लखनऊ में घनी आबादी के बीच बने विशेष बच्चों के स्कूल संत फ्रांसिस में घुसे तेंदुए ने शनिवार को आठ घंटे तक दहशत मचाए रखी। ठाकुरगंज स्थित इस स्कूल में घुसे तेंदुए को परिसर में देखकर पूरा स्टाफ भयभीत हो गया। सूचना मिलने पर पहुंची लखनऊ जू की रैपिड रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद शाम करीब साढ़े 5:30 बजे तेंदुए को ट्रैंकुलाइज कर काबू किया। उसे काबू में करने के लिए दो डॉट्स से ट्रैंकुलाइज करना पड़ा। शाम करीब सवा 6 बजे उसे लखनऊ जू स्थित अस्पताल भेज दिया गया। राहत की बात यह रही कि जिस वक्त स्कूल में तेंदुआ घुसा, हॉस्टल में करीब 60 छात्र और दर्जन भर स्कूली स्टाफ थे, लेकिन सभी सुरक्षित हैं।
आठ घंटे तक दहशत मचाए रहा स्कूल में घुसा तेंदुआ, ट्रेंकुलाइज कर काबू पाया, देखें तस्वीरें
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जंगल से भटककर स्कूल में घुसे तेंदुए को सबसे पहले स्कूल की सिस्टर ऐनेथ ने सुबह 10:11 बजे देखा। तेंदुआ लॉन में चहलकदमी कर रहा था। सिस्टर ने प्रिंसिपल को इसकी जानकारी दी, फिर पुलिस को बताया गया। सबसे पहले हॉस्टल में रह रहे बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पुलिस से सूचना पाकर डीएफओ अवध मनोज कुमार सोनकर वन विभाग के रेंजर्स और कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। तेंदुए के पगमार्क बेसमेंट की ओर जा रहे थे। बेसमेंट में हलचल दिखी तो उसका गेट ब्लॉक कर विभाग के आला अफसरों को सूचना देने के साथ लखनऊ जू के विशेषज्ञों से मदद मांगी गई।
4 घंटे लग गए काबू करने में, बेसमेंट की छत में करना पड़ा छेद
दोपहर करीब डेढ़ बजे पहुंची लखनऊ जू की टीम ने डिप्टी डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष शुक्ला की अगुवाई में रेस्क्यू शुरू किया। तेंदुआ 20 मिनट में ही ट्रैक हो गया, लेकिन अंधेरे के चलते करीब हजार स्क्वॉयर फीट में बने बेसमेंट में कबाड़ के बीच छिपा रहा। इस दौरान हिंसक हुए तेंदुए ने बेसमेंट में रखे सामानों से खुद को घायल कर लिया। उसे ट्रैंकुलाइज करने के लिए टीम को बेसमेंट की छत में ड्रिल करना पड़ा।
तेंदुए ने हैलोजन तोड़ा
बेसमेंट में तेंदुए को ट्रैस करने के लिए हैलोजन की व्यवस्था करनी पड़ी। तेेंदुए ने उसे तोड़ डाला। तब छत में छेद कर ट्रैंकुलाइज करना पड़ा।
स्कूल में सेकंड सैटरडे की छुट्टी ने बड़ी अनहोनी से बचा लिया। स्कूल स्टाफ के अनुसार परिसर में जिस जगह पर तेंदुआ टहलकदमी कर रहा था, आम दिनों में वहां करीब सवा सौ बच्चे पढ़ाई कर रहे होते। छुट्टी होने की वजह से सिर्फ हॉस्टल के ही बच्चे थे और वे भी कमरों में थे।
ठीक से खाना भी नहीं खा पाए बच्चे
हॉस्टल में रह रहे बच्चे भले ही कुछ बोल या सुन न पा रहे थे लेकिन उनके चेहरे पर डर का माहौल साफ झलक रहा था। बच्चे काफी सहमे हुए थे। आशू और सोहन ने इशारों में बताया कि सिस्टर ने बताया कि परिसर में तेंदुआ घुस आया है। उसके बाद उन्होंने हॉस्टल के कमरों को बाहर से बंद कर दिया। बच्चे अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर मैदान का नजारा देख रहे थे। सुबह जब वे नाश्ता कर रहे थे तो इस बात का इल्म नहीं था कि ऐसी कोई घटना भी हो जाएगी। दोपहर एक बजे बच्चों के खाना खाने का समय होता है, लेकिन बच्चों ने ठीक से खाना भी नहीं खाया। कई बच्चे तो इतने डरे हुए थे कि उन्होंने दो बजे के बाद खाना खाया।