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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   KGMU: Doctors save patient's life by removing knife embedded in chest; surgery lasted three hours.

KGMU: छाती में धंसे चाकू को निकालकर डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान, तीन घंटे तक चली सर्जरी

Tue, 28 Jul 2026 09:20 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 28 Jul 2026 09:20 PM IST
सार

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि चाकू का हिलना जानलेवा रक्तस्राव का कारण बन सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने चाकू को सर्जरी तक उसी स्थिति में रखा। पहले प्रमुख रक्तवाहिनियों पर नियंत्रण पाया और क्षतिग्रस्त नसों की मरम्मत की। इसके बाद सावधानीपूर्वक चाकू निकाला गया।

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KGMU: Doctors save patient's life by removing knife embedded in chest; surgery lasted three hours.
केजीएमयू में डॉक्टरों ने सर्जरी कर बचाई जान। - फोटो : amar ujala

विस्तार

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने मरीज की छाती में धंसा चाकू निकालकर उसकी जान बचाई है। चाकू से शरीर की सबसे बड़ी नस सुपीरियर वेना कावा क्षतिग्रस्त हो गई थी। डॉक्टरों ने करीब तीन घंटे की जटिल सर्जरी के बाद रक्तवाहिनी की सफलतापूर्वक मरम्मत की।

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कुशीनगर निवासी 57 वर्षीय मरीज पर 23 जुलाई को जानलेवा हमला हुआ था। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें कुशीनगर से ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। सीटी स्कैन से पता चला कि चाकू फेफड़ों तक धंसा हुआ था और महाधमनी एओर्टा और शरीर की सबसे बड़ी नस सुपीरियर वेना कावा के बेहद करीब पहुंच गया था।
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ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि चाकू का हिलना जानलेवा रक्तस्राव का कारण बन सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने चाकू को सर्जरी तक उसी स्थिति में रखा। पहले प्रमुख रक्तवाहिनियों पर नियंत्रण पाया और क्षतिग्रस्त नसों की मरम्मत की। इसके बाद सावधानीपूर्वक चाकू निकाला गया। चाकू निकालते ही हुए तेज रक्तस्राव को तत्काल नियंत्रित कर रक्तवाहिनी ठीक की गई। मरीज को इस दौरान छह यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा। ट्रॉमा सर्जनों के तीन दशक से अधिक के सामूहिक अनुभव में यह अपनी तरह का पहला सफल मामला है।
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दुर्लभ और जानलेवा चोट: डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि सुपीरियर वेना कावा की गहरी चोट अत्यंत दुर्लभ होती है। यह ट्रॉमा सर्जरी में सबसे घातक वक्षीय रक्तवाहिनी चोटों में गिनी जाती है। अधिकांश मरीज अत्यधिक रक्तस्राव के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। बड़े ट्रॉमा केंद्रों में भी ऐसी चोटें कम देखने को मिलती हैं। इनमें मृत्यु-दर 30 से 70 फीसदी तक बताई गई है।


ऑपरेशन करने वाली टीम: ऑपरेशन टीम में डॉ. समीर मिश्र, डॉ. वैभव जायसवाल, डॉ. यादवेंद्र, डॉ. नरेंद्र, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी से डॉ. भूपेंद्र और एनेस्थीसिया, आईसीयू, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम।

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