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Lucknow News: लोहिया संस्थान के अध्ययन में खुलासा...57 फीसदी यौन रोगी मानसिक विकार से भी पीड़ित

Fri, 12 Jun 2026 02:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 02:12 AM IST
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Lohia Institute study reveals... 57% of sexual health patients also suffer from mental disorders
लखनऊ। यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) से जूझ रहे आधे से अधिक मरीज मानसिक विकार से भी पीड़ित हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। अध्ययन में ऐसे मरीजों के उपचार में दवाओं के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य परामर्श को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है।
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यह अध्ययन एनल्स ऑफ इंडियन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में 18 वर्ष से अधिक आयु के 70 एसटीआई मरीजों को शामिल किया गया था जिनकी औसत आयु 33 वर्ष थी। इनमें 91.43 फीसदी पुरुष और 8.57 फीसदी महिलाएं थीं। अध्ययन में पाया गया कि 57.14 फीसदी मरीजों में मानसिक विकार या मनोवैज्ञानिक परेशानी के संकेत थे। वहीं, 54.29 फीसदी मरीजों में हल्की चिंता और 14.29 फीसदी में मध्यम स्तर की चिंता दर्ज की गई। अवसाद की बात करें तो करीब 26 फीसदी मरीज हल्के या मध्यम अवसाद से प्रभावित पाए गए। इसको देखते हुए अध्ययनकर्ताओं ने एसटीआई उपचार में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं जोड़ने की सिफारिश की है। अध्ययन में डॉ. एक्यू जिलानी, डॉ. आकांक्षा शर्मा, डॉ. सौम्या अग्रवाल और डॉ. प्रतिष्ठा सिंह शामिल रहीं।
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क्या है यौन संचारित संक्रमण

यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) संक्रमण के ऐसे मामले होते हैं जो असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से फैलते हैं। इनमें जननांग हर्पीज, सिफिलिस, गोनोरिया, क्लैमाइडिया और एचआईवी जैसे संक्रमण शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर ये बांझपन, गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं और हृदय व तंत्रिका तंत्र की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इनसे एचआईवी संक्रमण का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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इसलिए है काउंसिलिंग की जरूरत



लोहिया संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विक्रम सिंह के मुताबिक यौन संचारित संक्रमण के मामलों में पीड़ित हमेशा शर्म और संकोच में रहता है। वह इलाज के लिए आ तो जाता है लेकिन इसकी वजह वह मानसिक तनाव में रहता है। सामाजिक कलंक, भविष्य की चिंता और रिश्तों पर पड़ने वाला असर मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। ऐसे में एसटीआई मरीजों की नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, काउंसिलिंग और सामाजिक समर्थन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
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