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दस साल में नहीं बचे पाए विराजखंड के 32 फ्लैट, फाइल जरूर खोई
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विराजखंड में बने 32 फ्लैट बेचने में आनाकानी कर रहा एलडीए। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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एलडीए ने 2010-11 में गोमतीनगर के विराजखंड की प्राइम लोकेशन पर 32 फ्लैट बनाए। सात साल तक 32 फ्लैटों वाली बिल्डिंग लावारिस रही। 2018 में इन्हें बेचने की याद आई।
तीन साल तक कवायद के बाद चार वीसी इन फ्लैट को बेचने के लिए पंजीकरण तक नहीं खोल पाए। अब, फ्लैटों की बिक्री व निर्माण से जुड़ी फाइलें ही गायब हैं।
32 फ्लैट किसी की निगाह में न आएं। इसके लिए वहां सामने ही बनीं 33 दुकानों को भी नीलामी में एलडीए के अधिकारी नहीं बेचने दे रहे हैं।
कोई न कोई बहाना बनाकर इन फ्लैटों की बिक्री को रोका जाता है। कभी नंबर प्लान तो कभी बिल्डिंग में सुधार के जरूरी काम कराए जाने के नाम पर इसे बेचने से रोका गया।
अब अफसरों व इंजीनियरों का नया कारनामा सामने आया है कि पंजीकरण खोलने के लिए शुरू कराई गई फाइल ही गायब है। बिल्डिंग के निर्माण और भुगतान से जुड़ी फाइलें पहले ही गायब हैं।
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आखिर क्या घपला किए, जिस पर डाल रहे पर्दा?
ऐसे में अब यही सवाल खड़ा होता है कि आखिर कौन सा भ्रष्टाचार या कारनामा बिल्डिंग बनाने में किया गया है कि इसे बेचने ही नहीं दिया जा रहा है? आखिर किसने फ्लैटों को बेचने के लिए बनी फाइल को गायब कराया है?
चार वीसी के आदेश भी हुए फेल
- प्रभु एन सिंह, फ्लैटों की कॉस्टिंग कराई, लेकिन उनके जाते ही फाइल डंप।
- शिवाकांत द्विवेदी, फाइल निकलवाकर नंबर प्लान बनवाया, उनके जाते ही फाइल डंप।
- अभिषेक प्रकाश, फाइल के साथ जिम्मेदार तलब कर पंजीकरण खोलने को कहा, उनके जाते ही फाइल डंप।
- अक्षय त्रिपाठी, प्रकरण में खुद सचिव को भेजकर निरीक्षण कराया, निर्माण में डेप्रीसिएशन लगा बेचने का आदेश हुआ, लेकिन बाद में फाइल ही गायब हो गई।
अभियंत्रण जोन से मांगी गई फाइल
अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने अब अभियंत्रण जोन-1 से 32 फ्लैटों की फाइल संपत्ति विभाग को उपलब्ध कराने के लिए कहा है। इससे पहले भी अभियंत्रण जोन-1 को सात सितंबर 2021 को पत्र भेजा गया, लेकिन फाइल संपत्ति विभाग को नहीं मिली। इसी फाइल में लीज प्लान और जरूरी रिकॉर्ड हैं।
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तीन साल तक कवायद के बाद चार वीसी इन फ्लैट को बेचने के लिए पंजीकरण तक नहीं खोल पाए। अब, फ्लैटों की बिक्री व निर्माण से जुड़ी फाइलें ही गायब हैं।
32 फ्लैट किसी की निगाह में न आएं। इसके लिए वहां सामने ही बनीं 33 दुकानों को भी नीलामी में एलडीए के अधिकारी नहीं बेचने दे रहे हैं।
कोई न कोई बहाना बनाकर इन फ्लैटों की बिक्री को रोका जाता है। कभी नंबर प्लान तो कभी बिल्डिंग में सुधार के जरूरी काम कराए जाने के नाम पर इसे बेचने से रोका गया।
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अब अफसरों व इंजीनियरों का नया कारनामा सामने आया है कि पंजीकरण खोलने के लिए शुरू कराई गई फाइल ही गायब है। बिल्डिंग के निर्माण और भुगतान से जुड़ी फाइलें पहले ही गायब हैं।
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आखिर क्या घपला किए, जिस पर डाल रहे पर्दा?
ऐसे में अब यही सवाल खड़ा होता है कि आखिर कौन सा भ्रष्टाचार या कारनामा बिल्डिंग बनाने में किया गया है कि इसे बेचने ही नहीं दिया जा रहा है? आखिर किसने फ्लैटों को बेचने के लिए बनी फाइल को गायब कराया है?
चार वीसी के आदेश भी हुए फेल
- प्रभु एन सिंह, फ्लैटों की कॉस्टिंग कराई, लेकिन उनके जाते ही फाइल डंप।
- शिवाकांत द्विवेदी, फाइल निकलवाकर नंबर प्लान बनवाया, उनके जाते ही फाइल डंप।
- अभिषेक प्रकाश, फाइल के साथ जिम्मेदार तलब कर पंजीकरण खोलने को कहा, उनके जाते ही फाइल डंप।
- अक्षय त्रिपाठी, प्रकरण में खुद सचिव को भेजकर निरीक्षण कराया, निर्माण में डेप्रीसिएशन लगा बेचने का आदेश हुआ, लेकिन बाद में फाइल ही गायब हो गई।
अभियंत्रण जोन से मांगी गई फाइल
अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने अब अभियंत्रण जोन-1 से 32 फ्लैटों की फाइल संपत्ति विभाग को उपलब्ध कराने के लिए कहा है। इससे पहले भी अभियंत्रण जोन-1 को सात सितंबर 2021 को पत्र भेजा गया, लेकिन फाइल संपत्ति विभाग को नहीं मिली। इसी फाइल में लीज प्लान और जरूरी रिकॉर्ड हैं।