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लेखपाल संघ महामंत्री सहित 200 बर्खास्त, 38 सवंर्ग मांगों के समर्थन में
Fri, 20 Dec 2019 10:29 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 20 Dec 2019 10:29 PM IST
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बर्खास्त
- फोटो : अमर उजाला
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लेखपालों के आंदोलन पर सख्ती के बीच सरकार ने लेखपाल संघ के महामंत्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव को एक दिन पहले निलंबन के बाद उनके सहित करीब 200 लेखपालों को बर्खास्त कर दिया है। लेकिन लेखपाल जिलों में प्रशासन की दमनात्मक कार्रवाई से बेफिक्र आंदोलन पर डटे हुए हैं।
इधर, करीब 38 कर्मचारी संवर्गों ने एक बैठक कर सरकार को चेतावनी दी कि वह लेखपाल संघ के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई रोककर तत्काल वार्ता कर मांगों पर शासनादेश जारी करे, वरना वे लोग लेखपालों के धरने में शामिल होकर विरोध में शामिल हो जाएंगे। शुक्रवार को जिलों में लेखपाल संघ के पदाधिकारियों व लेखपालों के खिलाफ चेतावनी, नोटिस व निलंबन से आगे की कार्रवाई तेज की गई।
बृहस्पतिवार को लेखपाल संघ के महामंत्री को निलंबित किया गया था। अब उनकेसाथ करीब 200 लेखपालों को अलग-अलग जिलों में बर्खास्त कर दिया गया है। इधर, लखनऊ में करीब 38 कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने एक सामूहिक बैठक की। इसमें चरणबद्ध तरीके से शांतिपूर्वक आंदोलनरत लेखपालों की जायज मांगों पर समय से वार्ता कर कार्यवाही की जगह निलंबन, बर्खास्तगी, सर्विस ब्रेक व एफआईआर जैसी कार्यवाही की निंदा की गई।
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इस बैठक में सभी प्रमुख कर्मचारी संगठन शामिल थे। संगठन नेताओं ने लेखपाल आंदोलन को समाप्त कराने के लिए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने संघ के साथ वार्ता कर मांगों पर कार्रवाई कराने और की गई कार्रवाई समाप्त करने का आग्रह किया है।
नेताओं ने कहा कि यदि सरकार दमनात्मक कार्रवाई जारी रखेगी तो वे लोग अपने-अपने संवर्गों के साथ जिलावार लेखपाल संघ के आंदोलन में शामिल होना शुरू कर देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
प्रदेश की स्थिति के मद्देनजर धरना-प्रदर्शन में एहतियात बरतें
लेखपाल संघ ने नए नागरिकता कानून के मद्देनजर समस्त जिला इकाइयों को निर्देशित किया है कि वे अपने आंदोलन में आवश्यक एहतियात बरतें। संघ के महामंत्री ने कहा है कि लेखपाल संवर्ग एक अनुशासित कर्मचारी संवर्ग है और प्रशासन का महत्वपूर्ण अंग है। यह संवर्ग हमेशा शांति व्यवस्था सहित समस्त दायित्वों में सहयोग प्रदान करता रहा है।
ऐसे में नए कानून के खिलाफ विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन की वजह से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण है। ऐसे में स्थानीय संगठन जहां आवश्यक समझें धरना स्थल व धरना के समय में बदलाव कर सकते हैं। सोमवार से पूर्व व्यवस्था अनुसार धरना जारी रहेगा।
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इधर, करीब 38 कर्मचारी संवर्गों ने एक बैठक कर सरकार को चेतावनी दी कि वह लेखपाल संघ के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई रोककर तत्काल वार्ता कर मांगों पर शासनादेश जारी करे, वरना वे लोग लेखपालों के धरने में शामिल होकर विरोध में शामिल हो जाएंगे। शुक्रवार को जिलों में लेखपाल संघ के पदाधिकारियों व लेखपालों के खिलाफ चेतावनी, नोटिस व निलंबन से आगे की कार्रवाई तेज की गई।
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बृहस्पतिवार को लेखपाल संघ के महामंत्री को निलंबित किया गया था। अब उनकेसाथ करीब 200 लेखपालों को अलग-अलग जिलों में बर्खास्त कर दिया गया है। इधर, लखनऊ में करीब 38 कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने एक सामूहिक बैठक की। इसमें चरणबद्ध तरीके से शांतिपूर्वक आंदोलनरत लेखपालों की जायज मांगों पर समय से वार्ता कर कार्यवाही की जगह निलंबन, बर्खास्तगी, सर्विस ब्रेक व एफआईआर जैसी कार्यवाही की निंदा की गई।
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इस बैठक में सभी प्रमुख कर्मचारी संगठन शामिल थे। संगठन नेताओं ने लेखपाल आंदोलन को समाप्त कराने के लिए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने संघ के साथ वार्ता कर मांगों पर कार्रवाई कराने और की गई कार्रवाई समाप्त करने का आग्रह किया है।
नेताओं ने कहा कि यदि सरकार दमनात्मक कार्रवाई जारी रखेगी तो वे लोग अपने-अपने संवर्गों के साथ जिलावार लेखपाल संघ के आंदोलन में शामिल होना शुरू कर देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
प्रदेश की स्थिति के मद्देनजर धरना-प्रदर्शन में एहतियात बरतें
लेखपाल संघ ने नए नागरिकता कानून के मद्देनजर समस्त जिला इकाइयों को निर्देशित किया है कि वे अपने आंदोलन में आवश्यक एहतियात बरतें। संघ के महामंत्री ने कहा है कि लेखपाल संवर्ग एक अनुशासित कर्मचारी संवर्ग है और प्रशासन का महत्वपूर्ण अंग है। यह संवर्ग हमेशा शांति व्यवस्था सहित समस्त दायित्वों में सहयोग प्रदान करता रहा है।
ऐसे में नए कानून के खिलाफ विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन की वजह से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण है। ऐसे में स्थानीय संगठन जहां आवश्यक समझें धरना स्थल व धरना के समय में बदलाव कर सकते हैं। सोमवार से पूर्व व्यवस्था अनुसार धरना जारी रहेगा।