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Lucknow News: केजीएमयू में पहली बार रोबोट से हुई सात वर्ष के बच्चे की सर्जरी
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केजीएमयू में पहली बच्चे की रोबोट से सर्जरी
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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में पहली रोबोटिक सर्जरी हुई। विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत के नेतृत्व सात वर्ष के बच्चे के अंडकोष की हर्निया का ऑपरेशन किया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत ने बताया कि उन्नाव के धारवा निवासी अक्षांस को पिछले आठ महीने से दोनों अंडकोष में सूजन थी। जांच में उसे दोनों तरफ हर्निया का पता चला। सामान्य सर्जरी में दो जगह चीरा लगाना पड़ता था। वहीं रोबोटिक तकनीक में सिर्फ एक ही चीरे से सर्जरी संभव हो सकती थी। माता-पिता को इसके बारे में बताया गया। उनकी सहमति के बाद ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के अगले दिन ही बच्चा उठकर चलने-फिरने लगा, जो तेज रिकवरी का संकेत है। 16 फरवरी को उसका ऑपरेशन किया गया और इसके बाद 23 फरवरी को विभाग से छुट्टी दे दी गई। कुलपति डा. सोनिया नित्यानंद ने इस सफल सर्जरी पर पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं हैं। ऑपरेशन में करीब 60 हजार का खर्च आया।
सर्जरी टीम
प्रो. जे. डी. रावत, प्रो. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. प्रीति और डॉ. कृतिका की सर्जिकल टीम ने अंजाम दिया। डा. विनीता सिंह और डा. नीलकमल की टीम ने एनेस्थीसिया प्रदान की। नर्सिंग ऑफिसर संजय, रीता, रिंकेश और दीप्ति ने भी टीम की सहायता की।
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रोबोटिक सर्जरी का महत्व
रोबोटिक सर्जरी से बच्चों में भी वयस्क मरीजों की तरह तेजी से रिकवरी संभव हो सकेगी। इस तकनीक से जटिल ऑपरेशन भी अधिक सटीकता के साथ किए जा सकते हैं। इसमें चीर-फाड़ भी कम होती है, जिससे मरीज को कम दर्द होता है। विभाग अब अन्य बीमारियों से जूझ रहे बच्चों का इलाज भी रोबोटिक सर्जरी से करने की योजना बना रहा है।
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विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत ने बताया कि उन्नाव के धारवा निवासी अक्षांस को पिछले आठ महीने से दोनों अंडकोष में सूजन थी। जांच में उसे दोनों तरफ हर्निया का पता चला। सामान्य सर्जरी में दो जगह चीरा लगाना पड़ता था। वहीं रोबोटिक तकनीक में सिर्फ एक ही चीरे से सर्जरी संभव हो सकती थी। माता-पिता को इसके बारे में बताया गया। उनकी सहमति के बाद ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के अगले दिन ही बच्चा उठकर चलने-फिरने लगा, जो तेज रिकवरी का संकेत है। 16 फरवरी को उसका ऑपरेशन किया गया और इसके बाद 23 फरवरी को विभाग से छुट्टी दे दी गई। कुलपति डा. सोनिया नित्यानंद ने इस सफल सर्जरी पर पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं हैं। ऑपरेशन में करीब 60 हजार का खर्च आया।
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सर्जरी टीम
प्रो. जे. डी. रावत, प्रो. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. प्रीति और डॉ. कृतिका की सर्जिकल टीम ने अंजाम दिया। डा. विनीता सिंह और डा. नीलकमल की टीम ने एनेस्थीसिया प्रदान की। नर्सिंग ऑफिसर संजय, रीता, रिंकेश और दीप्ति ने भी टीम की सहायता की।
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रोबोटिक सर्जरी का महत्व
रोबोटिक सर्जरी से बच्चों में भी वयस्क मरीजों की तरह तेजी से रिकवरी संभव हो सकेगी। इस तकनीक से जटिल ऑपरेशन भी अधिक सटीकता के साथ किए जा सकते हैं। इसमें चीर-फाड़ भी कम होती है, जिससे मरीज को कम दर्द होता है। विभाग अब अन्य बीमारियों से जूझ रहे बच्चों का इलाज भी रोबोटिक सर्जरी से करने की योजना बना रहा है।