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Lucknow : एटीएस की विशेष कोर्ट का आदेश, सीआरपीएफ कैंप पर हमले में तीन आतंकियों को आजीवन कारावास

Mon, 27 Feb 2023 07:44 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 27 Feb 2023 07:44 PM IST
सार

इस आतंकी घटना में सीआरपीएफ के सात जवान आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हो गए जबकि एक रिक्शा चालक को भी अपनी जान गंवानी पड़ गयी। एके-47 और हैंडग्रेनेड से ग्रुप केंद्र को दहलाने केबाद आतंकी आसानी से फरार भी हो गए।

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Life imprisonment and fine to Sabauddin, Imran Shahzad and Mo Farooq, involved in CRPF camp attack
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

एटीएस की विशेष कोर्ट ने रामपुर के सीआरपीएफ कैंप में घुसकर आतंकी हमले की घटना को अंजाम देने की साजिश रचने के आरोप में लखनऊ से गिरफ्तार हुए आतंकी सबाउद्दीन उर्फ सबा उर्फ फरहान उर्फ संजीव, इमरान शहजाद उर्फ अबु ओसामा उर्फ अजय उर्फ असद उर्फ रमीज़ उर्फ उवैस और मोहम्मद फारुख उर्फ अबु उर्फ जुल्फकार उर्फ नमन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एटीएस के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने तीनों दोषियों पर 18 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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तीनों आरोपियों को सोमवार को सुनवाई के दौरान जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपियों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराने के बाद सजा का एलान किया। एटीएस की तरफ से मौजूद विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि एसटीएफ के निरीक्षक नाबेंदु कुमार ने 10 फरवरी 2008 को हुसैनगंज थाने में दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया कि 9 फरवरी 2008 की रात में सूचना मिली कि लश्करे तैयबा से जुड़े और रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में शामिल रहे आतंकी सुबह 5 बजे नौचंदी एक्सप्रेस से लखनऊ पहुंच रहे हैं। पुलिस टीम को यह भी सूचना मिली थी कि इनके पास अत्याधुनिक असलहे एवं विस्फोटक सामग्री भी मौजूद है। घेराबंदी कर इन तीनों आतंकवादियों को चारबाग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो अदद एके 47 मय मैगजीन, 18 राउंड कारतूस, दो हैंड ग्रेनेड और पाकिस्तानी पासपोर्ट बरामद हुए थे। इसके बाद इस मामले की विवेचना एटीएस को सौंप दी गई।
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अभियोजन पक्ष ने बताया कि रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में जनवरी 2008 में हुए आतंकवादी हमले से जुड़े आतंकियों की तलाश एवं गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ के तत्कालीन एसएसपी अमिताभ यश ने पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश के नेतृत्व में विशेष टीम भी गठित की थी। इसी में शामिल एटीएस के अपर पुलिस अधीक्षक राजेश श्रीवास्तव ने मामले की विवेचना पूरी कर तीनों आरोपियों के खिलाफ 7 मई 2008 को कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था।
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नए साल के जश्न पर दहला था सीआरपीएफ ग्रुप कैंप, 40 दिन बाद पकड़े गए थे आतंकी
रामपुर में 31 दिसंबर 2007 को सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र के जवान नए साल का जश्न मना रहे थे, तभी आधा दर्जन से ज्यादा आतंकियों ने हमला बोल दिया। इस आतंकी घटना में सीआरपीएफ के सात जवान आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हो गए जबकि एक रिक्शा चालक को भी अपनी जान गंवानी पड़ गयी। एके-47 और हैंडग्रेनेड से ग्रुप केंद्र को दहलाने केबाद आतंकी आसानी से फरार भी हो गए। यूपी पुलिस ने 40 दिन की कड़ी मशक्कत केबाद आठ आतंकियों को रामपुर और लखनऊ से गिरफ्तार किया था।

रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले की घटना ने प्रदेश ही नहीं, देश भर में हड़कंप मचा दिया था। इससे पहले यूपी में सुरक्षा बलों पर इतना बड़ा हमला कभी नहीं हुआ था। करीब 12 साल तक रामपुर की अदालत में चली सुनवाई के बाद 2 नवंबर 2019 को चार आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई गयी जिनमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का निवासी इमरान शहजाद, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का मोहम्मद फारुख, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन, और रामपुर के बदनपुरी के शरीफ उर्फ सुहैल को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं मुरादाबाद में मूंढापांडे के जंग बहादुर को आजीवन कारावास और मुंबई के गोरेगांव निवासी फहीम अंसारी को दस साल की सजा हुई थी। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरेली के गुलाब खां और प्रतापगढ़ के कौसर खां को दोष मुक्त कर दिया था।

गेट नंबर एक से घुसे थे आतंकी
31 दिसंबर 2007 की रात को आतंकी सीआरपीएफ ग्रुप कैंप के गेट नंबर एक से भीतर घुसे थे और ताबड़तोड़ गोलियां और हैंड ग्रेनेड बरसाने लगे। गेट पर मौजूद जवानों ने जवाबी फायरिंग की लेकिन आतंकी परिसर के अंदर चले गए और अधाधुंध गोलीबारी करने लगे। इससे सात जवानों के अलावा कैंप के गेट पर सो रहे रिक्शा चालक की गोली लगने से मौत हो गयी। जांच में सामने आया था कि आतंकियों और उनके मददगारों ने कई फर्जी नाम रखे थे और पासपोर्ट भी बनवाए थे।

मुकदमा वापस लेने की थी तैयारी
आतंकियों को सजा दिलाने के लिए यूपी पुलिस ने कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी थी। इस मामले में 38 लोगों ने गवाही दी। जिनमें एटीएस, यूपी पुलिस और सीआरपीएफ के अलावा फॉरेसिंक साइंस विशेषज्ञ शामिल थे। वहीं फर्जी पासपोर्ट और पिस्टल बरामदगी मामले में भी 17 लोगों ने गवाही दी थी। वर्ष 2012 में सपा सरकार बनने के बाद आतंकियों पर दर्ज मुकदमे की वापसी के लिए रामपुर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गयी थी। प्रशासन ने कोर्ट में सुनवाई जारी रहने का हवाला देकर इसकी सहमति नहीं दी थी। जिसकेबाद राज्य सरकार को कदम पीछे हटाने पड़े थे। लखनऊ और बरेली की जेल में बंद रामपुर कांड के आतंकियों को सजा दिलाने में करीब छह करोड़ रुपए खर्च हुए थे।


अमर उजाला ने पहले किया था खुलासा
रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला होने का अलर्ट केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने एक माह पूर्व जारी किया था जिसका खुलासा अमर उजाला ने 29 नवंबर 2007 के अंक में किया था। इसकी गूंज दिल्ली तक हुई थी। बाद में खुफिया एजेंसियों की सूचना सही साबित हुई, जब 31 दिसंबर की रात आतंकियों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया।

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