25 साल से चल रहा अयोध्या ढ़ांचा विध्वंस मुकदमा, देखें- कौन-कौन आरोपी
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6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए विवादित ढांचा ध्वंस मामले की सुनवाई पिछले 25 साल से चल रही है। मामले में नामजद आठ आरोपियों भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, विहिप नेता अशोक सिंघल, आचार्य गिरिराज किशोर, विष्णुहरि डालमिया, साध्वी ऋतंभरा पर यहां की अदालत में आरोप तय किया गया था।
सुनवाई के दौरान आचार्य गिरिराज किशोर एवं अशोक सिंघल का निधन हो चुका है। इस समय इन दो को छोड़कर छह लोगों के खिलाफ विचारण चल रहा है। प्रकरण में रायबरेली के जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में गवाहों को पेश किया जा रहा है।
अब तक पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों, नागरिकों, पत्रकारों समेत 57 गवाहों ने कोर्ट में पेश होकर बयान दर्ज कराए। इस दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने उनसे जिरह भी पूरी कर ली है।
यह है मामला
पहले यह मामला सुनवाई के लिए ललितपुर गया। फिर इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर 1993 को पत्रावली ललितपुर से रायबरेली भेजने का आदेश दिया और अगले दिन 10 सितंबर को पत्रावली रायबरेली की विशेष अदालत में आ गई।
अभी सुनवाई शुरू भी नहीं हो पायी थी कि 24 जनवरी 1994 को पत्रावली रायबरेली से स्पेशल जज (अयोध्या प्रकरण) लखनऊ को स्थानांतरित कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर करीब नौ साल बाद पत्रावली दूसरी बार 21 मार्च 2003 को रायबरेली की विशेष अदालत लाई गई। इसके बाद मामले की सुनवाई में तेजी आई। पत्रावली आने के बाद जब सुनवाई 29 मार्च 2003 को हुई तो सभी आठ आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट ने हाजिर होने का सम्मन जारी कर दिया।
यह रहा घटनाक्रम
विशेष अदालत ने 19 सितंबर 2003 को मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी को आरोपमुक्त कर दिया।
साथ ही बचे अन्य सात आरोपियों डॉ. मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, विहिप नेता अशोक सिंघल, आचार्य गिरिराज किशोर, विष्णुहरि डालमिया, साध्वी ऋतंभरा के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश देते हुए 10 अक्तूबर 2003 की तारीख तय कर दी।
इस आदेश से क्षुब्ध डॉ. मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य लोगों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में पुनर्विचार याचिका दायर की। मामला हाईकोर्ट चले जाने के कारण 10 अक्तूबर 2003 को बचे सात आरोपियों पर आरोप तय नहीं किए जा सके।
उच्च न्यायालय ने 6 जुलाई 2005 को आरोपमुक्त किए गए आडवाणी समेत आठों आरोपियों पर फिर रायबरेली स्थित कोर्ट में मुकदमा चलाने का आदेश दिया। 28 जुलाई 2005 को सभी आठ आरोपी विशेष अदालत में हाजिर हुए और उनके खिलाफ धारा 153ए, 153बी, 505, 147, 149 आईपीसी के तहत आरोप तय किए गए। इसके बाद से गवाही की प्रक्रिया चल रही है।
देखें, कब क्या हुआ
- 6 दिसंबर 1992- अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस।
- 1 मार्च 1993- फैजाबाद से ललितपुर के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट को पत्रावली भेजी गई।
- 9 सितंबर 1993- इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रकरण ललितपुर से रायबरेली स्थानांतरित।
- 10 सितंबर 1993- रायबरेली की विशेष अदालत में पत्रावली आई।
- 24 जनवरी 1994- स्पेशल जज (अयोध्या प्रकरण) लखनऊ को पत्रावली स्थानांतरित।
- 17 सितंबर 2002- तत्कालीन राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र देकर कहा कि सीबीआई प्रकरण को रायबरेली की अदालत में ले सकती है।
- 29 नवंबर 2002- सर्वोच्च न्यायालय ने मुकदमा को रायबरेली में चलाने का आदेश दिया।
- 21 मार्च 2003- पत्रावली रायबरेली की विशेष अदालत आई।
ये इन घटनाक्रमों की तारीख
- 29 मार्च 2003- सभी आठ आरोपियों को हाजिर होने के लिए सम्मन जारी हुआ।
- 19 सितंबर 2003-आडवाणी को आरोपमुक्त करते हुए बचे अन्य सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश।
- 10 अक्तूबर 2003- आरोप तय करने के लिए तिथि निश्चित की गई, लेकिन जोशी समेत सातों के हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर देने से आरोप तय नहीं हो सका।
- 6 जुलाई 2005- हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आडवाणी समेत आठों आरोपियों पर रायबरेली के विशेष कोर्ट में मुकदमा चलेगा।
- 28 जुलाई 2005- आडवाणी समेत सभी आठ आरोपी कोर्ट में पेश, सभी के खिलाफ आरोप तय।
(इसके बाद से गवाही शुरू हो गई। सीबीआई की ओर से अब तक 57 गवाह पेश हो चुके हैं। अगली पेशी इसी माह की 22 अप्रैल को है, जिसमें 58वां गवाह पेश किया जाना है। )