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गोंडा: घर बसने से पहले बिखर गए बेटी के सुनहरे सपने, याद आता है वह मंजर तो कांप उठती है रूह

Thu, 15 Oct 2020 03:52 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव संजय तिवारी, अमर उजाला, गोंडा
संजय तिवारी, अमर उजाला, गोंडा Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 15 Oct 2020 03:52 PM IST
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हमले में झुलसी युवती - फोटो : अमर उजाला
गोंडा में पसका गांव की तीन बेटियों पर एसिड अटैक ने एक हंसते खेलते परिवार की खुशियां छीन ली। जख्म ऐसा दिया है कि पूरी जिंदगी दर्द से भरा रहेगा। घर बसने से पहले ही बड़ी बेटी के सुहाने सपने चकनाचूर हो गए। पुलिस ने एक युवक को मुठभेड़ में गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन इससे परिवार के लोगों को तसल्ली नहीं है। बेटी के दर्द से पूरा परिवार ही नहीं हर कोई कराह रहा है।
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परिवार में सबकी दुलारी और हर काम में हाथ बंटाने में आगे रहने वाली खुशबू एसिड अटैक की घटना के एहसास से ही चौंक जा रही है। जिला अस्पताल में इलाज से वह राहत तो महसूस कर रही है, लेकिन एसिड से मिले दाग तो पूरे जीवन भर रुलाने के लिए काफी हैं। 
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17 साल की खुशबू भी और बेटियों की तरह सुनहरे सपने पाले आगे बढ़ रही थी। 25 अक्तूबर को गोदभराई होने की तैयारी थी और पूरा परिवार मगन था कि बेटी के हाथ जल्द पीले करके विदा कर देंगे। पर किसी को क्या पता था कि किसी दरिंदे की नजर बेटी की खुशियों पर टिकी है। ऐसी हरकत किसी ने सपने में भी नहीं सोची थी।
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सता रही अब आगे के जीवन की चिंता

पसका जैसे ग्रामीण गांव में भी कोई दरिंदा एसिड फेंकने जैसी घिनौनी हरकत करेगा यह चौंकाने वाला है। बेटी के चेहरे पर एसिड पड़ा है, यह तो शुक्र रहा कि सोने के कारण बेटी की आंखें बच गईं। उनके साथ सो रहीं दोनो बहनें भी झुलसी हैं लेकिन खुशबू की जिंदगी दर्द से भर गई है। जिला अस्पताल में इलाज करा रही खुशबू से लोग मिलने जाते हैं तो आंसू के सिवा उसके पास कुछ नही है। बोलने तक की हिम्मत नहीं है, दर्द के मारे सिसक रही बेटी को अब अपने आगे के जीवन की चिंता भी सता रही है। 

सोमवार की वह रात जब अपनी बहनों के साथ सो रही खुशबू सोने छत पर गई तो कोई चिंता नहीं थी। रात दो बजे के बाद जिस तरह उसका बदन अचानक आग जैसे झुलसने लगा तो वह समझ ही नहीं पाई कि क्या हो गया। करंट लगा कि आग लग गई, तीनों बहनें दर्द के मारे शोर मचाने लगीं। बाद में पता चला कि किसी दरिंदे ने एसिड अटैक किया। यह मंजर आज भी उसे याद आता है तो आंखों में खून उतर आता है और वह कांप उठती हैं। 
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