मीठा खाने से नहीं होता डायबिटीज लेकिन...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डायबिटीज को आसान शब्दों में डॉ. अरुण पांडेय समझाते हैं कि यह एक हार्मोन से संबंधित बीमारी है जो पाचन ग्रंथि से जुड़ी है जो शरीर में शुगर लेवल बढ़ा देती है।
इसकी वजह से गुर्दे से लेकर आंखें तक यानी शरीर के विभिन्न अंग खराब हो सकते हैं, जिससे मौत भी हो सकती है।
देश में इस समय करीब साढ़े 7 करोड़ लोग डायबिटीज की चपेट में हैं। वहीं, लखनऊ में करीब 2.70 लाख लोग इस समय डायबिटीज से पीड़ित हैं।
डॉ. पांडेय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या के बावजूद डायबिटीज से लड़ने में ढीला रवैया देखा जा रहा है। जरूरी है कि 40 की उम्र के बाद नागरिक हर वर्ष शुगर लेवल की जांच करवाएं।
राजधानी के बुजुर्गों में हर तीसरे को डायबिटीज अपनी चपेट में ले रहा है। वहीं 20 से 70 वर्ष की कुल आबादी को मिला लें तो इस रोग से 9 प्रतिशत लोग जूझ रहे हैं।
इनमें से एक तिहाई लोगों को पता ही नहीं होता कि वे डायबेटिक हैं, जो डायबिटीज से जुड़ी कॉम्प्लीकेशन को और बढ़ा देती है। यह कहना है राजधानी के चिकित्सकों का।
डायबिटीज से जंग के लिए कसिए कमर
डायबिटीज होने के बावजूद सावधानियां बरतते हुए स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर बेहतर जीवन जीया जा सकता है। कई पीड़ित इसकी मिसाल है।
सही खान-पान, व्यायाम और जीवन शैली में सुधार बना ली गई सही आदतें डायबिटीज टाइप 2 होने के रिस्क को 70 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं।
क्या है डायबिटीज
दरअसल हम जो भोजन लेते हैं उसे हमारी पाचन ग्रंथियां पचा कर ऊर्जा और हमारी वृद्धि के लिए उपयोग करती हैं। इस प्रक्रिया में भोजन का अधिकतर हिस्सा टूट कर ग्लूकोज बनाता है।
ग्लूकोज एक किस्म की शुगर है और यह हमारे शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। यह ग्लूकोज हमारी रक्त में घुलकर कोशिकाओं तक पहुंचता है जिसका उपयोग कोशिकाएं करती हैं।
लेकिन ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुंचाने के लिए इंसुलिन हार्मोन की जरूरत होती है जो पैंक्रियाज की बीटा सेल्स पैदा करती हैं।
जब भी हम कुछ खाते हैं तो पैंक्रियाज यह इंसुलिन अपने आप जरूरी मात्रा में छोड़ती है। यही इंसुलिन शुगर कंट्रोलर की भूमिका अदा करता है। इंसुलिन को लेकर आई समस्या ही डायबिटीज का कारण होती है।
लक्षण : हो जाइए सजग अगर
•बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है।
•अचानक वजन तेजी से घटने लगा है
•शरीर में एनर्जी की कमी महसूस हो रही है
•प्यास और भूख बहुत लगने लगी है
मैं क्या करूं कि न हो मधुमेह
70 प्रतिशत टाइप-2 डायबिटीज के रोगी इसकी चपेट में आने से बच सकते थे अगर उन्होंने सही खान-पान और नियमित व्यायाम की आदतें विकसित की होती।
नाश्ते में पौष्टिकता का रखें ध्यान
•डॉ. सुशील उपाध्याय कहते हैं कि नाश्ते में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे, मछली, अंडे का उपयोग बढ़ाएं। साथ ही भोजन में स्वाद के बजाय पौष्टिकता को महत्व दें।
क्या नहीं खाएं
•स्वादिष्ट लगने वाली पेस्ट्री, नाश्ते में परोसे जाने वाले अधिकतर सीरियल्स, फ्राइड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, मीठा दही, आदि।
रिस्क फैक्टर्स
•1. फैमिली हिस्ट्री
•2. व्यायाम नहीं करना
•3. गैर-पौष्टिक भोजन लेना
•4. ओवर वेट होना
मैं रिस्क कैसे कम कर सकता हूं?
•1. तैराकी से जुड़िए : तैराकी के दौरान खर्च हुई ऊर्जा शरीर को स्फूर्ति देती है और यह डायबिटीज के खतरों को कम करती है। खासतौर से बच्चों को इससे जोड़ें।
•2. साइकिलिंग : हफ्ते में एक दिन साइकिलिंग करने का नियम बनाइए और संभव हो तो दिन बढ़ाइए। पूरे शरीर खासतौर से पैरों का व्यायाम करने में साइकिल मदद करेगी, डायबिटीज दूर रहेगा।
•3. पैदल चलिए : तेज पैदल चलने की आदत बनाइये। डॉ. पांडेय सुझाते हैं कि रोजाना अगर 30 मिनट में 3 किमी पैदल चलने की आदत डाल लेंगे तो यह आदत डायबिटीज की संभावना को बहुत कम कर देगी।
•4. डांस : लखनऊ के युवाओं के लिए डांस से जुड़ना मुश्किल काम नहीं है। यह न केवल एक अच्छी परफॉर्मिंग आर्ट है, बल्कि ऊर्जा खर्च करके डायबिटीज को दूर रखने में भी मदद करती है।
...और इलाज
प्रो. सुशील गुप्ता के अनुसार यह मानना गलत है कि मीठा खाने से डायबिटीज होता है। यह पाचन ग्रंथि में आई खामी से होता है।
लेकिन डायबिटीज होने के बाद मीठा खाना रोग को और बिगाड़ता है। टाइप 1 में इलाज के तौर पर इंसुलिन लगातार लेना होता है।
वहीं टाइप टू में इंसुलिन के अलावा व्यायाम, सही भोजन, सही दवाएं और जांचों की जरूरत होती है। लखनऊ के चिकित्सकों के अनुसार डायबिटीज को नियंत्रित रखने में 75 प्रतिशत योगदान खुद मरीज दे सकते हैं, चिकित्सकों की भूमिका केवल 25 प्रतिशत में होती है।