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खान मुबारक की याचिका खारिज, अवनीश अवस्थी समेत कई पर लगाए थे ये गंभीर आरोप
Wed, 10 Feb 2021 03:15 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 10 Feb 2021 03:15 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को संगीन अपराधों के आरोपी खान मुबारक की याचिका को भ्रामक करार देते हुए खारिज कर दिया। इसमें एसीएस गृह अवनीश अवस्थी समेत कई आला पुलिस अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। याची ने खुद की जान का खतरा बताते हुए ललितपुर से लखनऊ जेल शिफ्ट करने की गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति राजीव सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला खान मुबारक की याचिका पर शुरुआती सुनवाई के बाद दिया।
राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद शाही ने याची के आरोपों को आधारहीन बताया। शाही ने कोर्ट को तर्क दिया कि आईजी जेल की रिपोर्ट पर याची को आंबेडकरनगर से ललितपुर जेल भेजा गया है। उसके खिलाफ हत्या आदि के 35 संगीन मामले दर्ज हैं। ऐसे में उसने यह याचिका महज पेशबंदी में दायर की है, जो खारिज किए जाने लायक है।
याचिका में एसीएस गृह अवनीश अवस्थी के अलावा एडीजी एलओ प्रशांत कुमार, डीजी जेल आनंद कुमार, एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश और आंबेडकरनगर के डीएम व एसपी को पक्षकार बनाया गया है। याची का कहना था कि ये आला अफसर उससे मुख्तार अंसारी जैसे राजनीतिक दुश्मनों को खत्म करने का दबाव डालते हैं। इसके चलते उसे ललितपुर जेल में शिफ्ट करवा दिया गया। वहीं, याची ने आशंका जाहिर की थी कि जेल से लाने और ले जाने के दौरान उसका एनकाउंटर किया जा सकता है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपों को अस्पष्ट बताते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद शाही ने याची के आरोपों को आधारहीन बताया। शाही ने कोर्ट को तर्क दिया कि आईजी जेल की रिपोर्ट पर याची को आंबेडकरनगर से ललितपुर जेल भेजा गया है। उसके खिलाफ हत्या आदि के 35 संगीन मामले दर्ज हैं। ऐसे में उसने यह याचिका महज पेशबंदी में दायर की है, जो खारिज किए जाने लायक है।
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याचिका में एसीएस गृह अवनीश अवस्थी के अलावा एडीजी एलओ प्रशांत कुमार, डीजी जेल आनंद कुमार, एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश और आंबेडकरनगर के डीएम व एसपी को पक्षकार बनाया गया है। याची का कहना था कि ये आला अफसर उससे मुख्तार अंसारी जैसे राजनीतिक दुश्मनों को खत्म करने का दबाव डालते हैं। इसके चलते उसे ललितपुर जेल में शिफ्ट करवा दिया गया। वहीं, याची ने आशंका जाहिर की थी कि जेल से लाने और ले जाने के दौरान उसका एनकाउंटर किया जा सकता है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपों को अस्पष्ट बताते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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