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Lucknow News: कम जगह, ज्यादा रोमांच... लखनऊ में पिकलबॉल बना नया खेल ट्रेंड
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साैरभ मिश्रलखनऊ। कुछ साल पहले तक लखनऊ में पिकलबॉल का नाम भी कुछ ही लोग जानते थे। शहर में केवल दो-चार कोर्ट और मुट्ठी भर लोग ही इस खेल से जुड़े थे, लेकिन महज दो वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पिकलबॉल अब राजधानी के फिटनेस और स्पोर्ट्स कल्चर का नया आकर्षण बन गया है। महज दो वर्षों में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि शहर में कोर्ट की संख्या 50 और नियमित खिलाड़ियों का आंकड़ा 600 से ज्यादा हो गया है।
टेनिस, बैडमिंटन और टेबल टेनिस का मिश्रण माने जाने वाले पिकलबॉल को सीखना आसान माना जाता है। 20×44 फीट के छोटे कोर्ट पर खेला जाने वाला यह गेम हल्के पैडल और छेद वाली प्लास्टिक गेंद से खेला जाता है। सर्विस अंडरआर्म होती है और नियमों के अनुसार गेंद को सर्विस और रिसीव के बाद एक बार उछलना जरूरी होता है। नेट के पास बना नॉन-वॉली जोन या किचन इस खेल को तकनीकी रूप से और दिलचस्प बनाता है, जहां खिलाड़ी हवा में शॉट नहीं खेल सकते।
दो कोर्ट से 50+ तक का सफर : साल 2024 में लखनऊ में यह खेल सिर्फ निशातगंज और डालीगंज के दो कोर्ट से शुरू हुआ था। लेकिन कुछ ही समय में यह गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, सुशांत गोल्फ सिटी, आशियाना और अलीगंज तक फैल गया। शहर में 50+ से ज्यादा पिकलबॉल कोर्ट सक्रिय हैं, जिन्हें निजी क्लब 400 से 1000 रुपये प्रति घंटे तक उपलब्ध करा रहे हैं।
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बढ़ती पहचान, बढ़ते खिलाड़ी : पिकलबॉल अब प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी उभर रहा है। लखनऊ के खिलाड़ी प्रतीक त्यागी और सना अस्थाना 2025 में बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं। वहीं, पैरा खिलाड़ी विवेक सिंह भी इस खेल में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। खेल विशेषज्ञों के मुताबिक पिकलबॉल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आने वाले समय में इसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मंच और संभवतः ओलंपिक तक भी पहुंच सकती है।
Iशुरुआती दौर में शहर में केवल दो से चार कोर्ट थे जो अब 50 से ज्यादा हैं। नियमित खिलाड़ियों की संख्या भी 600 से अधिक पहुंच चुकी है। पिकलबॉल को सीखना आसान है। कम तकनीकी कौशल के बावजूद कोई भी जल्द खेलना शुरू कर सकता है। यह बेहद रोमांचक खेल है। - अंशुल गर्ग, सचिव, पिकलबॉल एसोसिएशन ऑफ लखनऊI
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टेनिस, बैडमिंटन और टेबल टेनिस का मिश्रण माने जाने वाले पिकलबॉल को सीखना आसान माना जाता है। 20×44 फीट के छोटे कोर्ट पर खेला जाने वाला यह गेम हल्के पैडल और छेद वाली प्लास्टिक गेंद से खेला जाता है। सर्विस अंडरआर्म होती है और नियमों के अनुसार गेंद को सर्विस और रिसीव के बाद एक बार उछलना जरूरी होता है। नेट के पास बना नॉन-वॉली जोन या किचन इस खेल को तकनीकी रूप से और दिलचस्प बनाता है, जहां खिलाड़ी हवा में शॉट नहीं खेल सकते।
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दो कोर्ट से 50+ तक का सफर : साल 2024 में लखनऊ में यह खेल सिर्फ निशातगंज और डालीगंज के दो कोर्ट से शुरू हुआ था। लेकिन कुछ ही समय में यह गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, सुशांत गोल्फ सिटी, आशियाना और अलीगंज तक फैल गया। शहर में 50+ से ज्यादा पिकलबॉल कोर्ट सक्रिय हैं, जिन्हें निजी क्लब 400 से 1000 रुपये प्रति घंटे तक उपलब्ध करा रहे हैं।
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बढ़ती पहचान, बढ़ते खिलाड़ी : पिकलबॉल अब प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी उभर रहा है। लखनऊ के खिलाड़ी प्रतीक त्यागी और सना अस्थाना 2025 में बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं। वहीं, पैरा खिलाड़ी विवेक सिंह भी इस खेल में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। खेल विशेषज्ञों के मुताबिक पिकलबॉल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आने वाले समय में इसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मंच और संभवतः ओलंपिक तक भी पहुंच सकती है।
Iशुरुआती दौर में शहर में केवल दो से चार कोर्ट थे जो अब 50 से ज्यादा हैं। नियमित खिलाड़ियों की संख्या भी 600 से अधिक पहुंच चुकी है। पिकलबॉल को सीखना आसान है। कम तकनीकी कौशल के बावजूद कोई भी जल्द खेलना शुरू कर सकता है। यह बेहद रोमांचक खेल है। - अंशुल गर्ग, सचिव, पिकलबॉल एसोसिएशन ऑफ लखनऊI