा टोडरमल के नाम पर डाक टिकट जारी करने का एलान किया था। राजा टोडरमल स्मारक समिति के कर्ताधर्ता संजय पुरी बताते हैं कि डाक टिकट जारी न करने से लोगों में नाराजगी है।