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टीबी उन्मूलन में केजीएमयू होगा प्रदेश का मार्गदर्शक

Thu, 25 Nov 2021 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 02:00 AM IST
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Kgmu will guide the state in eradicating TB
प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए केजीएमयू प्रदेश के सभी 75 जिलों के क्षय उन्मूलन कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देगा। राष्ट्रीय टीबी (क्षय) उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की टीम के साथ हुई बैठक में बुधवार को केजीएमयू प्रशासन ने यह जानकारी दी। इस टीम में एडिशनल हेल्थ सेक्रेटरी और ट्यूबरकुलोसिस की महानिदेशक आरती आहूजा तथा ज्वॉइंट डायरेक्टर डॉ. रघुराम राव शामिल थे। केजीएमयू के वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) बिपिन पुरी ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में विवि द्वारा सक्रिय भूमिका निभाने का आश्वासन दिया गया।
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रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि चिकित्सीय सहायता देने के साथ ही उनके विभाग ने इस रोग से पीड़ित 52 बच्चों को गोद भी ले रखा है। डॉ. सूर्यकांत उप्र स्टेट टास्क फोर्स (क्षय उन्मूलन) के चेयरमैन भी हैं, उन्होंने कहा कि हम प्रदेश के सभी 75 जिलों के क्षय उन्मूलन कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगें, जिससे पीएम का टीबी मुक्त भारत का सपना साकार हो सके। उन्होंने बताया कि जब टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक न्यूक्लीआई उत्पन्न होता है, जो हवा के माध्यम से फैल सकता है। विश्व में टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय है। विश्व में प्रतिवर्ष 14 लाख मौतें टीबी से होती हैं, उनमें से एक चौथाई से अधिक अकेले भारत में होती हैं। देश मेें लगभग 1000 लोगों की मृत्यु प्रतिदिन टीबी के कारण होती है।
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एक साल से कम समय में ठीक हो रहे मरीज
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि लगातार दो हफ्ते तक खांसी आना, खांसी के साथ खून आना, छाती में दर्द होना, वजन कम होना, शाम को बुखार आना, रात में पसीना होना जैसे लक्षण होने पर मरीज को तुरंत टीबी की जांच करानी चाहिए। टीबी रोग की जांच एवं उपचार सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त है। पहले एमडीआर टीबी के इलाज में दो साल तक का समय लग जाता था, लेकिन अब नई दवाओं आने से एक साल से कम समय में मरीज का इलाज हो जाता है। इस मौके पर स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ. संतोष गुप्ता, जिला टीबी अधिकारी डॉ. एके चौधरी, डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट - डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. श्रृष्टि, डॉ. अपर्णा, केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता जैन आदि उपस्थित रहे।
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