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सीजी सिटी को दोबारा से डिजाइन करेगा एलडीए
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सीजी सिटी को दोबारा डिजाइन करेगा एलडीए, बड़े आकार के भूखंडों के लिए प्राधिकरण को नहीं मिल रहे ग्राहक
सीजी सिटी की जमीनों का एलडीए दोबारा नियोजन करेगा। इसकी वजह यह है कि यहां विकसित पांच एकड़ या अधिक आकार के भूखंडों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।
इसके चलते वीसी ने पहले चरण में 25 प्रतिशत जमीन चिह्नित कर दोबारा से ले-आउट तैयार करने के लिए कहा है। यहां 10 हजार वर्गफीट से लेकर 50 हजार वर्गफीट के भूखंड विकसित किए जाएंगे।
एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश का कहना है कि सीजी सिटी में बड़ी संख्या में बड़े आकार के भूखंड हैं। इससे जहां एलडीए को भूखंड बेचने में दिक्कत आ रही है तो सीजी सिटी का विकास और उपयोग भी ठीक से नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में यह तय किया गया है कि 25 प्रतिशत भूखंड के आकार छोटे कर दिए जाएं। यहां ऑफिस या छोटे शॉपिंग कांप्लेक्स के लिए खरीदार को भूखंड खरीदने में सहूलियत हो जाएगी।
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इसकी वजह यह है कि अभी भूखंडों की आरक्षित कीमत ही 40 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक है। इन भूखंड को बड़ी कंपनियां या समूह ही खरीदने की क्षमता रखते हैं।
सीजी सिटी का उद्देश्य नहीं बदल रहे
वीसी ने साफ किया कि सीजी सिटी विकसित करने के पीछे बड़े ब्रांड समूह और संस्थानों को लखनऊ में जगह देना था। ऐसे में यहां सभी बड़े भूखंड खत्म नहीं किए जा रहे हैं। छोटे भूखंडों की बिक्री के साथ इनके लिए भी एलडीए ग्राहक तलाशेगा। इसके बाद भी भूखंड नहीं बिके तो इनके निस्तारण पर फैसला लिया जाएगा।
850 करोड़ के भूखंड नहीं बिक पा रहे
सीजी सिटी में एलडीए के 850 करोड़ रुपये के भूखंड नहीं बिक पा रहे हैं। पशुपालन विभाग की जमीन पर सीजी सिटी के विकास पर किए खर्च के बदले ये भूखंड प्राधिकरण को मिले थे। इनमें अधिकतर बड़े भूखंड हैं। एलडीए कई बार प्रयास के बाद भी सभी भूखंड नहीं बेच पाया। वर्ष 2016 से लगातार यहां भूखंड बेचने का प्रयास चल रहा है। भूखंड नहीं बिक पाने से एलडीए का निवेश वापस नहीं आ पा रहा है, जिससे दूसरी योजनाओं में विकास भी अटका है।
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सीजी सिटी की जमीनों का एलडीए दोबारा नियोजन करेगा। इसकी वजह यह है कि यहां विकसित पांच एकड़ या अधिक आकार के भूखंडों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।
इसके चलते वीसी ने पहले चरण में 25 प्रतिशत जमीन चिह्नित कर दोबारा से ले-आउट तैयार करने के लिए कहा है। यहां 10 हजार वर्गफीट से लेकर 50 हजार वर्गफीट के भूखंड विकसित किए जाएंगे।
एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश का कहना है कि सीजी सिटी में बड़ी संख्या में बड़े आकार के भूखंड हैं। इससे जहां एलडीए को भूखंड बेचने में दिक्कत आ रही है तो सीजी सिटी का विकास और उपयोग भी ठीक से नहीं हो पा रहा है।
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ऐसे में यह तय किया गया है कि 25 प्रतिशत भूखंड के आकार छोटे कर दिए जाएं। यहां ऑफिस या छोटे शॉपिंग कांप्लेक्स के लिए खरीदार को भूखंड खरीदने में सहूलियत हो जाएगी।
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इसकी वजह यह है कि अभी भूखंडों की आरक्षित कीमत ही 40 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक है। इन भूखंड को बड़ी कंपनियां या समूह ही खरीदने की क्षमता रखते हैं।
सीजी सिटी का उद्देश्य नहीं बदल रहे
वीसी ने साफ किया कि सीजी सिटी विकसित करने के पीछे बड़े ब्रांड समूह और संस्थानों को लखनऊ में जगह देना था। ऐसे में यहां सभी बड़े भूखंड खत्म नहीं किए जा रहे हैं। छोटे भूखंडों की बिक्री के साथ इनके लिए भी एलडीए ग्राहक तलाशेगा। इसके बाद भी भूखंड नहीं बिके तो इनके निस्तारण पर फैसला लिया जाएगा।
850 करोड़ के भूखंड नहीं बिक पा रहे
सीजी सिटी में एलडीए के 850 करोड़ रुपये के भूखंड नहीं बिक पा रहे हैं। पशुपालन विभाग की जमीन पर सीजी सिटी के विकास पर किए खर्च के बदले ये भूखंड प्राधिकरण को मिले थे। इनमें अधिकतर बड़े भूखंड हैं। एलडीए कई बार प्रयास के बाद भी सभी भूखंड नहीं बेच पाया। वर्ष 2016 से लगातार यहां भूखंड बेचने का प्रयास चल रहा है। भूखंड नहीं बिक पाने से एलडीए का निवेश वापस नहीं आ पा रहा है, जिससे दूसरी योजनाओं में विकास भी अटका है।