सीलिंग में डीलिंग: परचून की दुकान सील, बैंकों को बख्शा
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एक बार फिर अवैध निर्माण के खिलाफ एलडीए के अभियान पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं। कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कारोबारियों का कहना है कि गोमती नगर में प्राधिकरण की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है।
यहां सीलिंग के नाम पर डीलिंग की गई है। छोटे निर्माणकर्ता निशाने पर है, जबकि बड़ों पर कार्रवाई की ही नहीं जा रही। यहां केवल 15 फीसदी कॉमर्शियल निर्माण किए थे।
ताकि कॉलोनी के लोगों की जरूरतें पूरी हो सकें। जरुरतें कुछ इस कदर बढ़ गई हैं कि गोमती नगर के मुख्य मार्ग के 90 फीसदी भवन बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदल चुके हैं।
यहां बैंक, स्कूल, रेस्टोरेंट, बड़े-बड़े गेस्ट हाउस, मिठाई की दुकानें और यहां तक की शराब की कई दुकानें तक इनमें शामिल हैं। सीलिंग अभियान में जिस तरह से विरोध शुरू हुआ है, उसका सबसे बड़ा कारण पक्षपात है।
300 की सूची में 60 अवैध निर्माण
गोमतीनगर में मेडिकल स्टोर और परचून की दुकान जैसे छोटे अवैध निर्माण तो सील किए गए, पर बड़े-बड़े बैंक, मिठाई की प्रतिष्ठित दुकानों, गेस्ट हाउस, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स के शोरूम और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को सील नहीं करने से लोग नाराज हैं।
गोमती नगर में करीब 300 अवैध निर्माणों की सूची एलडीए को भेजी गई है। इनमें सबसे बड़े शोरूम और कॉम्प्लेक्स मिठाई वाले चौराहे में बायीं पट्टी से शुरू होते हैं। मनोज पांडेय चौराहे से बायें मुड़ कर पत्रकारपुरम चौराहे से होते हुए हुसरिया चौराहे तक कम कम 60 अवैध निर्माण हैं।
इसी तरह से विवेक खंड के लगभग हर दूसरे मकान में कॉमर्शियल इस्तेमाल का नजारा आम है। उधर, एलडीए की गोमतीनगर में वाणिज्य प्रतिष्ठानों को सील करने के विरोध में उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने शुक्रवार को गोमतीनगर में बैठक की।
तय हुआ कि व्यापारी 24 दिसंबर को पैदल मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करेंगे और जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और एलडीए वीसी को ज्ञापन सौंपेंगे।