केजीएमयूः महिला ने पति को दी नई जिंदगी, इस बीमारी से था ग्रस्त
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केजीएमयू में मंगलवार को महिला ने लिवर देकर अपने पति की जान बचाई। करीब 13 घंटे चले प्रत्यारोपण के बाद दानदाता और मरीज दोनों की हालत स्थिर है। इस केस को असाध्य की श्रेणी में रखा गया है। प्रत्यारोपण का करीब 90 फीसदी खर्च केजीएमयू प्रशासन ने उठाया है।
केजीएमयू में यह आठवां लिवर प्रत्यारोपण था। केजीएमयू में अब तक छह लाइव और दो कैडवरिक लिवर प्रत्यारोपण हो चुका है। प्रत्यारोपण कराने वाले सभी मरीज स्वस्थ हैं। खास बात यह है कि केजीएमयू के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसके बाद भी हर माह एक मरीज का प्रत्यारोपण यहां किया जा रहा है।
केजीएमयू का दावा है कि उसे पर्याप्त स्टाफ दे दिया जाए तो हर सप्ताह एक लिवर प्रत्यारोपण कर सकता है। मार्च में पहला लिवर प्रत्यारोपण किया गया था।
दो माह पहले आया था मरीज
अमेठी निवासी 41 वर्षीय गजेंद्र प्रताप सिंह करीब दो माह पहले केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में दिखाने आए थे। उनके पेट में पानी भर गया था। मेडिसिन विभाग ने उन्हें सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग रेफर कर दिया। यहां जांच में पता चला कि गजेंद्र को क्रोनिक लिवर डिजीज है। लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत बताई गई।
गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि मरीज की आर्थिक स्थित ठीक नहीं थी। वह खेती बाड़ी करता है। उसका 18 साल का बेटा है। कमाई का कोई और जरिया नहीं है। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने उसका असाध्य योजना के तहत प्रत्यारोपण करने की रणनीति बनाई।
उसके बेटे और पत्नी की जांच की गई। प्रत्यारोपण के लिए पत्नी वंदना सिंह का लिवर फिट पाया गया। दोनों की सभी जांचें कराने के बाद मंगलवार सुबह सात बजे प्रत्यारोपण शुरू हुआ, जो रात आठ बजे तक चला। प्रत्यारोपण के बाद दोनों की हालत स्थिर है।
प्रत्यारोपण करने वाली टीम
इस दौरान सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार एवं एमएस प्रो. बीके ओझा भी थे। इसके अलावा मैक्स दिल्ली के डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल, डॉ. वैभव नासा ने सहयोग किया। कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने पूरी टीम को बधाई दी।
सभी मरीजों की हालत में सुधार