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Lucknow News: केजीएमयू में सेंसर से बनेंगे दिव्यांगों के कृत्रिम अंग
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लैब का शुभारंभ।
लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में सेंसर की सहायता से दिव्यांगों के कृत्रिम अंग बनाए जा सकेंगे। केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने शनिवार को पीएमआर विभाग में फुट और वर्चुअल रियलिटी लैब का शुभारंभ किया। इन लैब के माध्यम से दिव्यांगों को बेहतर तरीके से कृत्रिम अंग लगाए जा सकेंगे।
पीएमआर विभाग के प्रमुख प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि पीएमआर दिवस पर इन दो लैब का शुभारंभ किया गया है। वर्चुअल रियलिटी लैब से आभासी वास्तविकता (वीआर) प्रणालियों का उपयोग करके पुनर्वास में मदद की जाती है। वहीं, फुट प्रेशर एनालसिस लैब में मरीज के पैर के दबाव का आकलन किया जाता है।
इसकी सहायता से पैरों की समस्या वाले दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग और विशेष प्रकार के जूते तैयार किए जाते हैं। ये जूते पैरों में जलन की शिकायत करने वाले, पैरों में समस्या बताने वाले खिलाड़ियों के लिए भी बेहद उपयोगी होते हैं।
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प्रोफेसर डाॅ. दिलीप कुमार ने कहा कि फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन जिसे फिजियाट्री भी कहा जाता है, एक चिकित्सा विशेषता है जो शारीरिक अक्षमताओं वाले व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार की चिकित्सा कार्यात्मक सीमाओं वाले लोगों की मदद करना है। कार्यक्रम में डॉ. रत्नेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष पीएमआर डॉ. एके अग्रवाल, राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पीएमआर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीएस गोगिया, डाॅ. सुधीर मिश्रा, डाॅ. गणेश यादव, डाॅ. ओसामा नियाज, डाॅ. संदीप गुप्त, डाॅ. मोहित किशोर श्रीवास्तव माैजूद रहे।
पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन
इस माैके पर पैरामेडिकल छात्रों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के लिए पोस्टर प्रतियोगिता भी हुई। इसमें 51 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसमें अंकिता गुप्ता (नर्सिंग ऑफिसर) ने प्रथम स्थान, करन (एमबीबीएस छात्र) ने द्वितीय और अमन (डीपीटी छात्र) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
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पीएमआर विभाग के प्रमुख प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि पीएमआर दिवस पर इन दो लैब का शुभारंभ किया गया है। वर्चुअल रियलिटी लैब से आभासी वास्तविकता (वीआर) प्रणालियों का उपयोग करके पुनर्वास में मदद की जाती है। वहीं, फुट प्रेशर एनालसिस लैब में मरीज के पैर के दबाव का आकलन किया जाता है।
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इसकी सहायता से पैरों की समस्या वाले दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग और विशेष प्रकार के जूते तैयार किए जाते हैं। ये जूते पैरों में जलन की शिकायत करने वाले, पैरों में समस्या बताने वाले खिलाड़ियों के लिए भी बेहद उपयोगी होते हैं।
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प्रोफेसर डाॅ. दिलीप कुमार ने कहा कि फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन जिसे फिजियाट्री भी कहा जाता है, एक चिकित्सा विशेषता है जो शारीरिक अक्षमताओं वाले व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार की चिकित्सा कार्यात्मक सीमाओं वाले लोगों की मदद करना है। कार्यक्रम में डॉ. रत्नेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष पीएमआर डॉ. एके अग्रवाल, राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पीएमआर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीएस गोगिया, डाॅ. सुधीर मिश्रा, डाॅ. गणेश यादव, डाॅ. ओसामा नियाज, डाॅ. संदीप गुप्त, डाॅ. मोहित किशोर श्रीवास्तव माैजूद रहे।
पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन
इस माैके पर पैरामेडिकल छात्रों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के लिए पोस्टर प्रतियोगिता भी हुई। इसमें 51 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसमें अंकिता गुप्ता (नर्सिंग ऑफिसर) ने प्रथम स्थान, करन (एमबीबीएस छात्र) ने द्वितीय और अमन (डीपीटी छात्र) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।