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अब आवेदक के घर जाकर लेखपाल निपटाएंगे वरासत के मामले
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अब आवेदक के घर जाकर लेखपाल निपटाएंगे वरासत के मामले
लखनऊ। अविवादित वरासत से जुड़े मामले निस्तारित कराने की जिम्मेदारी अब लेखपालों की होगी। इसके लिए उन्हें परिवार के मुखिया की मौत के बाद खुद आवेदक के घर पहुंचकर वरासत बदलने की प्रक्रिया को पूरा कराना होगा। साथ ही खतौनी की सत्यापित नकल की कॉपी भी उपलब्ध कराना होगी। इससे घर के मुखिया की मौत के बाद परिवारीजनों को वरासत दर्ज कराने के लिए तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
यह जानकारी देते हुए एडीएम प्रशासन एसपी गुप्ता ने बताया कि प्रशासन अविवादित वरासत के लंबित प्रकरणों को समयबद्ध स्तर पर निस्तारित कराने के लिए पांचों तहसीलों में विशेष अभियान चलाएगा। 31 जुलाई तक संचालित अभियान की समाप्ति के बाद सभी एसडीएम को लेखपालों की रिपोर्ट के आधार पर अपने तहसील क्षेत्र में अविवादित वरासत के एक भी मामले लंबित न होने का शपथपत्र भी जिलाधिकारी को देना होगा।
लंबित मामले निस्तारण के निर्देश
शासन की नाराजगी के बाद डीएम ने जिले की सभी पांच तहसीलों के एसडीएम व लेखपालों को वरासत के लंबित दो हजार से अधिक मामले इस माह के अंत तक निस्तारित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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लेखपाल की भी जिम्मेदारी तय
एडीएम प्रशासन ने बताया कि अभी तक ऐसे भी मामले सामने आते थे जिनमें किसान के जीवित होने के बावजूद भूमि की वरासत किसी दूसरे के नाम दर्ज हो जाती थी। ऐसे में स्वामित्व के बाद भी भू-स्वामी को अपनी ही जमीन के लिए मुकदमा लड़ना पड़ता था। अब वरासत के मामलों में आश्रित यानी कि आवेदनकर्ता के साथ ही वरासत दर्ज करने वाले लेखपाल की भी सीधी जिम्मेदारी तय होगी।
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अब आवेदक के घर जाकर लेखपाल निपटाएंगे वरासत के मामले
लखनऊ। अविवादित वरासत से जुड़े मामले निस्तारित कराने की जिम्मेदारी अब लेखपालों की होगी। इसके लिए उन्हें परिवार के मुखिया की मौत के बाद खुद आवेदक के घर पहुंचकर वरासत बदलने की प्रक्रिया को पूरा कराना होगा। साथ ही खतौनी की सत्यापित नकल की कॉपी भी उपलब्ध कराना होगी। इससे घर के मुखिया की मौत के बाद परिवारीजनों को वरासत दर्ज कराने के लिए तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
यह जानकारी देते हुए एडीएम प्रशासन एसपी गुप्ता ने बताया कि प्रशासन अविवादित वरासत के लंबित प्रकरणों को समयबद्ध स्तर पर निस्तारित कराने के लिए पांचों तहसीलों में विशेष अभियान चलाएगा। 31 जुलाई तक संचालित अभियान की समाप्ति के बाद सभी एसडीएम को लेखपालों की रिपोर्ट के आधार पर अपने तहसील क्षेत्र में अविवादित वरासत के एक भी मामले लंबित न होने का शपथपत्र भी जिलाधिकारी को देना होगा।
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लंबित मामले निस्तारण के निर्देश
शासन की नाराजगी के बाद डीएम ने जिले की सभी पांच तहसीलों के एसडीएम व लेखपालों को वरासत के लंबित दो हजार से अधिक मामले इस माह के अंत तक निस्तारित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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लेखपाल की भी जिम्मेदारी तय
एडीएम प्रशासन ने बताया कि अभी तक ऐसे भी मामले सामने आते थे जिनमें किसान के जीवित होने के बावजूद भूमि की वरासत किसी दूसरे के नाम दर्ज हो जाती थी। ऐसे में स्वामित्व के बाद भी भू-स्वामी को अपनी ही जमीन के लिए मुकदमा लड़ना पड़ता था। अब वरासत के मामलों में आश्रित यानी कि आवेदनकर्ता के साथ ही वरासत दर्ज करने वाले लेखपाल की भी सीधी जिम्मेदारी तय होगी।