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केजीएमयू में असाध्य रोग के मरीज का इलाज बिल्कुल मुफ्त, फिर भी खर्च करा दिए साढ़े पांच लाख रुपये

Sun, 16 Jun 2019 04:55 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 16 Jun 2019 04:55 PM IST
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Liver transplant in KGMU in Lucknow.
- फोटो : amar ujala

केजीएमयू में असाध्य रोग के मरीज की जांच, दवा और इलाज पूरी तरह निशुल्क है, इसके बावजूद लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले कैंसरग्रस्त मरीज से साढ़े पांच लाख रुपये जमा कराने का मामला सामने आया है। ये रुपये जांच और दवाओं के नाम पर जमा कराए गए हैं। इसमें करीब ढाई लाख रुपये पहले लिए जा चुके हैं।

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ट्रांसप्लांट होते समय सामान मंगाने के लिए करीब तीन लाख रुपये जमा कराए गए। इसमें तीन लाख रुपये चेक से संबंधित मेडिकल स्टोर को दिया गया है। अब डेढ़ लाख रुपया और जमा कराने के लिए कहा गया है। ये रुपये कैश मांगे जा रहे हैं।
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लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले मड़ियांव निवासी अजय कुमार के परिवारीजनों ने रुपये का इंतजाम कर्ज लेकर किया है। एक बेटे ने लिवर दान किया तो दूसरे बेटे ने रिश्तेदारों और दोस्तों से कर्ज का इंतजाम किया। लिवर कैंसर से पीड़ित अजय के पास असाध्य रोगी होने का कार्ड भी बना है। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन ने मदद करने की जरूरत नहीं समझी। इतना ही नहीं केजीएमयू की ओर से एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए भी बनाया गया। इसमें करीब 15 लाख रुपये की जरूरत बताई गई है।
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मुख्यमंत्री कार्यालय से रुपये देने के लिए संबंधित जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि मरीज का सत्यापन किया जाए ताकि उसे इलाज में मदद की जा सके। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन संवेदनहीन बना रहा। अजय कुमार के परिवारीजनों की मानें तो पहले जांच और दवाओं के नाम पर रुपये जमा कराए गए। अब डेढ़ लाख रुपये अतिरिक्त मांगा जा रहा है। जिस मेडिकल स्टोर पर रुपये जमा कराए गए थे, वहां से यह भी कह दिया गया है कि अब रुपये चेक से नहीं लिए जाएंगे बल्कि कैश में देना होगा।

इलाज में बर्बाद हो चुका है परिवार

पेशे से ड्राइवर अजय की माली हालत अच्छी नहीं है। बीमारी की वजह से परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो चुका है। बेटे ने बताया कि सालभर पहले अजय को पेट संबंधी दिक्कतें हुई थीं। वे दिल्ली चले गए। पता चला कि लिवर कैंसरग्रस्त हो चुका है। इसके बाद वह केजीएमयू पहुंचे। यहां भर्ती करने के बाद शुक्रवार को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।

केजीएमयू प्रशासन भी कर चुका है खर्च का दावा
केजीएमयू प्रशासन भी खर्चे की बात स्वीकार कर रहा है। शुक्रवार को ट्रांसप्लांट के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि ट्रांसप्लांट में करीब सात से आठ लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। यही ट्रांसप्लांट निजी अस्पताल में होता तो करीब दस गुना अधिक खर्च होता।

रुपये खर्च हुए हैं तो लौटाए जाएंगे
मामले पर केजीएमयू के सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार का कहना है कि असाध्य रोगी का मुफ्त में इलाज किया जाता है। इस मरीज के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दवाएं और उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। रुपये जमा कराने के बारे में जानकारी नहीं है। यह संभव है कि परिवारीजन भर्ती होने से पहले हुए खर्च के बारे में जानकारी दे रहे हों। फिर भी सच्चाई पता कराया जाएगा। रुपये खर्च हुए हैं तो उसके बारे में नियम को समझा जाएगा और मरीज के परिवारीजनों को रुपये वापस कराने का प्रयास किया जाएगा।

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