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मेट्रो रूट पर बिकेगी ऊंचाई, बढ़ेगा मानचित्र शुल्क

Sat, 05 Oct 2013 01:22 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
ऋषि मिश्र/लखनऊ Updated Sat, 05 Oct 2013 01:22 AM IST
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lda produce money through far and mapping fee

मेट्रो परियोजना की खातिर धन जुटाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कार्यवाही शुरू कर दी है। इस परियोजना के लिए एलडीए को फिलहाल 100 करोड़ रुपये का खर्च करने का निर्देश शासन ने दिया है।

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यह खर्च मेट्रो से सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले लोगों की जेब से ही निकालने की योजना है। एक ओर जहां मेट्रो रूट पर अतिरिक्त ऊंचाई बेचने की योजना है वहीं मानचित्र शुल्क बढ़ाने पर भी मंथन चल रहा है।
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अब जितने भी मानचित्र मेट्रो कॉरिडोर के 50-50 मीटर दोनों ओर से पास किए जाएंगे, उनसे अतिरिक्त शुल्क की वसूली करेगा।

इस संबंध में शुक्रवार को आयोजित बैठक में ऐसे ही अनेक उपायों पर चर्चा की गई। किस तरह से मेट्रो के लिए खर्च निकाले जाएं, इस पर कई उपायों पर चर्चा हुई।

इसको लेकर अभी कुछ और बैठकें आयोजित की जाएंगी। बाद में सुझावों को बोर्ड के समक्ष पेश कर के शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

सबसे अधिक फायदे का सौदा प्राधिकरण के लिए ऊंचाई बेचने का है। इस संबंध में शासन से पहले ही अप्रवूल मांगा जा चुका है।

इसके तहत मांग की गई है कि राजधानी के बाहरी हिस्से जहां 2.50 फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) स्वीकृत है, वहां 5 एफएआर कर दिया जाए।

वहीं दूसरी ओर शहर के भीतर जहां 1.50 एफएआर स्वीकृत है, वहां 3 एफएआर अनुमन्य कर दिया जाए। अतिरिक्त एफएआर की बिक्री कर प्राधिकरण कमाई करे।

इसके अलावा मानचित्र पास करने में जितने भी शुल्क हैं, उनके अतिरिक्त मेट्रो रूट के लिए कुछ प्रीमियम भी तय किया जाने पर भी विचार चल रहा है।

उपाध्यक्ष अष्टभुजा प्रसाद तिवारी ने बताया कि इस संबंध में फिलहाल सुझाव रखे गए हैं। जल्द ही इनको अप्रूव करवाया जाएगा।

फिलहाल खर्च अवस्थापना निधि से

मेट्रो के लिए डीपीआर और अन्य शुरुआती खर्च के लिए प्राधिकरण के वित्त नियंत्रक डॉ. मोहन सिंह यादव ने अधीक्षण अभियंताओं को पत्र लिखा है कि वे मेट्रो संबंधित शुरुआती खर्च के लिए अवस्थापना निधि का इस्तेमाल करें।
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यह निधि मुख्यत: शहर के ढांचागत विकास पर खर्च की जाती है। इसको कमिश्नर लखनऊ केजरिए स्वीकृत कराया जाता है। वहीं अपनी बिल्डिंगों की ऊंचाई बढ़ाने के लिए जो पांच आवेदन प्राधिकरण के समक्ष आए थे, उनमें से दो स्वीकृत हुए हैं।

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