गोपाल चतुर्वेदी को मिला, पहला केपी सम्मान
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वरिष्ठ व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी प्रथम केपी सक्सेना सम्मान से अलंकृत
यह सम्मान उन्हें बिम्ब कला केंद्र की ओर से रविवार को जयशंकर सभागार में पद्मश्री केपी सक्सेना के 82वें जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। मुख्य अतिथि मेयर दिनेश शर्मा ने उन्हें सम्मान प्रदान किया।
मेयर दिनेश शर्मा ने कहा कि एक अदद ख्वाहिश है साहित्यकारों का म्यूजियम और सिटी प्वाइंट बनवाने की।
म्यूजियम में जहां दिवंगत साहित्यकारों की वस्तुएं याद के तौर पर रखी जाएंगी, वहीं सिटी प्वाइंट रंगकर्मियों, साहित्यकारों व कलाकारों की गोष्ठियों व चर्चाओं के काम आएगा।
साहित्य के इस मंदिर के निर्माण के प्रयास जारी हैं। इस अवसर पर ‘गद्य व्यंग्य गोष्ठी’ भी कराई गई, जिसमें राजेश अरोरा ‘शलभ’ ने केपी सक्सेना की रचना ‘दिल है कि मानता नहीं’ और व्यंग्यकार राजेश मिश्र ने ‘अब घोषणापत्र फाड़ने का सीजन’ श्रोताओं को सुनाईं।
चतुर्वेदी ने लिखे 20 से अधिक व्यंग्य
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अगस्त, 1942 को जन्में व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी पुलिस विभाग व राजभाषा
विभाग में नियुक्त रहे। ‘कुछ तो हो’ व ‘धूप की तलाश’ उनके काव्य संग्रह
हैं।
इसके अलावा ‘दुख की वापसी’, ‘नाप में फंसी कुरसी’, ‘नैतिकता की लंगड़ी
दौड़’ सहित करीब 20 व्यंग्य उन्होंने लिखे हैं। ‘श्रेष्ठ कवि’, ‘भारत
भारती’ व रेलवे बोर्ड का ‘प्रेमचंद पुरस्कार’ सहित कई पुरस्कार उन्हें मिल
चुके हैं।