ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े गांवों की होगी चांदी
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आगरा एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट से जुड़े गांवों में रिवाइज्ड सर्किल रेट लागू कराने की तैयारी अंतिम दौर में पहुंच गई है। इसके लागू होने के बाद काकोरी ब्लॉक के एक्सप्रेस-वे से जुड़े इलाकों में भू संपत्तियों की वर्तमान सर्किल दरों में ढाई गुना तक बढ़ोतरी प्रस्तावित है।
काकोरी ब्लॉक में प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहीत जमीन के लिए चिह्नित 13 गांवों में से आठ गांव पहले से ही एलडीए परिक्षेत्र में चिह्नित होने के कारण वहां के काश्तकारों को डीएम सर्किल रेट की बढ़ी हुई दर के आधार पर प्रति बीघा 50 लाख रुपये मुआवजा राशि दी गई है।
जबकि साथ ही सटे पांच गांवों के एलडीए क्षेत्र से बाहर होने के कारण सर्किल रेट की कम दर के कारण मुआवजा राशि 16 लाख रुपये प्रति बीघा ही निर्धारित हुई थी।
इस पर नाराजगी जताते हुए चिह्नित पांच गांव के काश्तकारों व किसानों ने प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहीत जमीन की मुआवजा राशि उनसे जुड़े अन्य गांवों के समकक्ष न किए जाने तक जमीन के निबंधन से इंकार कर दिया था।
दूर किया प्रोजेक्ट पर मंडराता खतरा
इसके कारण प्रोजेक्ट पर मंडराते खतरे को दूर कराने के लिए ही प्रशासन ने निबंधन विभाग व सदर तहसील की राजस्व टीम की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगरा एक्सप्रेस-वे से जुड़े काकोरी ब्लाक के एलडीए सीमाक्षेत्र के बाहर के पांच गांवों में रिवाइज्ड सर्किल रेट के तहत वर्तमान दस फीसदी की दर को बढ़ाकर 25 फीसदी तक करने की संस्तुति की है।
सूत्र बताते हैं कि सर्किल रेट में होने वाली इस प्रस्तावित बढ़ोतरी से ही चिह्नित पांच गांवों की जमीनों की मुआवजा राशि को अन्य समकक्ष गांवों के बराबर लाते हुए अधिग्रहीत जमीन के अटके निबंधन कार्य को प्रस्तावित लोकार्पण तिथि से पहले पूरा कराया जाएगा।
पूरा प्रकरण सीधे मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ा होने के कारण निबंधन विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक के अधिकारी इस पूरे मामले पर फिलहाल चुप्पी साधे हैं। एडीएम वित्त व राजस्व ने बस इतना ही कहा कि रिवाइज्ड सर्किल रेट का अंतिम निर्धारण जल्दी डीएम की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में होगा।