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घनी आबादी पर भी पुराने लखनऊ में कोरोना का प्रकोप कम
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। भीड़ और कोरोना एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं। इसके बावजूद घनी आबादी वाले पुराने लखनऊ में संक्र्रमण के मामले अलीगंज, इंदिरानगर और गोमतीनगर जैसे क्षेत्रों के मुकाबले काफी कम रहे हैं। विशेषज्ञ इसकी वजह जागरूकता की कमी से टेस्टिंग न कराना बता रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग हर्ड इम्युनिटी विकसित होने को कारण बता रहा है। वजह कुछ भी हो, पर संक्रमण के मामलों में कमी से पुराने लखनऊ में माहौल अपेक्षाकृत बेहतर रहा है।
लखनऊ में अब तक कोरोना के कुल दो लाख 38 हजार के करीब केस मिल चुके हैं। इनमें से दो लाख 35 हजार स्वस्थ हो चुके हैं और करीब 2500 की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को 18 भागों में बांटा है। हर भाग में टेस्टिंग के लक्ष्य भी तय किए गए हैं। करीब दो लाख 35 हजार केस का क्षेत्रवार वर्गीकरण किया गया है। इसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्र को जाने दें तो शहर में सबसे ज्यादा मामले अलीगंज में मिले हैं। इसके बाद चिनहट और आलमबाग का नंबर आता है। वहीं, पुराने लखनऊ में टुड़ियागंज के साथ चौक, नक्खास, चौपटिया तथा ठाकुरगंज आदि इलाकों को कवर करने वाले सिल्वर जुबिली, ऐशबाग टेस्टिंग केंद्र पर मिले पॉजीटिव केस की संख्या कम रही है।
अलीगंज रहा पहले स्थान पर
राजधानी में संक्रमण के लिहाज से अलीगंज कितना खतरनाक रहा, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कुल मामलों में से 20 फीसदी से ज्यादा इसी क्षेत्र के थे। इसके बाद चिनहट में करीब 15 तथा आलमबाग में 14 फीसदी मामले मिले। वहीं, ऐशबाग में 2.59, टुड़ियागंज में छह, सिल्वर जुबिली में नौ तथा नाका क्षेत्र में छह फीसदी केस मिले। लखनऊ से सटे सरोजनीनगर इलाके में कोरोना केस की संख्या काफी ज्यादा रही। यहां तक कि कैसरबाग और ऐशबाग के मुकाबले यहां केस की संख्या ज्यादा रही। यहां कुल केस में से करीब छह फीसदी केस मिले।
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घने इलाकोें विकसित हो जाती है हर्ड इम्युनिटी
सीएमओ का कहना है कि क्षेत्र के हिसाब से संक्रमण के केस का आकलन किया गया है। सभी क्षेत्र में संक्रमण रोकने के लिए काफी टेस्टिंग की गई। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि जहां कम केस मिलेे हैं उनकी वजह कम टेस्ंिटग है। असल में घने इलाकों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है। संभवत: पुराने लखनऊ में इसी कारण केस की संख्या कम रही है।
जागरूकता की कमी होगी कम केस की वजह
डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि कोरोना भीड़ में फैलता है। पुराने लखनऊ में कम केस मिलने की वजह जागरूकता और जनचेतना की कमी हो सकती है। 80 फीसदी से ज्यादा मरीज लक्षणविहीन थे। हो सकता है कि यहां लोगों ने टेस्ट कम कराए हों और इसी वजह से यहां केस की जानकारी कम हो सकी है।
क्षेत्र- संक्रमित - प्रतिशत में केस
अलीगंज - 47 हजार- 20.21
चिनहट- 35 हजार-14.87
आलमबाग- 33 हजार-14.17
इंदिरानगर- 29 हजार-12.30
सिल्वर जुबिली- 20 हजार- 8.83
टुड़ियागंज- 19 हजार- 6.23
एनके रोड- 14 हजार- 6.01
सरोजनीनगर- 13 हजार- 5.85
रेडक्रॉस- 10 हजार-4.26
ऐशबाग- 6 हजार- 2.59
मोहनलालगंज- 1.8 हजार- 0.80
मलिहाबाद- 1.7 हजार- 0.75
गोसाईंगंज- 1.7 हजार- 0.72
काकोरी- 1.5 हजार- 0.70
बीकेटी- 1.4 हजार- 0.64
गुडंबा- 1.1 हजार- 0.50
माल- .75 हजार- 0.32
इटौंजा- .60 हजार- 0.25
नोट- केसों की संख्या लगभग में है।
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लखनऊ। भीड़ और कोरोना एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं। इसके बावजूद घनी आबादी वाले पुराने लखनऊ में संक्र्रमण के मामले अलीगंज, इंदिरानगर और गोमतीनगर जैसे क्षेत्रों के मुकाबले काफी कम रहे हैं। विशेषज्ञ इसकी वजह जागरूकता की कमी से टेस्टिंग न कराना बता रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग हर्ड इम्युनिटी विकसित होने को कारण बता रहा है। वजह कुछ भी हो, पर संक्रमण के मामलों में कमी से पुराने लखनऊ में माहौल अपेक्षाकृत बेहतर रहा है।
लखनऊ में अब तक कोरोना के कुल दो लाख 38 हजार के करीब केस मिल चुके हैं। इनमें से दो लाख 35 हजार स्वस्थ हो चुके हैं और करीब 2500 की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को 18 भागों में बांटा है। हर भाग में टेस्टिंग के लक्ष्य भी तय किए गए हैं। करीब दो लाख 35 हजार केस का क्षेत्रवार वर्गीकरण किया गया है। इसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्र को जाने दें तो शहर में सबसे ज्यादा मामले अलीगंज में मिले हैं। इसके बाद चिनहट और आलमबाग का नंबर आता है। वहीं, पुराने लखनऊ में टुड़ियागंज के साथ चौक, नक्खास, चौपटिया तथा ठाकुरगंज आदि इलाकों को कवर करने वाले सिल्वर जुबिली, ऐशबाग टेस्टिंग केंद्र पर मिले पॉजीटिव केस की संख्या कम रही है।
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अलीगंज रहा पहले स्थान पर
राजधानी में संक्रमण के लिहाज से अलीगंज कितना खतरनाक रहा, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कुल मामलों में से 20 फीसदी से ज्यादा इसी क्षेत्र के थे। इसके बाद चिनहट में करीब 15 तथा आलमबाग में 14 फीसदी मामले मिले। वहीं, ऐशबाग में 2.59, टुड़ियागंज में छह, सिल्वर जुबिली में नौ तथा नाका क्षेत्र में छह फीसदी केस मिले। लखनऊ से सटे सरोजनीनगर इलाके में कोरोना केस की संख्या काफी ज्यादा रही। यहां तक कि कैसरबाग और ऐशबाग के मुकाबले यहां केस की संख्या ज्यादा रही। यहां कुल केस में से करीब छह फीसदी केस मिले।
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घने इलाकोें विकसित हो जाती है हर्ड इम्युनिटी
सीएमओ का कहना है कि क्षेत्र के हिसाब से संक्रमण के केस का आकलन किया गया है। सभी क्षेत्र में संक्रमण रोकने के लिए काफी टेस्टिंग की गई। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि जहां कम केस मिलेे हैं उनकी वजह कम टेस्ंिटग है। असल में घने इलाकों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है। संभवत: पुराने लखनऊ में इसी कारण केस की संख्या कम रही है।
जागरूकता की कमी होगी कम केस की वजह
डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि कोरोना भीड़ में फैलता है। पुराने लखनऊ में कम केस मिलने की वजह जागरूकता और जनचेतना की कमी हो सकती है। 80 फीसदी से ज्यादा मरीज लक्षणविहीन थे। हो सकता है कि यहां लोगों ने टेस्ट कम कराए हों और इसी वजह से यहां केस की जानकारी कम हो सकी है।
क्षेत्र- संक्रमित - प्रतिशत में केस
अलीगंज - 47 हजार- 20.21
चिनहट- 35 हजार-14.87
आलमबाग- 33 हजार-14.17
इंदिरानगर- 29 हजार-12.30
सिल्वर जुबिली- 20 हजार- 8.83
टुड़ियागंज- 19 हजार- 6.23
एनके रोड- 14 हजार- 6.01
सरोजनीनगर- 13 हजार- 5.85
रेडक्रॉस- 10 हजार-4.26
ऐशबाग- 6 हजार- 2.59
मोहनलालगंज- 1.8 हजार- 0.80
मलिहाबाद- 1.7 हजार- 0.75
गोसाईंगंज- 1.7 हजार- 0.72
काकोरी- 1.5 हजार- 0.70
बीकेटी- 1.4 हजार- 0.64
गुडंबा- 1.1 हजार- 0.50
माल- .75 हजार- 0.32
इटौंजा- .60 हजार- 0.25
नोट- केसों की संख्या लगभग में है।