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बिजली मीटर का संकट : प्रीपेड कनेक्शन का आवेदन...मिल रहा पोस्टपेड
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यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन एडवांस लेने के बाद भी आवेदकों को प्रीपेड मीटर मुहैया नहीं करा पा रहा है। करीब छह माह से प्रीपेड बिजली मीटरों का अकाल है। बिजली विभाग के अभियंताओं को शासन के आदेश का पालन करने के लिए प्रीपेड के आवेदकों को पोस्टपेड मीटर लगाकर बिजली मुहैया करानी पड़ रही है।
शासन ने अपने आदेश में कहा था कि रिहायशी व व्यावसायिक मल्टी स्टोरी, सरकारी कॉलोनियों आदि में प्रीपेड मीटर के जरिये ही कनेक्शन दिए जाएं। पर, छह माह से प्रीपेड कनेक्शन के आवेदनों के मुकाबले प्रबंधन मीटरों का इंतजाम नहीं कर पा रहा है। आवेदकों को जब एक से दो माह तक शुल्क जमा करने के बाद कनेक्शन नहीं मिल सके तो शक्ति भवन तक हो-हल्ला मचना शुरू हुआ। इससे जागे मध्यांचल निगम ने सितंबर 2022 में पोस्टपेड मीटर लगाकर प्रीपेड कनेक्शन देने के आदेश दिए। मगर, इस मीटर को लगाने से पहले अधीक्षण अभियंता से प्रशासनिक रजामंदी लेनी पड़ रही है।
स्मार्ट मीटर का भी अभाव
लखनऊ में कुछ अभियंता प्रीपेड कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं। जिन अभियंताओं के पास स्मार्ट मीटर का स्टॉक है, वे ऐसा कर रहे हैं। दरअसल, स्मार्ट मीटर में विकल्प होता कि उसे सुविधा के आधार पर प्रीपेड एवं पोस्टपेड कर सकते हैं। मगर, कुछ जगहों पर यह स्मार्ट मीटर काम नहीं कर पा रहा है।दरअसल, ऊंचाई एवं कमरे के भीतर स्मार्ट मीटर लगने के कारण नेटवर्क नहीं मिल पाता, जिससे इसकी रीडिंग भी मैनुअल लेनी पड़ रही है।
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सात दिन में कनेक्शन देने की अनिवार्यता, 15 दिन में भी नहीं मिल रहा
शहर का ऐसा कोई उपकेंद्र नहीं, जिस पर आए दिन आवेदकों का जेई पर गुस्सा न फूट रहा हो। वजह सात दिन में कनेक्शन देने की अनिवार्यता के बावजूद 15 दिन में इंजीनियर कनेक्शन नहीं दे पा रहे हैं। जेई ऐसे प्रीपेड कनेक्शन पर पोस्टपेड मीटर लगाने के लिए एक्सईएन कार्यालय से अधीक्षण अभियंता कार्यालय तक जूझ रहे हैं।
प्रीपेड मीटर नहीं... मगर कनेक्शन दे रहेमध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी भवानी सिंह खंगारौत कहते हैं, यह बात सही है कि प्रीपेड मीटर नहीं हैं। पर, प्रीपेड मीटर न होने के कारण आवेदकों को कनेक्शन दिए जाने में कोई व्यवधान नहीं है। ऐसे प्रीपेड कनेक्शन को पोस्टपेड मीटर से दे रहे हैं।
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शासन ने अपने आदेश में कहा था कि रिहायशी व व्यावसायिक मल्टी स्टोरी, सरकारी कॉलोनियों आदि में प्रीपेड मीटर के जरिये ही कनेक्शन दिए जाएं। पर, छह माह से प्रीपेड कनेक्शन के आवेदनों के मुकाबले प्रबंधन मीटरों का इंतजाम नहीं कर पा रहा है। आवेदकों को जब एक से दो माह तक शुल्क जमा करने के बाद कनेक्शन नहीं मिल सके तो शक्ति भवन तक हो-हल्ला मचना शुरू हुआ। इससे जागे मध्यांचल निगम ने सितंबर 2022 में पोस्टपेड मीटर लगाकर प्रीपेड कनेक्शन देने के आदेश दिए। मगर, इस मीटर को लगाने से पहले अधीक्षण अभियंता से प्रशासनिक रजामंदी लेनी पड़ रही है।
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स्मार्ट मीटर का भी अभाव
लखनऊ में कुछ अभियंता प्रीपेड कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं। जिन अभियंताओं के पास स्मार्ट मीटर का स्टॉक है, वे ऐसा कर रहे हैं। दरअसल, स्मार्ट मीटर में विकल्प होता कि उसे सुविधा के आधार पर प्रीपेड एवं पोस्टपेड कर सकते हैं। मगर, कुछ जगहों पर यह स्मार्ट मीटर काम नहीं कर पा रहा है।दरअसल, ऊंचाई एवं कमरे के भीतर स्मार्ट मीटर लगने के कारण नेटवर्क नहीं मिल पाता, जिससे इसकी रीडिंग भी मैनुअल लेनी पड़ रही है।
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सात दिन में कनेक्शन देने की अनिवार्यता, 15 दिन में भी नहीं मिल रहा
शहर का ऐसा कोई उपकेंद्र नहीं, जिस पर आए दिन आवेदकों का जेई पर गुस्सा न फूट रहा हो। वजह सात दिन में कनेक्शन देने की अनिवार्यता के बावजूद 15 दिन में इंजीनियर कनेक्शन नहीं दे पा रहे हैं। जेई ऐसे प्रीपेड कनेक्शन पर पोस्टपेड मीटर लगाने के लिए एक्सईएन कार्यालय से अधीक्षण अभियंता कार्यालय तक जूझ रहे हैं।
प्रीपेड मीटर नहीं... मगर कनेक्शन दे रहेमध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी भवानी सिंह खंगारौत कहते हैं, यह बात सही है कि प्रीपेड मीटर नहीं हैं। पर, प्रीपेड मीटर न होने के कारण आवेदकों को कनेक्शन दिए जाने में कोई व्यवधान नहीं है। ऐसे प्रीपेड कनेक्शन को पोस्टपेड मीटर से दे रहे हैं।