फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   KGMU research proved that who tool corona vaccine were more safe during infection.

KGMU: टीका लेकर बुजुर्गों ने खुद को बचाया, जवानों ने खतरे में डाली जान

Thu, 30 Jun 2022 03:45 PM IST
ishwar ashish सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 30 Jun 2022 03:45 PM IST
सार

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओर से भर्ती मरीजों पर किए गए शोध में कहा गया है कि बिना टीका लगवाने वालों में 71.5 फीसदी तो टीका लगवाने वालों में सिर्फ 26.3 फीसदी संक्रमित हुए गंभीर बीमार हुए।

विज्ञापन
KGMU research proved that who tool corona vaccine were more safe during infection.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोविड-19 वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत में विकसित वैक्सीन ने बड़ी भूमिका अदा की है। दूसरी लहर के दौरान टीकाकरण कराने वाले बुजुर्गों की तबीयत संक्रमित होने के बावजूद कम खराब हुई। वहीं, टीका न लगने से संक्रमण ने युवाओं की हालत ज्यादा खराब की। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने यह दावा अन्य विभागों के सहयोग से हुए शोध में किया है। दूसरी लहर के दौरान केजीएमयू में भर्ती मरीजों पर किए गए शोध में पाया गया कि टीकाकरण वाले समूह में 26.3 फीसदी की ही हालत गंभीर हुई। गैर टीकाकरण वाले समूह में यह आंकड़ा 71.5 प्रतिशत था।

विज्ञापन


यह अध्ययन डॉ. ज्योति बाजपेयी, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. अजय के पटवा, डॉ. वीरेंद्र आतम, डॉ. श्याम के चौधरी और डॉ. अनुज पांडेय ने किया है। शोध में दूसरी लहर के दौरान अप्रैल 2021 में भर्ती 142 संक्रमितों को शामिल किया गया। इससे पहले 16 जनवरी को ही टीकाकरण का शुभारंभ हुआ था। पहले चरण में हेल्थ केयर वर्कर तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को ही शामिल किया गया।
विज्ञापन


अगले चरण में टीकाकरण का दायरा बढ़ाया गया। शोध में इन मरीजों को टीकाकरण और गैर टीकाकरण के दो समूह में बांटा गया। इसमें पाया गया कि टीकाकरण से बुजुर्ग संक्रमितों की हालत कम गंभीर हुई। दूसरी ओर टीकाकरण न होने से युवाओं की भी हालत गंभीर हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


टीकाकरण वाले ग्रुप में सिर्फ 19 मरीज थे। इसमें से पांच की हालत गंभीर हुई तथा एक की मौत हुई, जबकि 14 मरीजों को ज्यादा समस्या नहीं हुई। वहीं, गैर टीकाकरण वाले ग्रुप में 123 मरीज शामिल थे। इनमें से 88 की हालत संक्रमण से बेहद गंभीर हो गई और 13 की मौत हो गई। 35 मरीजों की हालत अपेक्षाकृत कम गंभीर हुई।

मौत के मामले में ज्यादा अंतर नहीं

केजीएमयू ने यह शोध उस वक्त किया था जब टीकाकरण का प्रतिशत बेहद कम था। इसके अनुसार टीकाकरण और गैर टीकाकरण के मामलों में मौत के प्रतिशत में ज्यादा अंतर नहीं था। टीकाकरण वाले ग्रुप में मौत का प्रतिशत 5.2 था तो गैर टीकाकरण वाले ग्रुप में यह 9.1 फीसदी था। उधर, गंभीर और गैर गंभीर संक्रमितों के मामले में यह अंतर करीब तीन गुने का था। दोनों ही समूह के मरीजों को 10 से 15 दिन अस्पताल में भर्ती किया गया।

सौ से ज्यादा केंद्रों पर सामान्य और 14 पर बूस्टर डोज
जनपद में इस समय सौ से ज्यादा केंद्रों पर कोविड का टीका लगाया जा रहा है। यहां हेल्थ केयर वर्कर और फ्रं टलाइन वर्करों के साथ 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को एहतियाती डोज भी दी जा रही है। वहीं, राजधानी के 14 निजी केंद्रों पर 18 से 59 वर्ष तक की आयु वालों को बूस्टर डोज लगाई जा रही है। इसके लिए 386.25 रुपये देने होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed