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बिजली संकट से बचने को लेसा ने लिया स्ट्रीट लाइटों का सहारा
प्रवेंद्र/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 16 Jun 2014 03:34 AM IST
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बढ़ते बिजली संकट से निपटने के लिए फिलहाल लेसा को स्ट्रीट लाइटों का सहारा नजर आ रहा है।
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तभी तो लेसा के अधीक्षण अभियंता ने पत्र लिखकर इन्हें जलाने-बुझाने के समय में बदलाव करने को कहा है।
इसके बाद नगर निगम ने मार्ग प्रकाश के ऑन-ऑफ का समय बदल कर 12 के बजाय 10 घंटे कर दिया है।
नए समय के अनुसार स्ट्रीट लाइटों को जलाने और बुझाने का काम शुरू भी कर दिया गया है।
नए समय के तहत स्ट्रीट लाइटें शाम सात बजे जलाई जाएंगी और सुबह पांच बजे बंद कर दी जाएंगी।
रात में मेन सड़कों के अलावा कॉलोनियों और मोहल्लों की सड़कों को रोशन करने के लिए नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग ने करीब डेढ़ लाख स्ट्रीट लाइटें लगाई हैं।
इन पर हर माह करीब 16000 किलोवाट बिजली खर्च होती है। इसके लिए नगर निगम करीब 5 करोड़ रुपये बिजली बिल का भुगतान लेसा को करता है।
मीटर सिस्टम न होने के कारण स्ट्रीट लाइट का बिल यह मानकर तैयार किया जाता है कि यह 12 घंटे जलती हैं।
आमतौर पर स्ट्रीट लाइटें शाम पांच बजे जलाई जाती हैं और सुबह पांच बजे बंद की जाती हैं।
लेकिन बिजली की किल्लत को देखते हुए गर्मी में यह समय बदल दिया गया है। अब स्ट्रीट लाइटें शाम सात बजे जलाई जाएंगी और सुबह पंाच बजे बंद की जाएंगी।
शहर की करीब डेढ़ लाख स्ट्रीट लाइटों को जलाने के लिए नगर निगम ने 125 स्वीच मैन तैनात किए हैं। एक स्वीच मैन के पास करीब 20 स्वीच जलाने का काम होता है।
ऐसे में जब स्वीच मैन समय से पहले जलाने का काम शुरू करता है तो वह समय से करीब आधा पौन घंटे बाद तक स्ट्रीट लाइटों को जलाने का काम पूरा कर पाता है।
स्ट्रीट लाइटों के जलाने की कोई ऑटोमैटिक व्यवस्था न होने से स्वीच मैन के भरोसे ही पूरी व्यवस्था चल रही है।
लेसा के अधीक्षण अभियंता एसके वर्मा का कहना है कि स्ट्रीट लाइटों को नए समय जलाने-बुझाने के लिए कहा गया है।
इसके साथ ही यह सुझाव भी दिया है कि यदि रात 12 बजे के बाद मेन रोड पर जहां दोनों तरफ स्ट्रीट लाइट हैं उन्हें एक-एक के अंतराल पर बंद करने की व्यवस्था की जाए तो इससे काफी बिजली की बचत होगी।
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