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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   LMRC MD kumar keshav interview.

जानें क्या कहते हैं, रिकॉर्ड समय में लखनऊ को मेट्रो का तोहफा देने वाले कुमार केशव

Thu, 01 Dec 2016 10:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Dec 2016 10:24 AM IST
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LMRC MD kumar keshav interview.
एमडी कुमार केशव - फोटो : amar ujala

तय समय एक दिसंबर को ही मेट्रो का ट्रायल होने को लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी कुमार केशव एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। बहुत कम लो जानते होंगे कि कुमार केशव ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने का फैसला भावुकता में लिया।

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अपने ही शहर के लोगों को मेट्रो का तोहफा देने के लिए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा कमाई वाली जिम्मेदारी छोड़ दी। ‘अमर उजाला’ ने कुमार केशव से शहर से उनके जुड़ाव, मेट्रो के अनुभव पर बात की...
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- आप जिस शहर के हैं, उसी के लिए मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम करना कैसा रहा?

- मैं बरेली में पैदा हुआ। आईआईटी रूड़की और आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की। लेकिन, लखनऊ में मेरा पैतृक घर था, इसलिए यह शहर मेरे दिल के करीब है। माता-पिता 1981 से आलमबाग में रह रहे हैं। लखनऊ मेट्रो के लिए काम करने का ऑफर मिला तो मैं ऑस्ट्रेलिया में एक मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था। अच्छा पैसा भी मिल रहा था, पर अपने शहर के लिए काम करने का मौका मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लखनऊ मेट्रो के लिए काम करना दिल को छूने वाला अनुभव रहा। यही वजह रही कि मैं व्यक्तिगत रूप से इस प्रोजेक्ट के लिए जुटा रहा।

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'26 मार्च से लोगों को यात्रा करा पाएंगे'

LMRC MD kumar keshav interview.

- मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट में डेडलाइन पूरा करना कठिन होता है।

- लखनऊ मेट्रो का सिविल वर्क 27 सितंबर 2014 को शुरू हुआ। एक दिसंबर को हमें ट्रायल भी शुरू करना था। दो साल दो महीने में काम पूरा करना बड़ी चुनौती थी। अब तक किसी ने ऐसा नहीं किया था। हमें शून्य से शुरूआत करनी थी। हमने अब कर दिखाया है। मुझे पूरा यकीन है कि 26 मार्च से हम लोगों को मेट्रो में लोगों को यात्रा करा पाएंगे।

- मेट्रोमैन ने नार्थ-साउथ कॉरिडोर का समय 3 माह कम कर दिया है। लगता नहीं कि अभी चुनौतियां खत्म हो गई हैं?

- मेट्रोमैन की सभी बात को मानता हूं। नार्थ-साउथ कॉरिडोर का काम मार्च 2019 तक प्रस्तावित हैं, पर मेट्रोमैन ने दिसंबर 2018 तक काम पूरा करने के लिए कहा है। हम इसे भी पूरा करेंगे। डर की वजह से हम मेहनत करना बंद नहीं कर सकते।

- मेट्रो को बजट नहीं मिलने के मुद्दे उठते रहे हैं?

- मेट्रो के लिए अभी तक राज्य सरकार से केंद्र के मुकाबले अधिक बजट मिला है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि केंद्र से बजट नहीं मिल रहा। केंद्र सरकार से बजट मिलने का एक शिड्यूल तय है। उसी के मुताबिक बजट मिल रहा है। केंद्र की मदद से यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक का लोन भी स्वीकृत हो चुका है। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों को भी बुलाया गया है।

मेट्रो के लिए ये है भविष्य की योजना

LMRC MD kumar keshav interview.

- मेट्रो की अब भविष्य की योजनाएं क्या होगी?

- नार्थ साउथ कॉरिडोर के बाद अब ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के चारबाग से बसंतकुंज पर काम होना है। दिल्ली की तरह लखनऊ को भी अगले चरण के मेट्रो प्रोजेक्ट की जरूरत होगी। हम इसके लिए मास्टर प्लान बना रहे हैं। इसे जल्द ही फाइनल कर लिया जाएगा।

- नार्थ-साउथ कॉरिडोर को रेड लाइन का नाम दिया गया है? किसी खास राजनीतिक पार्टी से प्रेरित तो नहीं?

- दुनियाभर में मेट्रो प्रोजेक्ट का पहला रूट लाल रंग की थीम पर मिलेगा। दिल्ली में भी हमने सबसे पहले रेडलाइन की ही शुरूआत की। अब यह यूनिवर्सल रूप से प्रोजेक्ट की शुरूआत करने वाला रंग बन गया है। अब ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का रंग क्या होगा, इसका फैसला प्रोजेक्ट की शुरूआत के साथ ही होगा।

- आपको श्रीधरन के बाद अगली पीढ़ी का मेट्रोमैन कहा जाने लगा है?

- मेट्रोमैन ई. श्रीधरन से मेरी कोई तुलना नहीं है। मैं तो उनसे सीखकर सिर्फ उन्हें कॉपी करने की कोशिश करता हूं। कई बार तो उनको कॉपी भी नहीं कर पाता। उनकी प्रतिभा विलक्षण है। वे हमेशा मेट्रोमैन रहेंगे।

जल्दबाजी में कुछ दाग भी लगे

LMRC MD kumar keshav interview.

लखनऊ मेट्रो को समय से चलाने की जल्दी में फ्रांस की दागी कंपनी को कोच आपूर्ति का टेंडर दे दिया गया। 1070 करोड़ रुपये के इस कॉन्ट्रैक्ट में कंपनी को 20 ट्रेन (80 कोच) की आपूर्ति लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को करानी है।

दागी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के सवाल पर हालांकि एलएमआरसी का कहना है कि उनका अनुबंध एलस्टॉम की भारतीय कंपनी के साथ हुआ है। कॉन्ट्रैक्ट के लिए पूरी प्रक्रिया की गई। मूलरूप से फ्रांस की कंपनी एलस्टॉम पर यूके की सीरियस फ्रॉड ऑफिस (एसएफओ) ने भारत में अधिकारियों को 30 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोपी पाया।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) में यह रिश्वत एक सिग्नल कॉन्ट्रैक्ट को पाने केलिए देना बताया गया। इस मामले में एसएफओ और दिल्ली सरकार दोनों ने ही सीबीआई से भी जांच करने की मांग की थी। 2014 में सामने आए मामले की जांच चल रही है।

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