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हिंदी प्रेम ने शोभित को बना दिया युवा कहानीकार, दो दर्जन से ज्यादा लिख चुके हैं कहानियां

Thu, 27 Aug 2020 04:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 27 Aug 2020 04:40 PM IST
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know about the storyteller shobhit dwivedi
शोभित द्विवेदी - फोटो : amar ujala
नई पीढ़ी के जो बच्चे और युवा हिंदी को कमतर आंकते हैं, ये खबर उनके लिए खास है। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र शोभित द्विवेदी मात्र 22 वर्ष की आयु में दो दर्जन से ज्यादा कहानियां लिख चुके हैं, जिसमें से छह तो प्रकाशित भी हो चुकी हैं। इन कहानियों को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की पत्रिका बाल वाणी ने प्रकाशित किया है।
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शोभित कहते हैं कि हिंदी से उन्हें बचपन से ही बहुत लगाव रहा है। शुरू से ही हिंदी की कहानियां पढ़ना पसंद था और बाद में कहानियां व नाटक लिखना उनका शौक बन गया। शोभित कहते हैं कि नेट-जेआरएफ अभी पहली पायदान थी, मंजिल अभी दूर है लेकिन दृढ़ संकल्प है कि हिंदी के बूते एक दिन शिखर तक जरूर पहुंचुगा। 
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इतना ही नहीं शोभित ने हिंदी विषय में 100 परसेंटाइल के साथ नेट-जेआरएफ की परीक्षा में देश में पहला स्थान प्राप्त कर ये साबित कर दिया है कि सच्ची लगन से कुछ भी संभव है। यह हिंदी विषय में परीक्षा देने वाले किसी प्रतिभागी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 

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एमए हिंदी के तीनों सेमेस्टर में पहला स्थान
शोभित ने बताया कि वे लखनऊ विश्वविद्यालय में एमए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र हैं। पिछले तीनों सेमेस्टर में उन्होंने सबसे ज्यादा अंक प्राप्त कर विवि में पहला स्थान प्राप्त किया है।
 

हिंदी की सेवा ही है जीवन का लक्ष्य

शोभित कहते हैं कि मेरे जीवन का उद्देश्य हिंदी की सेवा करना है। लेखन और आलोचना के क्षेत्र में खुद को कसौटी पर खरा उतारना है।

हिंदी का बड़ा आलोचक बनना है सपना
शोभित ने बताया कि हिंदी में आलोचना का क्षेत्र उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी और रामविलास शर्मा जैसे विद्वानों से वो बहुत प्रभावित हैं। कहते हैं कि हिंदी का बड़ा आलोचक बनना ही उनका सपना है।

नेट-जेआरएफ में हिंदी विषय में हासिल की 100 परसेंटाइल
सीतापुर जिले के आचार्यजन पुरवा निवासी शोभित ने हाल ही में नेट-जेआरएफ में हिंदी विषय में 100 प्रतिशतता (परसेंटाइल) पाकर इतिहास रचा है। 

जयशंकर प्रसाद प्रिय साहित्यकार

शोभित ने कहा कि यूं तो वे बहुत से हिंदी लेखकों से प्रभावित हैं और सभी को पढ़ते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा उन्हें जयशंकर प्रसाद प्रिय हैं। उन्हें पढ़ना सबसे ज्यादा अच्छा लगता है।

अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे ‘हिंदी हैं हम’ अभियान ने मेरे सपने को संबल दिया है। मुझे लगता है कि मेरे जैसे लाखों हिंदी प्रेमी युवा इस अभियान से जुड़कर हिंदी को उसके चरमोत्कर्ष तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे। - शोभित द्विवेदी
 

रंगमंच से प्रेम को अभी विराम
शोभित कहते हैं कि उन्हें नाटक लिखना और रंगमंच से विशेष लगाव है, लेकिन अभी पढ़ाई के चलते रंगमंच से अभी विराम ले रखा है। शोभित फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी प्रयोग नहीं करते। कहते हैं कि इससे पढ़ाई में बाधा आती है।
 

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