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विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए दी गई श्रम कानूनों में ढील, ये हैं छूट की शर्तें

Sun, 10 May 2020 04:00 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 10 May 2020 04:00 PM IST
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Labour laws are suspended for foreign investment.

राज्य सरकार ने कोरोना की वैश्विक महामारी से बदलते परिदृश्य में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सभी कारखानों व निर्माण प्रतिष्ठानों को श्रम कानूनों में तीन साल के लिए छूट दी है। मौजूदा समय में थाईलैंड, बांग्लादेश, वियतनाम व ताईवान में भारत से सस्ती लेबर है। ऐसे में श्रम कानूनों में ढील और कागजी कार्यवाही से छूट देकर विदेशी कंपनियों को लुभाया जा सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत के पास दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करने का सुनहरा मौका माना जा रहा है। ऐसे में जो राज्य औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर माहौल और सुविधाएं देगा, वहीं ज्यादा निवेश आएगा। उत्तर प्रदेश में पिछले तीन सालों में निवेश का माहौल बना है। तमाम सेक्टरों में निवेश के लिए नई नीतियां बनाई गईं हैं।
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इन्वेस्टर्स समिट, ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी और डिफेंस एक्सपो से प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को पंख लगे हैं। श्रम सुधारों से निवेशकों को आकर्षित करने में सुविधा होगी। वहीं, प्रदेश के मूल निवासी और प्रवासी स्किल्ड श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करने में आसानी होगी।
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नए उद्योगों को आसानी से स्किल्ड श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए क्वारंटीन सेंटरों में सेवायोजन विभाग के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम कराया जा रहा है। प्रस्तावित श्रम सुधार से जहां नए उद्योग लगेंगे, वहीं रोजगार के साथ राजस्व वृद्धि होने की भी उम्मीद है।

निवेश के लिए प्रतिस्पर्धात्मक होना पड़ेगा : सहगल

श्रम कानून में बदलाव का मुख्य मकसद अधिकाधिक लोगों को रोजगार देना है। चीन व अन्य देशों से आने वाली इंडस्ट्री को बेहतर माहौल देना पड़ेगा। खादी ग्रामोद्योग एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल का कहना है कि विदेशी निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी होना पड़ेगा। अधिकतम रोजगार औद्योगिक निवेश से ही आएगा। इस तरह श्रम कानूनों में ढील देकर यूपी में विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है।

श्रम कानूनों में इतनी भी ढील नहीं दी गई है कि मजदूरों का हित प्रभावित हो। उन्हें रजिस्ट्रेशन और पेपर वर्क से छूट दी गई है। कई और राज्यों ने श्रम कानूनों में सुधार किया है। जल्द ही एमएसएमई एक्ट में भी बदलाव किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि कोई भी नई यूनिट एक प्रपत्र भरकर दे दे, फिर उसे तीन साल तक अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं करनी पड़ेंगी।

श्रम कानूनों में छूट की ये हैं शर्तें

- श्रमिकों का नाम, विवरण व उपस्थिति इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर में दर्ज किए जाएंगे।
- किसी भी कामगार को सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से कम का भुगतान नहीं।
- मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाएगा।
- सभी कर्मकारों को वेतन का भुगतान उनके बैंक खातों में किया जाएगा।
- श्रमिकों की सेफ्टी व सिक्योरिटी से संबंधित कारखाना अधिनियम लागू रहेंगे।

- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम 1996 के प्रावधान यथावत रहेंगे।
- दुर्घटना में कर्मकार की मृत्यु अथवा अक्षम होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा।
- महिलाओं व बच्चों के नियोजन से संबधित श्रम अधिनियमों के प्रावधान लागू रहेंगे।
- श्रमिकों को 11 घंटे से अधिक काम करने की अनुमति या आवश्यकता नहीं होगी और किसी भी दशा में कार्य का प्रसार प्रति दिन 12 घंटे से अधिक नहीं होगा।

- श्रमिकों से किसी भी स्थिति में एक सप्ताह में 72 घंटे से अधिक कार्य नहीं करवाया जाएगा।
- काम की शिफ्ट इस प्रकार निर्धारित की जानी चाहिए कि 6 घंटे काम करने के बाद 30 मिनट का ब्रेक हो।
- बंधुआ श्रम प्रणाली उन्मूलन अधिनियम 1976 का अधिनियम संख्या 19 के प्रावधान लागू रहेंगे।
- इन शर्तों में से किसी भी उल्लंघन के लिए मौजूदा प्रासंगिक अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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