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नगर निगम की सख्ती, इन कारोबार के लिए लाइसेंस किया जरूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 05 Mar 2018 02:14 PM IST
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नगर निगम को 14 साल बाद अपने अधिकार याद आए तो शहर में 18 तरह के कारोबार करने के लिए लाइसेंस का आदेश जारी कर दिया। यह व्यवस्था नए वित्तीय वर्ष यानी अगले महीने से लागू होगी।
अप्रैल से जांच शुरू होगी और जिनके पास लाइसेंस नहीं मिला, उन प्रतिष्ठानों को सील किया जाएगा। अनुमान है कि इस व्यवस्था से निगम को साल में करीब दस करोड़ रुपये की आय होगी।
शासन के 2004 में नगर निगम को शहरी सीमा में चलने वाले कारोबार पर नियंत्रण और आय बढ़ाने को लेकर अधिकार दिए थे। नगर निगम के अधिनियम में भी इसका प्रावधान है।
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इसके तहत नगर निगम प्रशासन ने 21 तरह के कारोबार को लाइसेंस के दायरे में लाने को लेकर उपविधियां बनाई थीं। इनको पूरी तरह से लागू किया जाता उससे पहले ही नर्सिंग होम एसोसिएशन, ईंट भट्ठा व केबिल आदि कारोबार करने वाले बड़े संगठन ने कान्रूनी विवाद खड़ा कर दिया था।
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अप्रैल से जांच शुरू होगी और जिनके पास लाइसेंस नहीं मिला, उन प्रतिष्ठानों को सील किया जाएगा। अनुमान है कि इस व्यवस्था से निगम को साल में करीब दस करोड़ रुपये की आय होगी।
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शासन के 2004 में नगर निगम को शहरी सीमा में चलने वाले कारोबार पर नियंत्रण और आय बढ़ाने को लेकर अधिकार दिए थे। नगर निगम के अधिनियम में भी इसका प्रावधान है।
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इसके तहत नगर निगम प्रशासन ने 21 तरह के कारोबार को लाइसेंस के दायरे में लाने को लेकर उपविधियां बनाई थीं। इनको पूरी तरह से लागू किया जाता उससे पहले ही नर्सिंग होम एसोसिएशन, ईंट भट्ठा व केबिल आदि कारोबार करने वाले बड़े संगठन ने कान्रूनी विवाद खड़ा कर दिया था।
लाइसेंस लेकर पाल सकते हैं दो गाय-भैंस
लंबी लड़ाई के बाद निपटारा होने पर शहर की नई सरकार इसे कड़ाई से लागू करने की तैयारी में है। हालांकि लाइसेंस के लिए जरूरी कारोबार की संख्या 21 से घटकर 18 रह गई है। मीट-मुर्गा और स्लॉटर हाउस के लिए लाइसेंस का जिम्मा अब एफएसडीए के पास है।
आवासीय कॉलोनी के अंदर डेयरी चलाना प्रतिबंधित है, पर यदि आप पशु प्रेमी हैं और दुधारू पशु पालना चाहते हैं तो नगर निगम से लाइसेंस लेने के बाद दो गाय-भैंस पाल सकते हैं।
इससे अधिक के लिए लाइसेंस नहीं दिया जाता है। यदि पड़ोसी ने इस संबंध में कोई शिकायत की तो लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। मीट-मुर्गा की दुकानों और स्लॉटर हाउस के लाइसेंस देने का अधिकार एक साल पहले नगर निगम के पास था।
अब यह अधिकार एफएसडीए के पास चला गया। नगर निगम अब सिर्फ इन लाइसेंसों के लिए एनओसी देगा। इसमें यह देखा जाएगा कि जहां पर दुकान या स्लॉटर हाउस खोला जा रहा है, वह स्थल नियमों के दायरे में आता है या नहीं।
आवासीय कॉलोनी के अंदर डेयरी चलाना प्रतिबंधित है, पर यदि आप पशु प्रेमी हैं और दुधारू पशु पालना चाहते हैं तो नगर निगम से लाइसेंस लेने के बाद दो गाय-भैंस पाल सकते हैं।
इससे अधिक के लिए लाइसेंस नहीं दिया जाता है। यदि पड़ोसी ने इस संबंध में कोई शिकायत की तो लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। मीट-मुर्गा की दुकानों और स्लॉटर हाउस के लाइसेंस देने का अधिकार एक साल पहले नगर निगम के पास था।
अब यह अधिकार एफएसडीए के पास चला गया। नगर निगम अब सिर्फ इन लाइसेंसों के लिए एनओसी देगा। इसमें यह देखा जाएगा कि जहां पर दुकान या स्लॉटर हाउस खोला जा रहा है, वह स्थल नियमों के दायरे में आता है या नहीं।
इनके लिए है अनुमति जरूरी
इनके लिए अनुमति जरूरी
होटल गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट जलपान गृह, ईटिंग हाउस, कोल्ड ड्रिंक निर्माण व बिक्री, आइस फैक्ट्री, थ्री व फाइव स्टार, होटल, बार, आटा चक्की, देशी-विदेशी शराब की दुकानें, ईंट-भट्ठा, सुर्खी भट्ठा और मार्बल फैक्ट्री, नर्सिंग होम, प्राइवेट अस्पताल, प्राइवेट क्लीनिक, प्रसूति गृह, डेंटल क्लीनिक व अस्पताल, केबल टीवी, श्वान लाइसेंस, हड्डी खाल गोदाम, डेयरी।
'लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही यह काम करने के लिए अधिकारियों को नोटिस दी गई है। अगले वित्तीय वर्ष से किसी भी जोन में बिना लाइसेंस के प्रतिष्ठान मिलने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी और प्रतिष्ठान सील किए जाएंगे।' - उदयराज सिंह, नगर आयुक्त
होटल गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट जलपान गृह, ईटिंग हाउस, कोल्ड ड्रिंक निर्माण व बिक्री, आइस फैक्ट्री, थ्री व फाइव स्टार, होटल, बार, आटा चक्की, देशी-विदेशी शराब की दुकानें, ईंट-भट्ठा, सुर्खी भट्ठा और मार्बल फैक्ट्री, नर्सिंग होम, प्राइवेट अस्पताल, प्राइवेट क्लीनिक, प्रसूति गृह, डेंटल क्लीनिक व अस्पताल, केबल टीवी, श्वान लाइसेंस, हड्डी खाल गोदाम, डेयरी।
'लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही यह काम करने के लिए अधिकारियों को नोटिस दी गई है। अगले वित्तीय वर्ष से किसी भी जोन में बिना लाइसेंस के प्रतिष्ठान मिलने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी और प्रतिष्ठान सील किए जाएंगे।' - उदयराज सिंह, नगर आयुक्त