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इन दो लफ्जों ने रोका 70 गांवों का विकास
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 18 Jan 2014 09:17 AM IST
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सूबे के 70 गांवों को डामर रोड से जोड़ने का काम ‘दो शब्द’ की वजह से थम गया है। दरअसल ज्यादा रेट पर टेंडर आने पर ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण ने शासन से दिशा-निर्देश मांगे थे।
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जवाब मिला कि ‘अनिवार्य और अपरिहार्य’ स्थिति में ही ऐसा किया जाए। अब यही दो शब्द अभिकरण के अफसरों के समझ में नहीं आ रहे हैं।
नतीजतन, निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी और आरईडी को अनापत्ति पत्र जारी नहीं किया गया है। 70 गांवों में सड़कों के निर्माण के लिए मांगे गए अनापत्ति पत्र से संबंधित फाइल महीनों से उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण में धूल फांक रही है।
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ये सड़कें लखनऊ, बलरामपुर, अमेठी, सीतापुर, सुल्तानपुर, हरदोई, चित्रकूट, आजमगढ़, खीरी, हमीरपुर, प्रतापगढ़, मऊ, जीबी नगर और बिजनौर जिलों में बनाई जानी हैं।
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पीएमजीएसवाई (प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना) का नियम है कि टेंडर तय रेट से ज्यादा पर स्वीकार किए जाने पर अंतर का वहन राज्य सरकार करेगी। इसलिए विकास अभिकरण ने शासन से इस बाबत निर्देश मांगे।
जवाब मिलने के बाद अभिकरण के अफसरों को यह समझ नहीं आ रहा है कि ‘अनिवार्य व अपरिहार्य स्थिति’ किसे मानी जाए। एक बार फिर इन दो शब्दों का मतलब स्पष्ट करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।